सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया विनोद दुआ के खिलाफ राजद्रोह का मामला, कहा- हर पत्रकार की रक्षा की जाएगी

कोर्ट ने 1962 के केदारनाथ बनाम बिहार राज्य केस का हवाला देकर दुआ को दोषमुक्त करते हुए कहा कि केदार नाथ सिंह के फैसले के अनुसार हर पत्रकार की रक्षा की जाएगी....

Update: 2021-06-03 07:20 GMT

(नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ)

जनज्वार डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ पर राजद्रोह का केस रद्द कर दिया। दुआ पर अपने यूट्यूब चैनल में मोदी सरकार पर कुछ टिप्पणियों के लिए शिमला, हिमाचल प्रदेश में राजद्रोह का केस दर्ज किया गया था।

दुआ ने इसके खिलाफ देश की सबसे बड़ी अदालत में अपील की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने प्राथमिकी और कार्यवाही को रद्द कर दिया। कोर्ट ने 1962 के केदारनाथ बनाम बिहार राज्य केस का हवाला देकर दुआ को दोषमुक्त करते हुए कहा कि केदार नाथ सिंह के फैसले के अनुसार हर पत्रकार की रक्षा की जाएगी।

बता दें कि कोर्ट ने पिछले साल 20 जुलाई को मामले में किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से दुआ को दी गई सुरक्षा को अगले आदेश तक बढ़ा दिया था।

कोर्ट ने इससे पहले पहले कहा था कि दुआ को मामले के संबंध में हिमाचल प्रदेश पुलिस द्वारा पूछे गए किसी अन्य पूरक प्रश्न का उत्तर देने की आवश्यकता नहीं है।

भाजपा नेता श्याम ने शिमला जिले के कुमारसैन थाने में पिछले साल छल मई को राजद्रोह, सार्वजनिक उपद्रव मचाने, मानहानिकारक सामग्री छापने आदि के आरोप में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दुआ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी और पत्रकार को जांच में शामिल होने को कहा गया था।

श्याम ने आरोप लगाया था कि दुआ ने अपने यूट्यूब कार्यक्रम में प्रधानमंत्री पर कुछ आरोप लगाए थे।

1962 में सुप्रीम कोर्ट ने केदारनाथ बनाम बिहार राज्य के वाद में महत्वपूर्ण व्यवस्था दी थी। अदालत ने कहा था कि सरकार की आलोचना या फिर प्रशासन पर कॉमेंट करने से राजद्रोह का मुकदमा नहीं बनता। राजद्रोह का केस तभी बनेगा जब कोई भी वक्तव्य ऐसा हो जिसमें हिंसा फैलाने की मंशा हो या फिर हिंसा बढ़ाने का तत्व मौजूद हो।

राजद्रोह का मामला शुरू से ही विवादों के घेरे में रहा है। पांच साल पहले सुप्रीम कोर्ट में इसको लेकर एक अर्जी दाखिल की गई थी और राजद्रोह कानून पर सवाल उठाया गया था। तब सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया गया था कि राजद्रोह से संबंधित कानून का सरकार दुरुपयोग कर रही है।

याचिकाकर्ता ने तब कहा था कि संवैधानिक बेंच ने राजद्रोह मामले में व्यवस्था दे रखी है बावजूद इसके कानून का दुरुपयोग हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट में कॉमनकॉज की ओर से दाखिल अर्जी में कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने 1962 ने केदारनाथ बनाम बिहार राज्य के मामले में जो व्यवस्था दे रखी है उसे पालन किया जाना चाहिए और इसको लेकर सरकार को निर्देश दिया जाना चाहिए।

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