बिहार में छूट गया राजद-कांग्रेस का साथ? लालू की इस घोषणा के क्या निकलेंगे राजनीतिक मायने

RJD-Congress Gathbandhan Bihar: पांच राज्यों में हो रहे विधान सभा चुनाव के बीच भाजपा के खिलाफ विरोधी दलों को एक मंच पर लाने की महागठबंधन की जहां कोशिश दिख रही थी,वहीं राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने कांग्रेस से नाता तोड़ने का एलान कर एक नया हालात पैदा कर दिया है।

Update: 2022-02-05 15:17 GMT

जितेंद्र उपाध्याय की रिपोर्ट

RJD-Congress Gathbandhan Bihar: पांच राज्यों में हो रहे विधान सभा चुनाव के बीच भाजपा के खिलाफ विरोधी दलों को एक मंच पर लाने की महागठबंधन की जहां कोशिश दिख रही थी,वहीं राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने कांग्रेस से नाता तोड़ने का एलान कर एक नया हालात पैदा कर दिया है। बिहार में भाजपा-जदयू गठबंधन को कड़ी चुनौती दे रहे महागठबंधन में दरार ने एक बार फिर विपक्ष की एकजूटता पर सवाल खड़ा कर दिया है। जिससे भाजपा के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर मजबूत गठबंधन की वकालत करने वाले राजनीतिक ताकतों की कोशिश कमजोर होगी।

बिहार में दो वर्ष पूर्व हुए विधान सभा चुनाव के दौरान भाजपा-जदयू गठबंधन के खिलाफ महागठबंधन ने एक बड़ी चुनौती पेश की थी। जिसका नतीजा था कि भले ही कम सीटों के अंतर से सरकार बनाने से महागठबंधन चूक गया पर मजबूत विपक्ष की भूमिका पेश कर रहा है। लेकिन इस बीच कांग्रेस व राजद में आपसी खिंचतान लगातार जारी रहा। जिसका नतीजा रहा कि पिछले वर्ष हुए विधान सभा के उप चुनाव में कांग्रेस व राजद अलग-अलग चुनाव लड़े थे। इसके बाद से ही कांग्रेस और राजद में तल्खी तेज हुई। तब से दोनों दलों की राह अलग ही रही है। जिसके बाद से यह बहस शुरू हो गई थी, कि महागठबंधन का आपसी रिश्ता कांग्रेस व राजद के चलते टूट गया। हालांकि कुछ दिन बाद रिश्ते फिर सामान्य होते दिखे।

महागठबंधन के टूट पर राजद प्रमुख ने लगाई मोहर

एमएलसी चुनाव को लेकर आखिरकार बिहार में कांग्रेस और राजद का गठबंधन टूट चुका है। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने इसे पूरी तरह साफ करते हुए बयान दे दिया है। लालू यादव ने बिहार विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस और राजद के साथ होने की संभावना पर भी विराम लगा दिया और स्पष्ट किया कि बिहार में कांग्रेस और राजद गठबंधन में नहीं हैं और बिहार में एमएलसी चुनाव भी राजद कांग्रेस से अलग होकर ही चुनाव लड़ेगे। लालू यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कांग्रेस के साथ राजद राष्ट्रीय स्तर पर है। बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर उन्होंने कांग्रेस के लिए कहा कि एमएलसी चुनाव में लड़ रही है कांग्रेस तो लड़े। राजद केवल राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के साथ है।

गौरतलब है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सब भी लगातार ये उम्मीदें पाले हुए थे कि राजद से उनका तालमेल सही होगा और विधान परिषद चुनाव में पार्टी साथ ही मैदान में उतरेगी। लेकिन राजद ने इसके लिए अपना फैसला तय कर लिया था कि एमएलसी चुनाव में राजद और कांग्रेस साथ नहीं रहेगी। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने खुलकर यह कहा था कि राजद कांग्रेस से अलग ही चुनावी मैदान में उतरेगी।

