Supreme Court ने तनाव को देखते हुए ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी पूजा पर लगाई रोक, सुनवाई के लिए 3 जजों की बेंच गठित
Supreme Court ने बेंगलुरु ईदगाह मैदान ( Idgah maidan ) में गणेश पूजा ( Ganesh Pooja ) के आयोजन पर लगाई रोग। अब तीन सदस्यीय बेंच करेगी इस मामले की सुनवाई।
सुप्रीम कोर्ट ने तनाव को देखते हुए बेंगलुरु के ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी पूजा पर लगाई रोक
नई दिल्ली। बेंगलुरु ( Bengaluru) के चामराजपीठ ईदगाह मैदान ( Idgah Maidan) को लेकर दो समुदायों के बीच जारी विवाद को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ( Supreme court ) ने गणेश पूजा ( Ganesh pooja ) आयोजन पर तत्काल रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने अहम फैसले में कहा है कि आप कहीं और पूजा करें या फिर आप हाईकोर्ट के ( Bengaluru high court ) पास वापस जाएं। फिलहाल यथास्थिति बनाए रखें। इस मसले पर अंतिम फैसला लेने के सुप्रीम कोर्ट ने 3 जजों की बेंच गठित कर दी है। दो जजों की बेंच में इस मसले पर मतभेद होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला लिया।
सुप्रीम कोर्ट ( Supreme court ) ने कर्नाटक सरकार को बेंगलुरु के ईदगाह मैदान ( Idgah maidan ) में गणेश चतुर्थी ( Ganesh pooja ) के आयोजन मामले में कुछ दिनों के लिए यथास्थिति बनाए रखने के लिए कहा है। साथ ही कहा कि गणेश चतुर्थी पूजा बेंगलुरु के चामराजपेट के ईदगाह मैदान के बजाय कहीं और की जा सकती है। इंदिरा बनर्जी की अध्यक्षता वाली पीठ ने कर्नाटक सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कुछ दिनों तक यथास्थिति बनाए रखने को कहा। इस पीठ में न्यायमूर्ति एएस ओका और एमएम सुंदरेश भी शामिल थे। दरअसल, कर्नाटक सरकार के खिलाफ कर्नाटक के सेंट्रल मुस्लिम एसोसिएशन और एयूक्यूएएफ के कर्नाटक राज्य बोर्ड की ओर से दायर याचिकाओं का निपटारा करते हुए ये बात कही।
कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले का पलटा
इससे पहले बेंगलूरु हाईकोर्ट ने चामराजपेट के ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी समारोह आयोजित करने की अनुमति दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि राजय सरकार गणेश पूजा आयोजन की इजाजत दे सकती है। राज्य सरकार की ओर से यथास्थिति बनाए रखने के 25 अगस्त के अंतरिम आदेश को चुनौती देने वाली अपील दायर करने के बाद अदालत ने यह आदेश पारित किया। बाद में हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश में संशोधन किया और राज्य सरकार को 31 अगस्त से सीमित अवधि के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए भूमि के उपयोग की मांग करने वाले आवेदनों पर विचार करने और उचित आदेश पारित करने की अनुमति दी।
एक याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने कहा कि राज्य सरकार 200 साल की यथास्थिति को बदलना चाहती है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भी कहा कि यह ईदगाह की भूमि है और इसका इस्तेमाल अन्य धर्मों के त्योहारों के लिए नहीं किया जाना चाहिए। प्रश्नगत भूमि पर कोई अन्य धार्मिक गतिविधि नहीं की गई, तो यथास्थिति क्यों नहीं।
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि 200 वर्षों के लिए प्रश्नगत भूमि पर कोई अन्य धार्मिक गतिविधि नहीं की गई तो यथास्थिति क्यों नहीं। इस पर पीठ ने कहा कि 200 साल तक जो नहीं हुआ उसे रहने दीजिए। शीर्ष अदालत को सूचित किया गया कि कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु के ईदगाह मैदान में कल और परसों गणेश चतुर्थी समारोह की अनुमति दी है।
बता दें कि पिछले सप्ताह बेंगलूरु हाईकोर्ट ने चामराजपेट के ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी समारोह आयोजित करने की अनुमति दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि राजय सरकार गणेश पूजा आयोजन की इजाजत दे सकती है। राज्य सरकार की ओर से यथास्थिति बनाए रखने के 25 अगस्त के अंतरिम आदेश को चुनौती देने वाली अपील दायर करने के बाद अदालत ने यह आदेश पारित किया। बाद में हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश में संशोधन किया और राज्य सरकार को 31 अगस्त से सीमित अवधि के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए भूमि के उपयोग की मांग करने वाले आवेदनों पर विचार करने और उचित आदेश पारित करने की अनुमति दी।
बेंगलुरु के ईदगाह मैदान पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देखते हुए हुबली के मुस्लिम संगठनों ने हाईकोर्ट का रुख किया था। रात 10 बजे हाईकोर्ट का दरवाजा खुला और जज ने अपने चैंबर में इस केस की सुनवाई की क्योंकि मुस्लिम संगठनों ने अर्जेंट सुनवाई की अपील की थी। अदालत ने मुस्लिम संगठनों की मांग को खारिज करते हुए ईदगाह मैदान में गणेशोत्सव पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। बता दें कि गणेश चतुर्थी का उत्सव बुधवार से शुरू हो रहा है। हुबली के स्थानीय प्रशासन ने ईदगाह मैदान में तीन दिन तक गणेश जी को स्थापित करने की परमिशन दी थीए जिसे मुस्लिम संगठनों ने चुनौती दी थी।