कोरोना के कारण नशेड़ियों का नशा छुड़ाना हुआ मुश्किल, केंद्रों में नहीं पहुंच पा रहे नशेड़ी

Update: 2020-04-16 07:38 GMT

इलाज करने में सबसे बड़ी दिक्कत दवाओंं के ना होने के अलावा काउंसिलिंग का भी है। नशा छुड़वाने की दवाओं से ज्यादा कारगर काउंसिलिंग की विधि रहती है...

जनज्वार। कोरोना ने देश में लोगों के हाल बेहाल तो किए ही है। साथ ही हिमाचल में इसने नशेडियों का नशा छुडवाने के लिए आफत खड़ी कर दी है। दिक्कत यह पेश आ रही है कि जो लोग दवाएं खा रहे हैं, उन्हें दवाएं भी नहीं मिल रही और वे केंद्र भी नहीं पहुंच पा रहे। ये दवाएं भी पर्ची पर डाक्टरों की प्रिस्क्रिप्शन के बगैर नहीं मिलती, लिहाजा केंद्र पहुंचना भी मुश्किल हो रहा है और दवाएं मिलने में भी परेशानी पेश आ रही है।

गौर हो कि अभी आईजीएमसी में भी केंद्र नहीं चल रहा। जानकारी मिली है कि विद्ड्रॉल सिस्टम के कुछेक रोगी ही आईजीएमसी पहुंच पा रहे हैं, वे कैजुअल्टी में ही देखे गए हैं। गौर हो कि प्रदेश में 45 नशा निवारण केंद्र शुरू किए जा रहे थे। इसमें कोरोना से पहले की तस्वीर पर गौर करें, तो आईजीएमसी ने जरूरी दवाइयां भी नशा निवारण केंद्रों को भेज दी थीं। प्रदेश में हर बुधवार को जिला स्तर पर ड्रग डी-एडिक्शन सेंटर में ओपीडी लगाई जा रही थी। अब यह ओपीडी पूर्ण तौर पर नहीं लग पा रही। सूचना है कि कुछेक केंद्र ही सक्रिय हैं, वहां तक पहुंचने में भी मरीजों को काफी दिक्कतें आ रही हैं।

ये आ रहें है लक्षण

ई लोगों को नींद नहीं आ रही और किसी को बिलकुल भी भूख नहीं लग रही। किसी के सिर में बेहद दर्द की शिकायत आ रही है और किसी के पेट में दर्द है। आईजीएमसी में प्रति माह सौ लोग नशा छुड़वाने आ रहे थे। जिसके मद्देनज़र अन्य जिलों में केंद्रों को खोला गया था। लेकिन अब नशेड़ियों की स्थिति काफी बिगड़ने लगी है। जिसमें फोन पर भी लोग नशा छुड़वाने से होने वाले विद्ड्रॉल सिमटम से परेशान हो रहे हैं।

दवाएं और काउंसिलिंग ना होने से बढ़ी परेशानी

लाज करने में सबसे बड़ी दिक्कत दवाओंं के ना होने के अलावा काउंसिलिंग का भी है। नशा छुड़वाने की दवाओं से ज्यादा कारगर काउंसिलिंग की विधि रहती है। नशा निवारण केंद्रों में जो भी मरीज इलाज के लिए आते है। तो उसके लिए काउंसिलिंग होना बहुत ज्यादा जरूरी रहता है। लेकिन कोरोना के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा। गौर हो कि नशा निवारण केंद्रों में कार्यरत चिकित्सकों को गुंजन संस्था के तहत भी ट्रेनिंग करवाई गई है।

सूचना है कि 20 अन्य डाक्टरों को भी ट्रेनिंग करवाई जानी तय की गई थी, जिन्हें जल्द ही नियुक्ति दी जाने वाली थी। लेकिन अब यह कार्यक्रम भी ठप हो गया है। इसमें आईजीएमसी की स्थिति देखें, तो अस्पताल में यह केंद्र काफी बेहतर तरीके से चल रहा था। अब सभी केंद्रों को दवाएं भी मुहैया करवाई जा रही थी। सबसे ज्यादा मरीज प्रदेश के कोने-कोने से नशा छुड़वाने के लिए प्रभावित आईजीएमसी आ रहे थे।

मामले पर स्पेशल सेक्रेटरी हैल्थ निपुण जिंदल का कहना है कि ऐसी परेशानियों से निपटने के लिए प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने टेलिमेडिसिन हब की सुविधा शुरू की है। व्यक्ति अपने नजदीकी अस्पताल में जाकर टेलिमेडिसिन की सुविधा से इलाज में राहत ले सकता है। प्रदेश सरकार ऐसे रोगियों को पूर्ण सुविधा दे रही है, जिन्हें परेशानी हो रही है, वह नज़दीकी अस्पताल से संपर्क कर सकता है। उनका वहां परेशानी का हल जरूर निकलेगा।

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