एक पखवारा से लगाई जा रही थी अटकलें।

एमएसलसी चुनाव में सीट शेयर को लेकर पिछले एक पखवारे से राजद व कांग्रेस में रार चल रहा था। पिछले हफ्ते भर से लालू प्रसाद यादव व ं तेजस्वी यादव से मुलाकात के लिए दिल्ली में डेरा जमाए बिहार कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा की आरजेडी के शीर्ष नेताओं से मुलाकात नहीं हो सकी। विदेश से लौटने के साथ ही तेजस्वी ने साफ कर दिया कि वह बिहार में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं देने जा रहे हैं। दिल्ली में मीडिया से बातचीत में तेजस्वी ने कहा कि कांग्रेस के साथ उनका गठबंधन केंद्र में है। बिहार में अभी ऐसा कोई चुनाव नहीं है। दो सीटों पर उपचुनाव में आरजेडी गठबंधन करने के लिए तैयार था, लेकिन कांग्रेस से सकारात्मक सहयोग नहीं मिला। तेजस्वी ने यह भी साफ कर दिया कि वामदलों के साथ मिलकर उन्होंने विधान परिषद चुनाव में प्रत्याशी पहले ही तय कर दिए हैं। आरजेडी और वाद दल अपने दम पर विधान परिषद चुनाव लड़ेंगे।

कांग्रेस का छह सीटों पर कर रही थी दावा

बिहार में जुलाई 2021 से विधान परिषद की 24 सीटें रिक्त हैं। इनमें स्थानीय निकाय प्राधिकार क्षेत्र से कार्यकाल पूरा करने वाले 19 विधान पार्षद हैं तो तीन विधान पार्षद चुनाव लड़कर विधायक बन चुके हैं। दो सीटें विधान पार्षदों के निधन से खाली हो गईं हैं। पिछली बार 24 सीटों पर महागठबंधन में आरजेडी, कांग्रस और जेडीयू ने मिलकर लड़ा था। आरजेडी व जेडीयू ने 10-10 सीटों पर तो कांग्रेस ने चार सीटों पर चुनाव लड़ा था।

कांग्रेस की यह दलिल थी कि महागठबंधन छोड़ चुके जेडीयू कोटे की 10 सीटें महागठबंधन के सभी घटक दल आपस में बांट लें। विधानसभा में कांग्रेस के पास 19 सीटें हैं। इस आधार पर सीट शेयरिंग के तहत कांग्रेस का 20 प्रतिशत सीटों पर दावा था, जो विधान परिषद में दो सीटें होती हैं। सीटिंग चार सीटों को जोड़ कर कांग्रेस कुल छह सीटें मांग रही थी।

राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा विरोधी मोर्चा होगी कमजोर

बिहार में महागठबंधन से कांग्रेस व राजद के रिश्ते समाप्त होने को लेकर आईपीएफ के प्रदेश प्रवक्ता व पूर्व विधायक रमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि राष्टीय स्तर पर कांग्रेस के साथ विरोधी दलों की एकजूटता जरूरी है। इसके बिना सांप्रदायिक ताकतों से लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती है। इससे भाजपा विरोधी मोर्चा के गठन के प्रयास को धक्का लगेगा। हालांकि बिहार की परिस्थितियां कुछ अलग है। एमएलसी चुनाव को लेकर कांग्र्रेस व राजद के अलग होने से कोई यहां फर्क नहीं पड़ेगा। कांग्रेस का अपना खुद बिहार में कोई बड़ा जनाधार नहीं है। उधर भाकपा माले के विधायक अमरजीत कुशवाहा ने कहा कि वामदलों व राजद का मजबूत गठबंधन है। जहां तक कांग्रेस की बात है ,तो यह राजद व उनका आपसी मामला है। कांग्रेस के अलग होने से बिहार की राजनीति पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। हांलांकि राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ मजबूत मोर्चे की जरूरत समय की मांग है।

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