Sonu Bairagi dies in custody: सोनू बैरागी की हिरासत में मौत, बिना पोस्टमार्टम के पुलिस ने कर दिया था अंतिम संस्कार, अब इलाहाबाद हाईकोर्ट हुआ सख्त

Sonu Bairagi dies in custody: पुलिस हिरासत में मौतें हमारे देश में आम हो चुकी हैं, और यूपी इनमें सबसे आगे है।

Update: 2022-03-28 14:50 GMT

Sonu Bairagi dies in custody: पुलिस हिरासत में मौतें हमारे देश में आम हो चुकी हैं, और यूपी इनमें सबसे आगे है। बुलंदशहर पुलिस हिरासत में हुई एक मौत के मामले में इंसाफ न मिलने के बाद कड़ा रुख अपनाते हुए कोर्ट ने पूछा है कि युवक की मौत के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर अब तक क्या कार्रवाई की गयी है। साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अतिरिक्त मुख्य सचिव को निजी हलफनामा दायर करने का आदेश दिया है। गौरतलब है कि बेटे की मौत के बाद परिजनों ने कोर्ट में इंसाफ के लिए याचिका दायर की थी, जिसकी सुनवाई दो जजों की खंडपीठ ने की।

जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रजनीश कुमार की बेंच ने सुनवाई के दौरान अतिरिक्त मुख्य सचिव को निर्देशित किया कि इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर देखें और कोर्ट को बताएं कि अब तक सरकार की ओर से इस दिशा में क्या कदम उठाए गए हैं और हिरासत में मौत के लिए जिम्मेदार पुलिस वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि 19 अप्रैल से पहले इस मामले में स्पष्टीकरण दें।

इतना ही नहीं कोर्ट ने यह भी पूछा है कि जब जांच के दौरान यह पता चल चुका है कि युवक की मौत पुलिस हिरासत में हुई थी और कस्टोडियल डैथ के बाद बुलंदशहर पुलिस ने अपने गुनाह छिपाने के लिए शव का न तो पोस्टमार्टम कराया और न ही अंतिम संस्कार के लिए लाश को परिजनों को सौंपा गया तो अब तक दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एक्शन क्यें नहीं लिया गया। पुलिस की ऐसी हरकत के बाद कोर्ट ने वरिष्ठ अधिकारियों पर भी सवाल उठाया और कहा कि कम से कम उनसे संवेदनशीलता की उम्मीद की जा सकती थी कि दो​षी पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराकर जांच करें तथा पीड़ित परिवार को मुआवजा दिलवायें। इस मामले में गौर किये जाने की बात यह है कि अभी तक पीड़ित परिवार को मुआवजा तो छोड़िये उसकी कार्रवाई तक शुरू नहीं की गयी है।

गौरतलब है कि 11 दिसंबर 2020 को खुर्जानगर कोतवाली के शहजादपुर कनैनी गांव के रहने वाले सोमदत्त उर्फ सोनू बैरागी की पुलिस कस्टडी में मौत हुई थी। सोमदत्त उर्फ सोनू बैरागी की मां सुरेश देवी और​ पिता घुरमल की तरफ से दायर याचिका के बाद हुई सुनवाई में याची के अधिवक्ता आशुतोष कुमार तिवारी और जमील अहमद आजमी ने बताया था कि खुर्जानगर कोतवाली के शहजादपुर कनैनी गांव निवासी सोमदत्त उर्फ सोनू बैरागी ने अपनी मर्जी से दूसरी जाति की लड़की से प्रेम विवाह किया था। शादी के बाद इस मामले में पूछताछ के लिए पुलिस उसे घर से उठाकर ले गई और अवैध हिरासत में रखा गया था। 11-12 दिसंबर 2020 की रात को सोनू बैरागी की पुलिस हिरासत में मौत हो गई।

