Thoothukudi Firing 2018 : अरुणा जगदीशन आयोग ने फायरिंग को माना गलत, सरकार दोषी ADG Police, DM से लेकर कॉन्स्टेबल के खिलाफ करे कार्रवाई

Thoothukudi Firing 2018 : पूर्व जस्टिस और आयोग के प्रमुख अरुणा जगदीशन ने डीएमके सरकार से सिफारिश की है कि वो दोषी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी व अन्य कर्मचारियों के खिलाफ निष्पक्ष भाव से सख्त कार्रवाई करे।

Update: 2022-08-20 09:35 GMT

Thoothukudi Firing 2018 : साल 2018 में तमिलनाडु के तूतुकुडी में स्टरलाइट विरोधी प्रदर्शन ( anti sterlite protest )  में भाग लेने वाले नागरिकों पर पुलिस फायरिंग ( Thoothukudi Firing ) की जांच को लेकर गठित जस्टिस अरुणा जगदीशन कमीशन ( Justice Aruna Jagadeesan Commission rep[ort ) ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट का खुलासा अब हुआ है। जगदीशन कमेटी ने साफ शब्दों में कहा है कि प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा जरूरत से ज्यादा और अकारण घातक बल प्रयोग किया गया था। फायरिंग की घटना को जायज नहीं ठहराया जा सकता। आयोग ने डीएमके सरकार ( DMK Government ) से सिफारिश की है कि वो दोषी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी व अन्य कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। कार्रवाई की जरूरत इसलिए है कि पुलिस ने फायरिंग कर अपनी निहित शक्तियों को सीमा से आगे जाकर दुरुपयोग किया।

डीएम और पुलिस अधिकारियों के बीच रहा तालमेल का सख्त अभाव

अरुणा जगदीशन जांच आयोग की रिपोर्ट ( Justice Aruna Jagadeesan Commission rep[ort ) 18 मई 2022 को मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को भेजी गई थी। प्रदेश सरकार को नियमानुसार छह महीने के भीतर विधानसभा के समक्ष आयोग की रिपोर्ट को प्रस्तुत करना होगा। फ्रंटलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस अरुणा जगदीशन की अध्यक्षता में गठित आयोग ने कहा कि इन विरोध प्रदर्शन के दौरान 13 लोगों की जान चली गई थी। साथ ही कई प्रदर्शनकारी घायल हुए थे। तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और जिला कलेक्टर के बीच समन्वय की कमी की वजह से भीड़ हिंसक हुई थी।

पूर्व एआईएडीएमके सरकार के दावों को किया खारिज

अपनी रिपोर्ट ( Justice Aruna Jagadeesan Commission rep[ort ) में पैनल की प्रमुख और मद्रास हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अरुणा जगदीशन ने तत्कालीन अखिल भारतीय अन्नाद्रविड़ मुनेत्र कषगम सरकार के दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। आयोग ने कहा है कि पुलिस ने जरूरत से ज्यादा और अकारण भीड़ की हिंसा को काबू करने के लिए गोलियां चलाई। तत्कालीन एआईएडीएमके सरकार दावों के सच्चाई को लेकर ऐसी कोई सामग्री नहीं मिली जिससे यह साबित किया जा सके कि केवल प्रदर्शनकारियों की एक उन्मादी भीड़ से निपटने के लिए फायरिंग की गई थी।

एडीजी पुलिस, डीएम से लेकर कांस्टेबल तक दोषी

तमिलनाडु सरकार गठित आयोग की रिपोर्ट ने हिंसा के लिए कई शीर्ष पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया। इन पुलिस अधिकारियों में तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक दक्षिण क्षेत्र शैलेश कुमार यादव, अब एडीजीपी पुलिस कल्याण, पुलिस उप महानिरीक्षक तिरुनेलवेली रेंज कपिल कुमार सी शरतकर अब अतिरिक्त पुलिस आयुक्त चेन्नई शहर, पुलिस अधीक्षक ;तूतुकुडी पी महेंद्रन अब उपायुक्त प्रशासन चेन्नई और डिप्टी एसपी तूतुकुडी लिंगथिरुमरन के साथ तीन इंस्पेक्टर, दो सब.इंस्पेक्टर, एक हेड कॉन्स्टेबल और सात कॉन्स्टेबल शामिल हैं।

