UP Election 2022 : लॉकडाउन में जो बसें गायब थीं अब सरकारी आदेश पर नेताओं की गुलामी कर रहीं, तो क्या एक जान की गिनती वोट भर है!

रैलियों में जो सबसे बड़ी बात देखने को मिल रही वह ये कि, इनकी भीड़ जुटाने के लिए जनपदों के अफसर हाथ पांव मार रहे। यह मसला अपने आप में अबतक का सबसे हैरान करने वाला मुद्दा है....

Update: 2021-11-19 16:46 GMT

(जब लोग पैदल थे तब सरकार ने बसें भी बंद कर दीं थीं और अब...)

UP Election 2022 : उत्तर प्रदेश 2022 का बिगुल बज चुका है। नेताजी लोग अपना सर्वस्व न्यौछावर करने के लिए आगे बढ़ चुके हैं। तिसपर सत्ताधारी पार्टी ने तो बिल्कुल आसमान सिर पर उठा रखा है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के लिए प्रदेश में सत्ता सहित तमाम जनपदों के अफसरानों ने भी पलक-पावड़े बिछा दिए हैं।

गौरतलब है की उत्तर प्रदेश में पीएम मोदी से लगाकर, गृहमंत्री अमित शाह सहित तमाम नेताओं की रैलियां दर रैलियां हो रही हैं। इन रैलियों में जो सबसे बड़ी बात देखने को मिल रही वह ये कि, इनकी भीड़ जुटाने के लिए जनपदों के अफसर हाथ पांव मार रहे। यह मसला अपने आप में अबतक का सबसे हैरान करने वाला मुद्दा है। 

बताते चलें कि यूपी में भाजपा आलाकमान के नेताओं के लिए स्थानीय महकमा बसें जुटाने का काम कर रहा है। जिसमें स्थानीय लोगों की भीड़ को भरकर रैली स्थलों पर लाया जा सके। सुल्तानपुर, गोरखपुर, आजमगढ़ और उसके बाद महोबा के जिलाधिकारियों द्वारा जारी किया गया फरमान सामने आ चुका है।

इन जारी फरमानों के मुताबिक बाकायदा पत्र लिखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के लिए बसों का प्रबंध महज इसलिए किया गया की ज्यादा से ज्यादा भीड़ को भरकर सभाओं तक पहुँचाया जा सके। 

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