पुलिस हिरासत में सोनू की मौत के बाद पुलिस की भूमिका इसलिए भी संदिग्ध रही कि उसने न तो शव का पोस्टमार्टम कराया और न ही अंतिम संस्कार के लिए शव परिजनों को सौंपा गया। पुलिस ने खुद ही सोनू बैरागी की लाश का अंतिम संस्कार कर दिया। इस मामले में याचिका दायर होने के बाद सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव गृह को अवगत कराने और अपर मुख्य सचिव को इस मामले में पीड़ित पक्ष को इंसाफ दिलाने के लिए व्यक्तिगत हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा, न्यायिक जांच के दौरान यह सामने आया है कि याचिकाकर्ता के बेटे की मौत पुलिस हिरासत में हुई थी, जिसके लिए पुलिसकर्मी जिम्मेदार हैं। इस मामले में धारा 154 के तहत रिपोर्ट दर्ज कर जांच आगे बढ़ायी जानी चाहिए थी और पीड़ित परिवार को मुआवजे के भुगतान के दावे पर भी विचार किया जाना चाहिए था।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के दो जजों न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार एवं न्यायमूर्ति रजनीश कुमार की खंडपीठ ने कहा "इस तरह के मामलों में हम उम्मीद करते हैं कि उच्च अधिकारी स्वतंत्रता से वंचित होने के प्रति संवेदनशील होंगे और तुरंत उचित कार्रवाई करने के लिए आगे बढ़ेंगे, जैसा कि कानून में जरूरी है। हम राज्य के बयान से आश्वस्त नहीं हैं कि यह मामला पीड़ित द्वारा आत्महत्या का है, क्योंकि न्यायिक जांच एक अलग निष्कर्ष पर आई है। धारा 154 के तहत एक उपयुक्त रिपोर्ट दर्ज की जानी चाहिए और जांच आगे बढ़नी चाहिए। मुआवजे के भुगतान के दावे पर भी विचार किया जाना चाहिए था।"

वहीं इस मामले में राज्य सरकार की तरफ से पेश हुए वकील ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया कि 18 जनवरी 2022 को एसीएस को रिपोर्ट मिली थी और इस संबंध में कोई और निर्देश प्राप्त नहीं हुआ था, जिस पर कोर्ट ने कहा पुलिस हिरासत में मौत एक गंभीर मामला है, खासकर जब न्यायिक जांच में लगाए गए आरोप सही पाए गये हों और इसके लिए पुलिस जिम्मेदार पाई गयी हो।

गौरतलब है कि सोनू की हिरासत में मौत के बाद उसकी मां ने सुरक्षा की मांग करते हुए न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सोनू की मां ने आरोप लगाये थे कि उनके बेटे की मौत से पहले पुलिस ने उसे तरह-तरह की यातनाएं इसलिये दीं क्योंकि उसने अपनी मर्जी से अंतरजातीय प्रेम विवाह किया था। सोनू की मां ने इस मामले में उच्च अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए शिकायत की थी कि उन्होंने भी निष्पक्ष रुख नहीं अपनाया और उनके बेटे की लाश का पोस्टमार्टम किए बिना पुलिस ने खुद ही अंतिम संस्कार कर दिया था। पुलिस का इस मामले में कहना था कि सोनू की मौत टॉर्चर से नहीं हुई, बल्कि उसने हिरासत में आत्महत्या कर ली थी।

इस मामले में गौर करने वाली बात यह भी है कि सोनू की मौत के बाद उसके माता—पिता ने जिला जज से घटना की न्यायिक जांच कराने की मांग को लेकर अर्जी दायर की थी। छह जनवरी 2021 को जिला जज ने न्यायिक जांच का आदेश दिया था, मगर एक साल से भी ज्यादा वक्त बीत जाने के बाद जांच का कोई परिणाम नहीं आया। कोर्ट ने अगली सुनवाई पर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए जिला जज बुलंदशहर से मामले की जानकारी लेकर बताने का रजिस्ट्रार कार्यालय को निर्देश दिया था। मामले की सुनवाई दो सप्ताह के बाद होगी।

राष्‍ट्रीय मानवाध‍िकार आयोग (एनएचआरसी) के आंकड़े बताते हैं कि कि उत्तर प्रदेश में 2018-19 में पुलिस हिरासत में 12 और न्‍याय‍िक हिरासत में 452 लोगों की मौत हुई थी। इसी तरह 2019-20 में पुलिस हिरासत में 3 और न्‍याय‍िक हिरासत में 400 लोगों की मौत हुई। 2020-21 में पुलिस हिरासत में 8 और न्‍याय‍िक हिरासत में 443 लोगों की मौतों का मामला सामने आया था। 27 जुलाई 2021 को लोकसभा में पूछे गये एक सवाल के जवाब में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया था कि हिरासत में मौत के मामलों में उत्‍तर प्रदेश पहले नंबर पर है। उत्‍तर प्रदेश में पिछले तीन साल में 1,318 लोगों की पुलिस और न्‍याय‍िक हिरासत में मौत हुई है।

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