Sri Lanka President House Attack: राष्ट्रपति भवन में घुसने के कुछ ही देर बाद श्रीलंकाई प्रधानमंत्री का आवास भी हुआ आग के हवाले

Sri Lanka President House Attack: जिस जनता ने श्रीलंका में कभी अपने शासकों को सिर पर बैठाया था, आज वही जानता उनकी उसी गति से दुर्गति पर उतारू हो गई है।

Update: 2022-07-09 17:37 GMT

Sri Lanka President House Attack: राष्ट्रपति भवन में घुसने के कुछ ही देर बाद श्रीलंकाई प्रधानमंत्री का आवास भी हुआ आग के हवाले

Sri Lanka President House Attack: जिस जनता ने श्रीलंका में कभी अपने शासकों को सिर पर बैठाया था, आज वही जानता उनकी उसी गति से दुर्गति पर उतारू हो गई है। अंधराष्ट्रवाद के सहारे सत्ता में श्रीलंका की सत्ता में आए शासकों की गलत आर्थिक नीतियों के चलते देश के तबाही और गर्त में चले जाने के बाद आज शनिवार को जहां गुस्साए लोग राष्ट्रपति आवास में घुस गए, जिसके बाद श्रीलंका के राष्ट्रपति को अपने आवास से खड़े पैर जान बचाकर भागना पड़ा तो दूसरी तरफ इस घटनाक्रम के कुछ बाद ही अक्रोशित लोगों ने श्रीलंका के प्रधानमंत्री आवास को भी आग के हवाले कर डाला। पीएम निवास पर आगजनी से पूर्व ही प्रधानमंत्री जनता के गुस्से को देखते हुए त्याग पत्र दे चुके थे। लेकिन उनका त्याग पत्र भी जनाक्रोश को शांत नहीं कर पाया था।

मालूम हो कि गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका में मुश्किलों का दौर इस स्तर पर पहुंच चुका है कि लोग खाना-पानी और तेल-गैस की किल्लतों से बुरी तरह जूझ रहे हैं। देश की इस दुर्गति के लिए लोग अपने उन शासकों को मान रहे हैं, जिनकी कुछ दिनों पूर्व वह जय-जयकार कर रहे थे। अपने नेताओं के प्रति लोगों के गुस्से का आलम यह था कि शनिवार को देश के लाखों लोगों ने देश के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के कोलंबो स्थित आवास पर हमला करते हुए उस पर अपना कब्जा कर लिया था। इतना ही नहीं राष्ट्रपति सचिवालय पर भी हजारों प्रदर्शनकारियों ने अपना कब्जा कर लिया था। हालांकि इस कब्जे के दौरान राष्ट्रपति गोटबाया मौके से फरार होने में सफल रहे। उनकी अभी तक कोई स्पष्ट लोकेशन न मिलने पर समझा जा रहा है कि वह श्रीलंका छोड़कर भाग चुके हैं। राष्ट्रपति भवन पर प्रदर्शनकारियों के इस कब्जे के कुछ ही देर बाद श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने भी हालात अपने से काबू से बाहर जाते और जनता के आक्रोश को देखता हुए तुरंत अपने इस्तीफा देने की घोषणा कर दी।

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लेकिन श्रीलंका की जनता पर प्रधानमंत्री के इस इस्तीफे का कोई असर नहीं पड़ा। आक्रोशित प्रदाशनकारियों ने श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के घर में घुसकर उसे आग के हवाले कर दिया। खबर पब्लिश किए जाने के समय तक श्रीलंकाई प्रधानमंत्री के घर के अंदर से काला धुआं दिखता नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री आवास में मौजूद लोगों के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। खुद प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे के किसी सुरक्षित स्थान पर छिपे होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। श्रीलंका के प्रदर्शनकारी अपने देश की मीडिया से भी इस कदर गुस्से में हैं कि पत्रकारों को देखते ही उनकी पिटाई की जा रही है। प्रदर्शनकारियों में इस बात को लेकर बेहद गुस्सा है कि श्रीलंकाई मीडिया अपने देश के नागरिकों को देश के पूरी तरह बरबाद होने से पहले तक देश की बदहाल स्थिति से अनभिज्ञ रखकर "ऑल इस वेल" का संदेश देता रहा।

आर्थिक तौर पर संकट में आ चुका भारत के इस निकटतम पड़ोसी देश श्रीलंका में बीते कुछ समय से संकट पूरी तरह से सतह पर आ चुका है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से शांत दिखाई दे रहे श्रीलंका में राजनीतिक हालात शनिवार को एक बाद फिर बेहद तेजी से बिगड़ गए हैं। शनिवार को जिस प्रकार प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति भवन में घुसकर राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को अपना आवास छोड़कर भागने पर मजबूर करने के बाद त्यागपत्र की घोषणा कर चुके प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के घर को आग लगा दी है उससे अब राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे पर भी पद छोड़ने का दबाव बढ़ गया है। ऐसे में देश की कमान स्पीकर को सौंपी जा सकती है। वह नए नेता का चुनाव होने तक इस पद को संभालेंगे।

श्रीलंका में पैदा हुए इस संकट के लिए राजपक्षे परिवार को ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। सड़कों पर कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स को तैनात किया गया है। शनिवार को इस सनसनीखेज घटनाक्रम से पूर्व श्रीलंका में चंद महीने पहले प्रदर्शनकारियों द्वारा तत्कालीन पीएम महिंदा राजपक्षे के घर को भी आग के हवाले कर दिया गया था। जिसके बाद राजपक्षे को मजबूरन राजधानी कोलंबो को छोड़कर एक अज्ञात मिलिट्री बेस पर शरण लेनी पड़ी थी। इसी घटना के बाद महिंदा ने अपने पद से त्यागपत्र भी दे दिया था। जिसके बाद आज तक उनकी मौजूदगी का पता नहीं चल सका है। अपनी आजादी के बाद के सबसे गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका के दिवालिया होने के कगार पर पहुंचने की वजह राजपक्षे की नीतियां ही मानी जा रहीं हैं। अपनी बर्बादी के चलते श्रीलंका ने अपने विदेशी ऋण (कर्ज) की अदायगी स्थगित कर दी है। उसे इस साल विदेशी ऋण के रूप में सात अरब डॉलर और 2026 तक 25 अरब डॉलर अदा करना है। उसका विदेशी मुद्रा भंडार घट कर एक अरब डॉलर से भी कम रह गया है। ऐसे में श्रीलंका के पास इस साल भी विदेशी कर्ज चुकाने जितना पैसा नहीं बचा है।

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