सालभर से शिकायत पर पुलिस नहीं कर रही थी सुनवाई, पति-पत्नी ने थाने में ही पेट्रोल छिड़ककर लगाई आग

Update: 2019-08-30 03:35 GMT

गांव के दबंगों द्वारा की जा रही मारपीट, दुर्व्यवहार और जमीन हड़पे जाने की शिकायत के लिए जब सालभर तक पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया और न ही एफआईआर दर्ज की तो मजबूरन पति-पत्नी ने थाने में ही खुद को आग के हवाले कर लिया...

जनज्वार, मथुरा। पुलिस कितनी गैर जिम्मेदार बनती जा रही है और अनहोनी की घटनाओं के लिए वह ​सीधे किस तरह जिम्मेदार होती है, इसे समझना हो तो मथुरा के सुरीर थाने में बुधवार 28 अगस्त को आत्मदाह करने वाले दंपती की घटना को देखना होगा। मथुरा स्थित सुरीरकलां गांव के दबंगों द्वारा की जा रही मारपीट, दुर्व्यवहार और जमीन हड़पे जाने की शिकायत के लिए जब सालभर तक पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया और न ही एफआईआर दर्ज की तो मजबूरन पति-पत्नी ने थाने में ही खुद को आग के हवाले कर लिया।

जोगेंद्र और उसकी पत्नी चंद्रवती को जलता देख थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों के हाथ पांव फूल गए और किसी तरह दोनों को बचाकर अस्पताल पहुंचाया। फिलहाल 90 फीसदी जली हुई हालत में दोनों की स्थिति बहुत गंभीर बनी हुई है और मथुरा से उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया है, जहां उनका उपचार चल रहा है।

रअसल, मथुरा के सुरीर थाने में दंपती द्वारा खुद को आग लगाए जाने वाले मामले को पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने मथुरा की घटना को दुखद बताते हुए माना कि इसमें पुलिसवालों की भूमिका निंदनीय है।

गौरतलब है कि मथुरा कांड में पीड़ित की तरफ से तहरीर दी गई थी, लेकिन एसएचओ ने सिर्फ जनरल डायरी में डालकर मामला रफा-दफा कर दिया और एफआईआर दर्ज नहीं की। घटना होने के बाद पीड़ित की एफआईआर दर्ज हुई, इसलिए तत्काल दोषी पाए गए लोगों को निलंबित कर दिया गया है और बाकियों की भूमिका की जांच की जा रही।

पुलिस ने बाद में इस मामले को गंभीरता से लिया है। इसके बाद पुलिस महानिदेशक निर्देश जारी करते हुए कहा कि महिला संबंधी अपराधों के मामले में थाना प्रभारी द्वारा जरूरी कदम न उठाए जाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।

थुरा में सालभर तक थाने के चक्कर लगाने के बावजूद दबंगों के खिलाफ शिकायत दर्ज न होने पर एक दंपती ने थाने में ही पेट्रोल डाल कर खुद को आग लगा ली। वो लोग काफी लंबे समय से यानी लगभग सालभर से गांव के ही दबंग द्वारा मारपीट की घटनाओं से परेशान होकर शिकायत दर्ज कराना चाहते थे। इसी मामले में पिछले लंबे वक्त से जोगिंदर थाने के चक्‍कर काट रहे थे, मगर पुलिस उनके मामले को सुनने को तैयार नहीं थी।

गौरतलब है कि सुरीरकलां निवासी जोगेंद्र मजदूरी करता है। गांव के कुछ युवक उसके और उसकी पत्नी के साथ मारपीट कर रहे थे और उसकी जमीन पर कब्जे का प्रयास कर रहे थे। जोगेंद्र ने कई बार कोतवाली सुरीर में इस बारे में शिकायत की, लेकिन पुलिस आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही थी जिसके कारण आरोपियों को हौसले बुलंद थे।

जोगेंद्र का आरोप है कि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय थाने से उसे ही हड़का कर भगा दिया जाता था। बुधवार 28 अगस्त को जोगेंद्र और उसकी पत्नी चन्द्रवती घर से ही मिट्टी का तेल छिड़ककर कोतवाली पहुंचे। कोतवाली परिसर में पर दंपती ने खुद को आग लगा ली। दंपति द्वारा आग लगाते देख कोतवाली में हड़कंप मच गया। पुलिसकर्मी उनकी आग बुझाने को दौड़े, लेकिन तब तक दोनों गंभीर रूप से झुलस चुके थे।

ग की लपटों से घिरा जोगेंद्र रोते हुए बोल रहा था कि उसकी किसी ने नहीं सुनी। थाने में कई बार आया दरोगा और बड़े साहब उसे ही डांटकर भगा देते थे। 90 फीसदी जली हालत में उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया है। उनकी हालत काफी गंभीर बताई जा रही है।

डीजीपी ने बताया कि उनकी तरफ से सभी जिलों में निर्देश भेज दिए गए हैं कि अगर किसी महिला की शिकायत पर थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों द्वारा केस दर्ज नहीं किया गया तो उनके खिलाफ धारा 166ए के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी।

ब जब इतनी बड़ी घटना सामने आयी है तो उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने निर्देश दिया है कि महिला मामलों में एफआईआर दर्ज न करने पर कड़ी कार्रवाई होगी। इस निर्देश के बाद महिला अपराध की घटनाओं पर एफआईआर दर्ज न करने वाले थानाध्यक्ष दंडनीय अपराध के दोषी माने जाएंगे। थानों के बाहर नोटिस बोर्ड पर उच्च अधिकारियों के नंबर भी लिखे होंगे, ताकि शिकायत दर्ज कराई जा सके।

हिला अपराधों पर रोकथाम व महिलाओं की पुलिस थानों में मदद के लिए पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने सभी थानों में नोटिस बोर्ड लगाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि महिला मामलों में एफआईआर दर्ज न करने वाले थानाध्यक्षों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

ईजी कानून-व्यवस्था प्रवीण कुमार ने बताया कि थानों के बाहर इस आशय का नोटिस बोर्ड लगवाया जा रहा है कि महिला अपराध की घटनाओं पर एफआईआर दर्ज न करने वाले थानाध्यक्ष दंडनीय अपराध के दोषी माने जाएंगे। इस बोर्ड पर पुलिस के उच्चाधिकारियों के मोबाइल नंबर भी अंकित किए जाएंगे, ताकि पीड़ित उनसे अपनी शिकायत दर्ज करा सकें।

Tags:    

Similar News