Uttarakhand में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिलते ही इनको मिला बेरोजगारी का स्वर्णिम होली गिफ्ट

Uttarakhand : देश में कोविड प्रकोप के दौरान लचर स्वास्थ्य सेवाओं व कार्मिकों की कमी को देखते हुए 2020 में देहरादून के राजकीय दून मेडिकल कॉलेज ने सैंकड़ों लोगों को संविदा पर रखा था....

Update: 2022-03-16 08:08 GMT

Uttarakhand में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिलते ही इनको मिला बेरोजगारी का स्वर्णिम होली गिफ्ट

Uttarakhand : उत्तराखण्ड विधानसभा चुनावों की मतगणना में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को एक बार फिर मिले प्रचंड बहुमत के अगले दिन ही स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत सैंकड़ों संविदा कर्मियों को नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। हालांकि इन कर्मियों की तैनाती कोविड प्रकोप (Covid Panedemic) को देखते हुए सीमित समय के लिए की गई थी, जिसे लगातार सेवा विस्तार दिया जा रहा था। अंतिम सेवा विस्तार के अनुसार इनकी सेवाएं 31 मार्च तक के लिए थी। विधानसभा चुनाव की मतगणना में प्रदेश सरकार में काबिज भाजपा को प्रचंड बहुमत मिलने के अगले ही दिन इन संविदाकर्मियों को हटाने के आदेश जारी कर दिए गए।

बता दें कि देश में कोविड प्रकोप के दौरान लचर स्वास्थ्य सेवाओं व कार्मिकों की कमी को देखते हुए 2020 में देहरादून के राजकीय दून मेडिकल कॉलेज ने सैंकड़ों लोगों को संविदा पर रखा था। इन कर्मियों का समय-समय पर कार्यकाल बढ़ाते हुए सेवा विस्तार दिया जा रहा था। अंतिम सेवा विस्तार के अनुसार इनकी सेवाएं 31 मार्च को समाप्त हो रही थीं। बेरोजगारी के समय रोजगार (Employement) से जुड़े इन कार्मिकों को भरोसा था कि उनका सेवा विस्तार फिर से बढ़ाया जाएगा। लेकिन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने मतगणना के अगले ही दिन इनकी सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया।

प्राचार्य के अनुसार संस्थान को भविष्य में इनकी जरूरत होगी तो इनकी सेवाएं लेने पर इनके बारे में वरीयता के आधार पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। होली से कुछ ही समय पूर्व कॉलेज प्रशासन द्वारा लिए इस निर्णय से कार्मिकों में निराशा पसरी हुई है।


कॉलेज प्रशासन के इस कदम को बेरोजगार युवाओं के साथ अन्याय बताते हुए कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष रणजीत सिंह रावत ने इसे विपक्ष के लगातार कमजोर होने के कारण सरकार का मनमाफिक कदम बताया है। रावत ने कहा कि वर्तमान जनमत और जो असल जनता के मुद्दे ज़मीन पर है उनकी खाई उत्तरोत्तर बढ़ रही है। इसका क्या कारण है? यह सबको सोचना पड़ेगा। हर बार विपक्ष को दोष देकर समस्याओं का हल नहीं निकलेगा। विपक्ष को मज़बूत करके ही प्रचण्ड बहुमत को जनहित के ख़िलाफ़ कार्यों पर घेरा जा सकता है। बेरोज़गारी प्रदेश की युवा आबादी के लिए एक मुख्य समस्या है।

पिछली बार भारी बहुमत से जीती भाजपा ने पहले अतिथि शिक्षकों को फिर उसके बाद प्रदेश में 108 सेवा के कर्मचारियों के अस्थाई पदों से उन्हें हटा दिया था। इस बार क़रीब 650 अस्थाई स्वास्थ्य कर्मियों को हटाने का फ़रमान जारी कर दिया है। विपक्ष में रहते हुए अतिथि शिक्षकों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की आवाज़ हमने पिछली बार उठाई थी। हमारे दबाव के बाद इन कर्मियों की सेवा बहाल की गई थी। किन्तु इस चुनाव में भाजपा की पुनः बहुमत से वापसी पर भाजपा सरकार के लिए युवाओं को काम से बाहर निकालना आसान हो गया है।

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