ऑक्सीजन संकट के बीच 280 मरीजों को दी नई जिंदगी, कानपुर का ये युवक बना फरिश्ता

सौरभ के मुताबिक जब ऑक्सीजन की किल्लत शुरू हुई तो उन्होंने अपने सभी साथियों से मदद मांगी और खुद एक-एक एजेंसी जाकर पता लगाया....

Update: 2021-04-25 13:03 GMT

जनज्वार डेस्क। कोरोना महामारी ने जहां पर्याप्त ऑक्सीजन का संकट मरीजों के सामने खड़ा कर दिया है। लोग अपनों को बचाने के लिए इधर से उधर भटक रहे हैं कि कैसे भी करके जान बचायी जा सके। ऐसे समय में कानपुर के एक युवक ने इंसानियत की मिसाल को फिर जिंदा कर दिया है। यह युवक जरूरतमंदों के घरों तक खुद ही ऑक्सीजन के सिलेंडर पहुंचा रहा है। इससे पिछले चार दिनों में 280 मरीजों को नई जिंदगी मिल गई है। युवक सुबह हो या शाम, दिन हो या रात सिलेंडर की व्यवस्था में जुटा रहता है।


जानकारी के मुताबिक सौरभ तिवारी नाम का यह युवक कानपुर के रामादेवी का रहने वाले हैं जो पेशे से एक मेडिकल रीप्रजेंटेटिव (एमआर) हैं। उनके पिता संतोष कुमार तिवारी की आलू आढ़त है। उन्हें बचपन से ही समाज सेवा का शौक रहा, इसलिए नौकरी के साथ-साथ बीते कुछ सालों से 'अक्षर' नाम के एक एनजीओ का संचालन भी करते हैं। उनका यह एनजीओ झोपड़-पट्टियों में रहने वाले गरीब परिवारों के बच्चों को पढ़ाने में मदद करता है।


हालांकि सौरभ ने कोरोना महामारी को देखते हुए बच्चों को पढ़ाने के काम को पूरी तरह से बंद कर दिया है। वह पिछले वर्ष उन्होंने मोतियाबिंद ऑपरेशन का कैंप लगाकर भी मदद कर चुके हैं।

सौरभ के मुताबिक जब ऑक्सीजन की किल्लत शुरू हुई तो उन्होंने अपने सभी साथियों से मदद मांगी और खुद एक-एक एजेंसी जाकर पता लगाया। तभी हरप्रताप सिंह और बब्बर गैस एजेंसी में कार्यरत शादाब का साथ मिला। शादाब ने रीफलिंग में मदद की। किसी भी जरूरतमंद के साथ सिलेंडर लेकर पहुंचा तो शादाब ने तुरंत फैक्टरी की कीमत पर रीफलिंग कर उसकी जान बचाने में मदद की। शादाब भी उनके साथ सुबह से रात तक इस कार्य में लगे हैं। 

सौरभ बताते हैं कि कई ऐसे जरूरतमंद थे जिन्हें दवा व ऑक्सीमीटर की आवश्यकता थी, इसमें हरप्रताप ने उनकी मदद की। वह बताते हैं कि अब हम लोगों ने कई लैब व दुकानों से संपर्क कर लिया। किसी भी जरूरतमंद को दवा में 20 फीसदी डिस्काउंट और कोरोना के अलावा अन्य जांचों में 50 फीसदी तक छूट करा रहे हैं, जिससे आर्थिक संकट न पड़े।

सौरभ ने बताया कि एक बार किसी को सिलेंडर दिलाया और फिर उसे अचानक जरूरत पड़ी तो खुद सिलेंडर रीफिल कराकर उसके घर ले गया और वहां से खाली सिलेंडर वापस लेकर आए। दवाएं भी घर तक पहुंचाई हैं। 

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