DDU News Today: सत्ता पाने की होड़ में सीएम के शहर में अनसुनी न रह जाए एक अनशनकारी की आवाज

DDU News Today: यूपी में विधान सभा चुनाव अपने सबाब पर है। हर दल भ्रष्टाचार के खिलाफ सुचिता की बात कर रहा है। ऐसे वक्त में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के शहर गोरखपुर में ऐसे ही कुछ सवालों को लेकर अनशन कारी एक प्रोफेसर की आवाज न तो सरकार को सुनाई पड़ रही है और न ही विपक्ष को।

Update: 2022-02-07 13:06 GMT

DDU News Today: यूपी में विधान सभा चुनाव अपने सबाब पर है। हर दल भ्रष्टाचार के खिलाफ सुचिता की बात कर रहा है। ऐसे वक्त में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के शहर गोरखपुर में ऐसे ही कुछ सवालों को लेकर अनशन कारी एक प्रोफेसर की आवाज न तो सरकार को सुनाई पड़ रही है और न ही विपक्ष को। भ्रष्टाचार के आरोपी गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति के खिलाफ उठ रही यह आवाज़ चुनावी हुड़दंग में कहीं हमेशा के लिए बंद न हो जाए,इन खतरों से इंकार नहीं किया जा सकता।

7 फरवरी दिन सोमवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व संविदा शिक्षक डॉ. सम्पूर्णानन्द मल्ल के अनशन का बारहवां दिन हो गया। जिला प्रशासन ने एक मात्र यह कदम उठाया है कि उन्हें जिला अस्पताल के आईसीयू वार्ड में भर्ती करा दिया है। कहा जा रहा है कि लगातार अनशन का नतीजा है कि उनका किडनी एवं लिवर छतिग्रस्त होने लगा है। अनशन के राह पर चल पड़े डॉ सम्पूर्णानन्द इस लड़ाई में अकेले नहीं हैं। इनके पहले से हिंदी विभाग के प्रोफेसर डॉ कमलेश गुप्ता

सत्याग्रह पर हैं। जिनके समर्थन में खड़े हैं शिक्षक व विश्वविद्यालय के बड़ी संख्या में छात्र। आंदोलन का स्वरूप ही है कि का अनशन के बारहवें दिन कुशीनगर से महाकश्यप भंते आए और डॉक्टर मल्ल की मांगों का समर्थन करते हुए कुलपति को हटाने की मांग की।

उधर दो दिन पूर्व डॉ सम्पूर्णानन्द ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि थोड़ा सा लोकतंत्र हमें कल के लिए भी छोड़ना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियां इसे महसूस कर सकें। आपके पर्चा दाखिला के गाजे- बाजे बज रहे थे तब मैं अनशन के नौवें दिन भूख से परेशान था। परन्तु इतनी आशा जरूर थी कि माननीय मुख्यमंत्री जी फुर्सत पाने पर गोरखपुर विश्वविद्यालय(डीडीयू) के तानाशाह एवं भ्रष्ट कुलपति को हटाकर इसके विरुद्ध जांच समिति गठित करने का आदेश चांसलर भवन से जारी करवाएँगे क्योंकि छात्र, शोधार्थी, आचार्य, नगर के प्रबुद्ध नागरिक कुलपति की बर्खास्तगी की मांग कर रहे हैं।

मैं एक सवाल करना चाहता हूं कि क्या हमारे हिस्से में इतना भी लोकतंत्र नहीं है कि हम भ्रष्ट एवं तानाशाह को बदल कर उसके ऊपर लगे आरोप की जांच करा सकें? अनशन से मेरे लीवर एवं किडनी दोनों प्रभावित हो चुके हैं इसके लिए कुलपति की भ्रष्ट एवं तानाशाह प्रणाली जिम्मेदार है।

जिला अस्पताल में चिकित्सकों की गहन निगरानी में आमरण अनशन कर रहे सम्पूर्णानंद को पिछले दिनों से प्रशासन द्वारा जिला अस्पताल के हृदय रोग विभाग में भर्ती कराया गया है। उन्होंने कहा कि पूर्णिया में पूर्व कुलपति प्रोफेसर राजेश सिंह के विरुद्ध जांच संस्थित है फिर इनको डीडीयू विश्वविद्यालय गोरखपुर का कुलपति क्यों औऱ किसने बनाया?