तत्कालीन डीएम वेंकटेश ने बरती थी गंभीर लापरवाही

इसके अलावा अयोग ने तत्कालीन जिला कलेक्टर एन वेंकटेश का नाम लिया है जो वर्तमान में हैदराबाद में राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड में कार्यरत हैं। रिपोर्ट में उन्हें जिम्मेदारी से बचने, घोर लापरवाही और गलत फैसलों के लिए उत्तरदायी बताया है। वेंकटेश के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश करते हुए जांच समिति ने कहा कि वह 22 मई को तूतुकुडी में जिला मुख्यालय में रहने के बजाय लगभग 100 किलोमीटर दूर कोविलपट्टी में थे जबकि शहर घेराबंदी था।

पुलिस ने किया जरूरी मानदंडों का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन

जगदीशन आयोग ने अपने निष्कर्ष में पाया है किगोली लंबी दूरी ;के हथियारों से चलाई गई थी, न कि छोटी दूरी के हथियारों से। इस बात की पुष्टि मृतकों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और घायल व्यक्तियों के केस स्टडी से भी हुई है। प्रदर्शन के दौरान तैनात पुलिसकर्मियों ने पुलिस के स्थायी आदेशों या ऐसी स्थितियों के लिए अनिवार्य डूज़ एंड डोंट्स का पालन नहीं किया। पीएसओ द्वारा अनिवार्य रूप से कोई चेतावनी नहीं दी गई। आंसू गैस या वॉटर कैनन, पानी की बौछार का उपयोग, लाठीचार्ज या हवा में गोली चलाकर चेतावनी देने जैसी कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। रिपोर्ट यह भी है कि पुलिसकर्मियों को जान-माल का नुकसान पहुंचने का कोई खतरा नहीं था। समिति ने यह भी कहा कि सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कमर और घुटनों के नीचे निशाना नहीं लगाया बल्कि शहर के विभिन्न स्थानों पर एकत्रित लोगों पर रैंडम शॉट यानी अचानक गोलियां दागीं। आयोग ने पुलिस के न्यायेतर कारनामों के उदाहरण के लिए पक्के शूटर के तौर पर विशेष रूप से एक पुलिस कॉन्स्टेबल सुदलाईकन्नू का नाम लिया है।

डीएमके ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का किया था वादा

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2021 के दौरान डीएमके प्रमुख स्टालिन ने सत्ता में आने पर लोगों की जान जाने और हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन मतदाताओं को दिया था। स्टालिन सरकार ने इस साल 28 मई को संयंत्र द्वारा मानदंडों के उल्लंघन का हवाला देते हुए वन और पर्यावरण विभाग द्वारा जारी एक आदेश के माध्यम से संयंत्र को बंद कर दिया था।

99 दिनों तक चला था प्रदर्शन

Thoothukudi Firing 2018 : बता दें कि 2018 में तूतीकोरीन के लोगों ने पर्यावरणीय दुष्प्रभावों के आधार पर वेदांता समूह के स्टरलाइट कॉपर प्लांट के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया था। लोगों का प्रदर्शन 99 दिनों तक चला था। लोगों की मांग थी स्टरलाइट कॉपर प्लांट के संभाविक नुकसान को देखते हुए उसे बंद कर दिया जाए। 22 मई 2018 को यह प्रदर्शन हिंसक हो गया जिसके बाद पुलिस ने हिंसक भीड़ का नियंत्रित करने के लिए फायरिंग की थी। उक्त घटना में 13 नागरिकों की मौत हुई थी। घटना के बाद जिले में इंटरनेट भी बंद कर दिया गया था, जो उस समय तमिलनाडु में पहली बार हुआ था।

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