बेटियन को अगर बचाने है तौ उनके हाथन में बंदूक थंमाये देव : बेटी बचाओ पर सबसे पहले फूलन ने उठायी थी आवाज

Update: 2020-01-23 03:29 GMT

पति पुत्तीलाल की प्रताड़ना से तंग आकर जब पहली बार फूलन ने उसे पीटा था तो मौके पर मौजूद लोगों से कहा था, अगर अपनी बेटियों को बचाना है तो उनके हाथों में बन्दूक पकड़ा दें, नहीं तो इस तरह के दरिंदे इसी तरह आपकी बेटियों को अपना शिकार बनाते रहेंगे...

मनीष दुबे

जनज्वार। जिस बेटी बचाओ के मुद्दे का सहारा लेकर देश की तमाम राजनीतिक पार्टियां अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकती आ रही हैं, या सेंक रही हैं, उसकी सबसे पहले फूलन देवी ने बीहड़ों के बीच अपना दर्द बयां करते हुए मांग रखी थी। फूलन देवी ने ही पहली बार कहा था, देश की बेटियों को अगर अपनी सुरक्षा करनी है तो अपने हाथों में बन्दूक उठा लें। बेटियों को बंदूक थाम लेनी चाहिए, की बात कहने वाली महिला फूलन देवी को देश में बैंडिट क्वीन के नाम का दर्जा दिया गया।

क समय बीहड़ों में आतंक और खौफ का पर्याय रहीं फूलन देवी वह महिला हैं, जिन्हें पहली दुर्दांत महिला डकैत होने का खिताब हासिल हुआ। फूलन देवी को उनके गांव में फुल्लन के नाम से पुकारा जाता था। फूलन देवी सिर्फ एक डकैत ही नहीं, बल्कि अपने पीछे जमाने भर का दर्द और जुल्मों सितम की दास्तान है, जिसने उसके लिए बीहड़ों के रास्ते खोले और बंदूक उठाने पर मजबूर किया।

फिलहाल फूलन देवी की चर्चा इसलिए भी क्योंकि कानपुर देहात के बहुचर्चित बेहमई कांड पर शनिवार 18 जनवरी को फैसला आना था, मगर मुकदमे की मूल केस डायरी गायब होने के चलते फैसला टल गया था। गौरतलब है कि बेहमई कांड में 14 फरवरी 1981 को दस्यु सुंदरी फूलन देवी के गिरोह ने बेहमई गांव में धावा बोलकर 20 लोगों की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। इसमें 6 लोग गोली लगने से घायल हुए थे। बेहमई गांव निवासी राजाराम सिंह ने फूलन देवी समेत 35-36 डकैतों के खिलाफ थाना सिकंदरा में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वर्ष 2012 में डकैत फूलन समेत भीखा, पोसा, विश्वनाथ, श्याम बाबू और राम सिंह पर आरोप तय किए गए थे। इस मामले में अब फैसला कब आयेगा, कहना मुश्किल है।

फूलन देवी का जन्म उत्तर प्रदेश के छोटे से गांव गौरहा में 10 अगस्त 1963 को एक गरीब नाविक मल्लाह बिरादरी में हुआ था। परिवार में बड़े पापा के साथ उनकी माँ और बहन मुन्नी देवी के साथ एक छोटा भाई भी था, लेकिन फूलन के साथ जो बीता उसने एक मामूली सी फुल्लन को सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं विश्व विख्यात बना दिया और बीहड़ों से निकली पहली महिला डकैत फूलन देवी से लोकसभा सांसद फूलन देवी बन गयी।

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गर फूलन देवी को ठाकुर जाति का दुश्मन मान बैठे शेर सिंह राणा ने गोली मारकर फूलन की जिंदगी का अध्याय बंद करने का काम किया। फूलन का शरीर तो इस दुनिया में नहीं रहा, लेकिन फूलन की कहानी जो भी सुनता है उसके कदम वहीं के वहीं थम जातें हैं और मन मस्तिष्क दिमाग फूलन देवी के साथ हुए अत्याचारों और डकैत बनने के कारण को जानने की फितरत में एकाग्र सा हो जाता है।