इनके प्रत्येक कार्य की सुचिता पर सवाल खड़े है। और विश्विद्यालय के आचार्य, विद्यार्थी, शोधार्थी सभी इनके बर्खास्तगी की मांग कर रहे हैं। मैंने मंडलायुक्त, जिलाधिकारी समेत समस्त प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ही महामहिम कुलाधिपति /गवर्नर महोदया को मैंने अनेक प्रार्थना पत्र प्रेषित किए परंतु मेरे एक भी पत्र का कोई जवाब नहीं मिला क्या इस लोकतंत्र में मुझे जवाब पाने का भी अधिकार नहीं है? मैं कैसे महसूस करूं कि मैं एक लोकतांत्रिक देश का नागरिक हूं। मैं यह जानता हूं, कि जवाबदेहीहीन लोकतंत्र ठुठे पेड़ के समान है। ऐसे में अब समाज के प्रबुद्ध जनों का नैतिक समर्थन लगातार मेरा मनोबल मजबूत बना रहा है।

मेरे आमरण अनशन का आज दसवां दिन है। मेरी प्राण शक्ति कमजोर होती जा रही है। मैं भगत भारत एवं राष्ट्रपिता गांधी की संतान हूं एक ही चीज जिससे मैं समझौता कर सकता हूं वह है सत्य। प्रबुद्ध वर्ग की प्रेरणा से मेरा आमरण अनशन इस तानाशाह एवं भ्रष्ट कुलपति के बर्खास्त होने तक जारी रहेगा।मैं अडिग हूँ। डॉ सम्पूर्णानन्द डीडीयू के कुलपति को बर्खास्त किए जाने ,शिक्षको के निलंबन और वेतन कटौती के साथ ,प्री पी एच डी शोधार्थियों पर दर्ज आपराधिक मुकदमे की वापसी एवँ उनके परीक्षा अधिकार की बहाली की मांग कर रहे हैं।

डॉ मल्ल के गंभीर हालत के दृष्टिगत, मानदेय शिक्षक संघ गोरखपुर विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ दुर्गा प्रसाद यादव, राजीव गांधी स्टडी सर्किल गोरखपुर के समन्वयक डॉ प्रमोद कुमार शुक्ला, डीडीयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष अमन यादव, समेत कमलकांत राव, मनदीप राय, प्रशांत मौर्य, सुधीर मद्धेशिया, पप्पू गुप्ता, शंभू नाथ वर्मा कृतिका सहित दिशा छात्र संगठन ने भी पिछले दिनों संपूर्णानंद मल्ल के समर्थन में विश्वविद्यालय गेट पर धरना प्रदर्शन किया और अपना समर्थन दिया। इस बीच डॉ संपूर्णानंद के अनशन के चलते लगातार सेहत चिंता जनक बनती जा रही है।

दूसरी तरफ जिला प्रशासन शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव कराने में लगा हुआ है । इसके अतिरिक्त सत्ता से लेकर विपक्षी दल भी चुनावी बाजी अपने पक्ष में करने की कोशिश में ही लगे हैं। लोकतंत्र व जनपक्षधरता की बात करने वाले डॉक्टर संपूर्णानंद जैसे लोगों के सवालों को अनसुना करने में लगे है। इस हालात में अगर संपूर्णानंद के साथ कोई अनहोनी हो जाए तो सवाल बहुत खड़े किए जाएंगे । एक दूसरे को दोषी ठहराया जाने लगेगा लेकिन गुजरे वक्त की वापसी नहीं हो पाएगी।

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