'राष्ट्रवाद के नाम पर अपने ही देशवासियों की लिंचिंग करने वाले...' नेहा सिंह राठौर ने किया UGC के नये कानून का समर्थन
SC-ST एक्ट ऐसी ही कड़वी दवाई थी जिसका भरपूर विरोध किया गया था. आरक्षण भी ऐसी ही एक कड़वी दवा है, जिसका खूब विरोध होता है…लेकिन मेरा यकीन कीजिए, इन कड़वी दवाइयों ने समाज की सेहत में सुधार ही किया है। कहीं कुछ लोग इस वजह से तो नाराज नहीं हैं कि वो अब दूसरों को अपमानित नहीं कर पायेंगे? कहीं उन्हें ये तो नहीं लग रहा कि उनका ये अवैध विशेषाधिकार छिनने वाला है...
Neha Singh Rathore Support UGC Law : भोजपुरी लोकगायिका नेहा सिंह राठौर ने यूजीसी के नए कानून का समर्थन किया है। सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर नेहा ने एक पोस्ट लिखकर कहा है आखिर सम्मान बचाने वाले कानून से किसे दिक्कत है।
नेहा लिखती हैं, 'चोरी के ख़िलाफ़ क़ानून बनने से किसे दिक्कत होगी? जो चोर होगा! अत्याचार के ख़िलाफ़ नियम बनने से कौन तिलमिलायेगा? जो अत्याचारी होगा! भेदभाव रोकने वाले क़ानूनों का विरोध कौन करेगा? जो भेदभाव करता होगा! अगर कोई कानून किसी वर्ग या समूह के सम्मान को बचाने के लिए बनाया गया है तो इसमें दिक्कत क्या है? जातिगत भेदभाव और पक्षपात हमारे समाज की पुरानी बीमारी है, और पुरानी बीमारियों का इलाज कड़वी दवाइयों से ही होता है।'
नेहा आगे कहती हैं, SC-ST एक्ट ऐसी ही कड़वी दवाई थी जिसका भरपूर विरोध किया गया था. आरक्षण भी ऐसी ही एक कड़वी दवा है, जिसका खूब विरोध होता है…लेकिन मेरा यकीन कीजिए, इन कड़वी दवाइयों ने समाज की सेहत में सुधार ही किया है। कहीं कुछ लोग इस वजह से तो नाराज नहीं हैं कि वो अब दूसरों को अपमानित नहीं कर पायेंगे? कहीं उन्हें ये तो नहीं लग रहा कि उनका ये अवैध विशेषाधिकार छिनने वाला है?
देश का संविधान समानता के बुनियादी सिद्धांत पर टिका है, लेकिन क्या देश का हर नागरिक बराबर सम्मान पाता है? दरअसल नहीं! बीते तमाम सालों में ले-देकर एक काम तो ढंग का हुआ है, और कुछ लोग इसका भी विरोध करने लग गए! और विरोध कर भी कौन रहा है! वही लोग जो अखंड भारत के नाम पर स्वास्थ्य, शिक्षा, रोज़गार जैसी बुनियादी चीजों से समझौता करने को तैयार थे...
नेहा यूजीसी का विरोध करने वालों को आड़े हाथों लेते हुए कहती हैं, वही लोग जो राष्ट्रवाद के नाम पर अपने ही देश के नागरिकों की लिंचिंग तक को सही बताते थे और सरकार से चार कायदे के सवाल पूछने वालों को देशद्रोही कहते थे…आज वही लोग एक ढंग का क़ानून आने पर बिलबिला रहे हैं...क्यों भाई! अब मज़ा नहीं आ रहा क्या?
देश का हर नागरिक जब तक गौरवान्वित, सम्मानित और कॉंफिडेंट महसूस नहीं करेगा, तब तक ये देश मजबूत नहीं होगा…देशवासियों के आत्मसम्मान को बढ़ाने वाला ये क़ानून देशहित में है, और इस क़ानून के ख़िलाफ़ बोलने वाले लोग देशहित के ख़िलाफ़ बोल रहे हैं. उन्हें ये काम नहीं करना चाहिए.
नेहा कहती हैं, जातिगत स्वार्थों के लिए देशहित से समझौता मत कीजिए भाई! देश को मजबूत बनाने वाले क़ानून का समर्थन कीजिए. सबसे पहले देश है…जाति-बिरादरी बहुत बाद में आती है। ये कोई मामूली क़ानून नहीं है। 18-18 घंटे मेहनत करने के बाद ये क़ानून बनाया गया है। आपको इसका सम्मान करना चाहिए।