शिक्षा क्षेत्र में गुरुकुल व्यवस्था फिर से हो स्थापित, वैदिक हवन और मंत्रों से हो स्कूलों की शुरुआत : योगी आदित्यनाथ

Update: 2018-10-30 12:11 GMT

गृहमंत्री राजनाथ सिंह बोले, आर्य समाज के इस सम्मेलन में अनुशासन और शांति है, यह केवल संस्था नहीं बल्कि क्रांतिकारी विचार है जो सोए हुए आदमी को भी जगा दे। हम तो आर्य हैं और पूरे विश्व को आर्य बनाना चाहते हैं...

जनज्वार। राजधानी दिल्ली के रोहिणी के जापानी पार्क में 4 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन 24-28 अक्टूबर के बीच आयोजित किया गया, जिसमें जाने—माने राजनेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रतिष्ठित हस्तियों ने हिस्सेदारी की। समापन कार्यक्रम में सिक्किम के राज्यपाल गंगा प्रसाद चौरसिया, बीजेपी दिल्ली विधानसभा के प्रतिपक्ष नेता विजेन्द्र गुप्ता, प्रथम अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा, सीकर के सांसद स्वामी सुमेधानंद जी, स्वामी देवव्रत समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इस चार दिवसीय सम्मेलन में 28 देशों के तीन हजार से ज्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

27 अक्टूबर को इस कार्यक्रम में शिरकत करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आर्य समाज की संपत्ति पर कोई कब्जा किया हुआ है तो हमें बताइए, उसे जल्दी ठीक करवा दूंगा। हम लोगों ने भूमाफिया द्वारा कब्जा किए गए हजारों हेक्टेयर भूमि को उन लोगों से छुड़ाया है। इसके लिए हमने एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स बनायी है। इसे भूमाफिया से छुड़ाने के लिए सरकारी धन का दुरूपयोग नहीं हो रहा, बल्कि भूमाफिया से ही ये पैसे भी वसूलते हैं।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सबों के लिए राष्ट्रीय धर्म सबसे बड़ा धर्म होना चाहिए। नक्सलवाद, आतंकवाद, भ्रष्टाचार एवं देश के विरूद्ध काम करने वालों के खिलाफ आवाज उठाएं, मूकदर्शक बनकर न रहें। प्रदेश की पिछली सरकारों पर हमला बोलते हुए योगी ने कहा कि राज्य में पहले जितने भी धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्य होते थे उन्होंने सबको प्रतिबंधित कर दिया था, लेकिन हमारी सरकार में आदेश दिया गया कि सभी आयोजन पूरी भव्यता और शालीनता से करवाया जाए, क्योंकि यह समाज को जोड़ने और चेतना को विकसित करने का काम करते हैं। शिक्षा क्षेत्र में गुरुकुल व्यवस्था फिर से स्थापित हो, जिसमें वैदिक हवन और मंत्रों से स्कूलों की शुरुआत हो।

योगी ने कहा जनवरी 2019 में यूपी के प्रयागराज में भव्य कुंभ का आयोजन होने जा रहा है। यह कुंभ मकर संक्रांति से लेकर शिवरात्रि तक चलेगा। इस कुंभ में 152 देशों को आमंत्रित किया गया है और आप सभी को भी इस कुंभ के लिए आमंत्रित कर रहे हैं।

वहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने महर्षि दयानंद सरस्वती के महिला शिक्षा पर रोशनी डालते हुए कहा कि समाज में महिला शिक्षा के महत्व को महर्षि दयानंद सरस्वती ने बखूबी समझा। यही कारण है कि दयानंद ने महिला शिक्षा को प्रारंभ किया। आज भी महिलाओं को शिक्षा के साथ-साथ उन्हें शिक्षा और अधिकार दिलाने की आवश्यकता है। गर्भ में ही भ्रूण को खत्म किया जाता रहा था, इसलिए प्रधानमंत्री मोदी ने बेटी बचाओ-बेटी पढाओ नारे के साथ 22 जनवरी, 2015 को इस आंदोलन का आगाज किया। इस नारे के असर के बारे में पूरे देश के बारे में तो नहीं पता, लेकिन हरियाणा की जनता ने इस चुनौती को स्वीकार किया। यहां यह दर 850 से भी नीचे थी जो अब बढ़कर 931 तक जा पहुंचा है।

केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने कहा कि दयानंद सरस्वती एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने कहा था कि वेदों के बिना देश का उद्धार नहीं हो सकता। उन्होंने ही देश की आजादी के लिए साम्राज्यवाद का नारा दिया।

वहीं गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सम्मेलन के अंतिम दिन कहा कि भारतीय संस्कृति एवं एकजुटता ही भारत की ताकत है। भारत केवल अपने लिए ताकतवर नहीं बनना चाहता बल्कि विश्व के पूरे मानव समाज के कल्याण के लिए ताकतवर बनना चाहता है। आर्य समाज के इस सम्मेलन में अनुशासन और शान्ति है, यह केवल संस्था नहीं बल्कि क्रांतिकारी विचार है जो सोए हुए आदमी को भी जगा दें। हम तो आर्य हैं और पूरे विश्व को आर्य बनाना चाहते हैं। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने लोगों को आश्वासन दिलाते हुए कहा कि मैं मोदी जी से बात करूंगा और मुझे विश्वास है कि वो इस चीज में अपनी सहमति देंगे कि 2024 में जो अंतरराष्ट्रीय आर्य सम्मेलन होगा, उसमें दयानंद सरस्वती जी की जन्म शताब्दी पूरे विश्व में मनाई जाए।

वहीं सिक्किम के राज्यपाल गंगा प्रसाद चौरसिया ने कहा कि दुनिया में शांति चाहिए तो हमें पुनः वेदों से लौटना होगा। उन्होंने इस महासम्मलेन में शामिल पाकिस्तान के आर्य प्रतिनिधिमंडल के लिए गृहमंत्री द्वारा वीजा दिलाने में मदद करने के लिए ख़ुशी जताई।

जबकि केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने कहा कि दयानंद जैसा व्यक्तित्व पूरे विश्व में नहीं हो सकता। यदि हम लोगों को गृहमंत्री राजनाथ सिंह का साथ मिलता रहा तो हम पूरे विश्व में आर्य संस्कृति का डंका बंजा सकते हैं।

वहीं भारत के प्रथम अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा ने कहा कि हमारा परिवार दादाजी के मूल सिद्धांतों पर चलता आया है और यही वजह है कि देश की सेवा के लिए कुछ काम आया।

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