रोहित वेमुला की 10वीं बरसी पर राहुल गांधी ने किया उन्हें याद, बोले 'रोहित वेमुला एक्ट जल्द हो लागू, उनके सवाल आज भी धड़क रहे हमारे सीने में'
हम एक ऐसा भारत चाहते हैं जो न्यायपूर्ण, मानवीय और समान हो - जहाँ रोहित वेमुला की तरह किसी दलित छात्र को अपने सपनों की कीमत अपनी जान से न चुकानी पड़े। रोहित, तुम्हारी लड़ाई हमारी ज़िम्मेदारी है...
Rohit Vemula death Anniversary : राहुल गांधी ने रोहित वेमुला की दसवीं बरसी पर उन्हें याद करते हुए कहा कि देश में रोहित वेमुला एक्ट जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि 10 साल पहले 17 जनवरी 2016 को रोहित वेमुला की मौत हुई थी।
रोहित वेमुला को याद करते हुए राहुल गांधी कहते हैं, 'आज रोहित वेमुला को गए 10 साल हो गए। लेकिन रोहित का सवाल आज भी हमारे सीने में धड़क रहा है: क्या इस देश में सपने देखने का हक़ सबको बराबर है? रोहित पढ़ना चाहता था, लिखना चाहता था। विज्ञान, समाज और इंसानियत को समझकर इस मुल्क को बेहतर बनाना चाहता था। लेकिन इस व्यवस्था को एक दलित का आगे बढ़ना मंज़ूर नहीं था।'
राहुल आगे कहते हैं, 'संस्थागत जातिवाद, सामाजिक बहिष्कार, रोज़-रोज़ की बेइज़्ज़ती, “औक़ात” दिखाने वाली भाषा और अमानवीय व्यवहार - यही वह ज़हर था जिसने एक होनहार युवा को उस मुक़ाम तक धकेल दिया जहाँ उसकी गरिमा छीन ली गई और उसे अकेला कर दिया गया। और आज? दलित युवाओं की हक़ीक़त क्या बदली है? कैंपस में वही तिरस्कार, हॉस्टल में वही अलगाव, क्लास में वही कमतर समझना, फिर वही हिंसा - और कभी-कभी वही मौत, क्योंकि जाति आज भी इस देश का सबसे बड़ा एडमिशन फ़ॉर्म है।
इसीलिए रोहित वेमुला एक्ट कोई नारा नहीं, एक ज़रूरत है। ताकि शैक्षणिक संस्थानों में जातिगत भेदभाव अपराध बने, दोषियों पर सख़्त कार्रवाई हो, और किसी भी छात्र को उसकी जाति के नाम पर तोड़ने, चुप कराने और बाहर करने की छूट खत्म हो। यह लड़ाई सिर्फ संसद की नहीं है। यह लड़ाई कैंपस की है, युवाओं की है, हमारी है।
राहुल गांधी आह्वान करते हैं, दलित युवाओं - आवाज़ उठाओ, संगठन बनाओ, एक-दूसरे के साथ खड़े रहो। मांग करो: रोहित वेमुला एक्ट अभी लागू करो। एंटी-डिस्क्रिमिनेशन क़ानून अभी चाहिए। कर्नाटक और तेलंगाना में कांग्रेस की सरकारें इस कानून को जल्द से जल्द लागू करने की प्रक्रिया में हैं। हम एक ऐसा भारत चाहते हैं जो न्यायपूर्ण, मानवीय और समान हो - जहाँ किसी दलित छात्र को अपने सपनों की कीमत अपनी जान से न चुकानी पड़े। रोहित, तुम्हारी लड़ाई हमारी ज़िम्मेदारी है।