SC ने केंद्र को लगाई फटकार, कहा - इस अदालत के फैसले का कोई सम्मान नहीं, आप हमारे धैर्य की परीक्षा ले रहे

सीजेआई ने कहा कि इस अदालत के फैसले का कोई सम्मान नहीं है,आप हमारे धैर्य का परीक्षण कर रहे हैं! कितने व्यक्तियों को नियुक्त किया गया था? आपने कहा कि कुछ व्यक्तियों को नियुक्त किया गया था? नियुक्तियां कहां हैं?...

Update: 2021-09-06 07:38 GMT

वरिष्ठ अधिवक्ता एमएल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में एक और पूरक अर्जी दायर कर पेगासस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच की मांग की। 

जनज्वार। ट्रिब्यूनल में रिक्तियों को भरने में देरी और ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट पारित करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने इसे 'अदालत द्वारा हटाए गए प्रावधाओं की वर्चुअल प्रतिकृति' करार दिया।

सीजेआई जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एल नागेश्वर राव की बेंच ने भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को ट्रिब्यूनल के मामले की स्थिति के बारे में कोर्ट की अत्यधिक नाराजगी से अवगत कराया।

कानूनी मामलों की समाचार वेबसाइट लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक सीजेआई ने कहा, "इस अदालत के फैसले का कोई सम्मान नहीं है। आप हमारे धैर्य का परीक्षण कर रहे हैं! कितने व्यक्तियों को नियुक्त किया गया था? आपने कहा कि कुछ व्यक्तियों को नियुक्त किया गया था? नियुक्तियां कहां हैं?"

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, "न्यायाधिकरण अधिनियम वस्तुत: मद्रास बार एसोसिएशन में इन न्यायालय द्वारा रद्द किए गए प्रावधानों की प्रतिकृति है।"

जस्टिस नागेश्वर राव ने पिछले दो मद्रास बार एसोसिएशन के फैसले लिखे थे। उन्होंने सॉलिसिटर जनरल से पूछा कि नियुक्तियां अदालत द्वारा पारित विभिन्न निर्देशों के अनुरुप क्यों नहीं की गई हैं। सीजेआई ने कहा कि अदालत स्थिति से बेहद परेशान है। उन्होंने कहा कि हमारे पास केवल तीन विकल्प हैं। एक हम कानून पर रोक लगा दें। दो हम ट्रिब्यूनल को बंद कर दें और तीसरा हम खुद नियुक्तियां कर सकते हैं।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि सदस्यों की कमी के कारण एनसीएलटी और एनसीएलटी जैसे न्यायाधिकरणों कामकाज ठप हो गया है। एनसीएलटी देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। रिक्तियों के कारण एनसीएलटी समय-सीमा का पालन करने में सक्षम नहीं है। एनसीएलटी और एनसीएलटी के मानव रहित होने के कारण एक गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है। एएफटी के साथ भी यही स्थिति है।

इस पर सॉलिसिटर जनरल ने जवाब के लिए दो-तीन दिन का समय मांगा। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने वित्त मंत्रालय से प्राप्त निर्देशों को पढ़ा जिसमें कहा गया था कि खोज सह चयन समितियों द्वारा की गई सिफारिशों पर अंतिम निर्णय दो सप्ताह के भीतर किया जाएगा।

बेंच ने मामले को अगले सोमवार 13 सितंबर तक के लिए स्थगित किया और कहा, 'हम उम्मीद करते हैं कि तब तक नियुक्तियां हो जाएंगी।' बेंच ने कांग्रेस सांसद व पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश द्वारा ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट 2021 को चुनौती देने वाली एक रिट याचिका पर भी नोटिस जारी किया। जयराम रमेश की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील मनु सिंघवी ने बेंच को अधिनियम के प्रावधानों की ओर इशारा किया जो कि दोबारा अधिनियमित किए गए हैं, कोर्ट ने जिन प्रावधानों को रद्द कर दिया था।

सीजेआई रमना ने कहा, 'हम बाद के कानून को ज्यादा महत्व नहीं देने जा रहे हैं। मद्रास बार एसोसिएशन का फैसला अटॉर्नी जनरल को सुनने के बाद पारित किया गया था।' जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि विधायिका निर्णय के आधार को छीन सकती है लेकिन वह ऐसा कानून नहीं बना सकती तो फैसले के विपरीत हो। उन्होंने आगे कहा, 'आप सीधे सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विपरीत कानून नहीं बना सकते।'  

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