पने साथ हुए बेइंतहां अत्याचारों के बाद गांव की फुल्लन बीहड़ों में जा पहुंची और फुल्लन से फूलन देवी बन गयी। जहाँ सबसे पहले उसकी मुलाक़ात डकैत विक्रम मल्लाह से हुई। विक्रम मल्लाह मशहूर डकैत लाला राम-श्री राम गिरोह का सक्रिय सदस्य था, लेकिन लाला राम-श्री राम ठाकुर थे, जिसकी वजह से गैंग में ठाकुरों का बोलबाला था।

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बावजूद इसके विक्रम मल्लाह के सक्रिय होने के कारण मल्लाह बिरादरी के डकैत भी गैंग में अधिक संख्या में थे। इसी दौरान फूलन देवी के साथ एक गुर्जर डकैत ने जोर-जबरजस्ती की थी, जिस पर विक्रम मल्लाह ने गुर्जर को गोली मार दी थी और यहीं से शुरू हुआ विक्रम मल्लाह गैंग। बीहड़ में इस नई बनी गैंग की कमान फूलन देवी के हाथों सौंप दी गई। तब तक पुलिसिया कार्रवाई में पकड़े गए लालाराम और श्रीराम जेल भेजे जा चुके थे।

ब लाला राम और श्री राम जेल से छूटे तो अपनी पकड़ मजबूत कर रहे विक्रम मल्लाह को टारगेट बनाया गया और कुछ ही दिनों में विक्रम मल्लाह को गोली मार कर मौत के घाट उतार दिया गया। इसके बाद लालाराम श्रीराम ने फूलन देवी को उठाकर अपनी हवस का शिकार बनाया था। इतना ही नहीं दोनों ने फूलन को नीचा दिखाने के लिए खुलेआम बेइज्जत करने का काम भी किया।

हालांकि अभी यह मामला माननीय न्यायालय में विचाराधीन है, मगर फूलन पर बनी फिल्मों और परिवार वालों के आरोपों के अनुसार यह आरोप तय किए गए हैं, जिसका बदला लेने के लिए फूलन देवी ने डकैत मान सिंह और अपने गैंग के अन्य सदस्यों के साथ बेहमई काण्ड का इतिहास लिख डाला था। इसमें फूलन देवी ने मान सिंह के साथ बेहमई गांव में हमला बोल दिया था और एक लाइन में खड़ा करके 22 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था। इसी के बाद से फूलन को देवी के नाम से बुलाया जाया जाने लगा था।

फूलन देवी ने अपने साथ हुई ज्यादती और भयावह घटनाक्रम को लेकर सबसे पहले अपने पति पुत्ती लाल को इसलिए मारा था, क्योंकि पुत्तीलाल ने छोटी सी उम्र की फूलन को अपनी पत्नी बनाया था और जमकर प्रताड़ित किया था। इसके बाद से फूलन के साथ हादसों पर हादसों का दर्द गुजरता गया, जिसने फूलन को डकैत फूलन देवी बना दिया था।

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फूलन ने सबसे पहला बदला अपने पति पुत्तीलाल की पिटाई से लिया था। फूलन ने मौके पर मौजूद लोगों से कहा था कि अगर अपनी बेटियों को बचाना है तो उनके हाथों में बन्दूक पकड़ा दें, नहीं तो इस तरह के दरिंदे इसी तरह आपकी बेटियों को अपना शिकार बनाते रहेंगे।

हीं फूलन देवी ने दूसरा बेटी बचाओ का नारा उस वक्त लगाया था, जब सन 1983 में भिंड के एमजेएस मैदान में मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के समक्ष सरेंडर किया था। तब आत्मसमर्पण करते ही सामने खड़ी जनता ने फूलन देवी जिंदाबाद के जो नारे लगाए थे, उन नारों से पूरा का पूरा एमजेएस मैदान गूंज उठा था।

ब फूलन देवी ने मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सामने कहा था “साब हम गलत नाहीं है, हमने तो बदला लौ है, अपै साथ भई जात्ती को, मन्ने कछु नहीं मांग है बस हमाइ करनी से कउनो बिटियन को अपनो शिकार बनानो की हिम्मत न करिये..."

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