Brain Stroke Symptoms and Cause: सुबह नहाने से लेकर लाइफ स्टाइल में इन गलतियों से बढ़ता है स्ट्रोक का खतरा, बचना है तो ये जान लें

Brain Stroke Symptoms and Cause: हर साल 29 अक्टूबर को वर्ल्ड स्ट्रोक डे मनाया जाता है। अधिकतर लोग स्ट्रोक को दिल की बीमारी समझते हैं, लेकिन असल में यह बीमारी दिमाग से जुड़ी होती है।

Update: 2022-10-29 04:05 GMT

Brain Stroke Symptoms and Cause: सुबह नहाने से लेकर लाइफ स्टाइल में इन गलतियों से बढ़ता है स्ट्रोक का खतरा, बचना है तो ये जान लें

मोना सिंह की रिपोर्ट

Brain Stroke Symptoms and Cause: हर साल 29 अक्टूबर को वर्ल्ड स्ट्रोक डे मनाया जाता है। अधिकतर लोग स्ट्रोक को दिल की बीमारी समझते हैं, लेकिन असल में यह बीमारी दिमाग से जुड़ी होती है। कैंसर की तरह ही स्ट्रोक भी हर साल दुनिया भर में होने वाली कई मौतों के लिए जिम्मेदार होता है। आम लोगों को ब्रेन स्ट्रोक के बारे में बहुत कम जानकारी है। इसलिए विश्व स्ट्रोक दिवस पर हम स्ट्रोक से जुड़े असली तथ्यों के बारे में बता रहे हैं जिसे हर किसी को जानना जरूरी है.

क्या होता है ब्रेन स्ट्रोक?

ब्रेन स्ट्रोक को सामान्य भाषा में ब्रेन अटैक भी कहते हैं। इसमें शरीर से दिमाग को जाने वाली नसों में खून का बहाव ब्लॉक हो जाता है या फिर दिमाग की नसें फट जाती हैं। स्ट्रोक के लक्षण पता चलने के तुरंत बाद यदि डॉक्टरी सहायता ना मिले तो जान जाने का भी खतरा रहता है। स्ट्रोक या दिमागी आघात मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं

इस्केमिक स्ट्रोक ( Ischemic strok )

इस्केमिक स्ट्रोक में दिमाग तक जाने वाले रक्त नलिकाओं या नसों का बहाव रुक जाता है, जिससे दिमाग की कार्य क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। जैसे कि हाथ से दिमाग को जाने वाली नसों का ब्लड फ्लो रुकने पर हाथ काम करना बंद कर देता है। और पैर से दिमाग को जाने वाली नसों का ब्लड फ्लो रुक जाता है तो पैर काम करना बंद कर देता है। हम अपने सामान्य जीवन में भी देखते हैं कि किसी व्यक्ति के आधे या पूरे शरीर को लकवा (पैरालिसिस) हो जाता है तो उस व्यक्ति का आधा या पूरा शरीर काम करना बंद कर देता है। यह इस्केमिक स्ट्रोक की वजह से ही होता है।

हेमोरेजिक स्ट्रोक (hemorrhagic stroke)

इसे ब्रेन हेमरेज भी कहा जाता है। ये ब्रेन स्ट्रोक का दूसरा प्रकार है। इसमें दिमाग के अंदर की कोई रक्त वाहिका या नस फट जाती है। और ब्लीडिंग होने लगती है। हाल ही में सीरियल "भाभी जी घर पर हैं" के अभिनेता दीपेश भान की मृत्यु 39 वर्ष की उम्र में ही ब्रेन हेमरेज की वजह से हुई थी।

ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण (brain stroke symptoms)

ब्रेन स्ट्रोक के लक्षणों को जांचने का सबसे साधारण तरीका है कि FAST नामक शॉर्ट फॉर्म को याद रखें। यहां F का मतलब face drooping है। यानी अगर किसी व्यक्ति को मुस्कुराने के लिए कहें और उसके चेहरे का एक हिस्सा निष्क्रिय गिरा हुआ रहता हो तो यह ब्रेन स्ट्रोक का लक्षण है।

A का मतलब Arm Weakness है। यदि व्यक्ति अपना दोनों हाथ उठाने की कोशिश करें और फिर भी उसका एक हाथ गिरा रहे तो यह ब्रेन स्ट्रोक का लक्षण होता है। S का मतलब speech difficulty है। अगर व्यक्ति समान्य संवाद भी साफ शब्दों में ना बोल पाए तो यह भी ब्रेन स्ट्रोक का ही लक्षण होता है।

T का मतलब Time to Call है। इन लक्षणों के दिखने पर तुरंत हॉस्पिटल ले जाएं। स्ट्रोक का इलाज एंबुलेंस के अंदर ही शुरू किया जा सकता है।

तथ्य : ब्रेन स्ट्रोक आने पर 17लाख ब्रेन सेल्स 1 मिनट में हो जाते हैं नष्ट

स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर तुरंत हॉस्पिटल ले जाएं, क्योंकि ब्रेन शरीर का बहुत ही नाजुक हिस्सा होता है। और ब्रेन स्ट्रोक आने पर 1 मिनट में ही करीब 17 लाख ब्रेन सेल्स टूट जाते हैं। इसलिए एक एक पल महत्वपूर्ण है। जितनी देरी की जाएगी नुकसान उतना ज्यादा होगा। अगर लक्षण दिखने के 4 घंटे के अंदर (इस वक्त को गोल्डन पीरियड भी कहते हैं) मरीज हॉस्पिटल आ जाता है, तो उसे एक इंजेक्शन दिया जाता है जिसे क्लॉट बस्टर कहते हैं। इस इंजेक्शन की वजह से ब्रेन स्ट्रोक से मस्तिष्क में हो रहे नुकसान को रोका जा सकता है। देरी करने पर पैर के रास्ते सर्जरी का कर क्लॉट हटाना पड़ता है। लक्षण आने पर ' कल चले जाएंगे, सुबह चले जाएंगे' जैसी देरी मरीज को हमेशा के लिए बेड पर ला सकती है। मौत भी हो सकती है। MRI की मदद से भी पता किया जाता है कि क्लॉट कितना पुराना है। अगर यह 4 घंटे पुराना है तो क्लॉट बूस्टर इंजेक्शन की मदद से इसे हटाया जा सकता है। और अगर ज्यादा पुराना है तो सर्जरी की जरूरत पड़ती है।

खराब जीवनशैली और मानसिक तनाव जिम्मेदार है ब्रेन स्ट्रोक के लिए

एम्स में हुए रिसर्च से पता चला है कि मानसिक तनाव, गुस्सा, अल्कोहल का अत्यधिक सेवन और प्रदूषण ब्रेन स्ट्रोक की बड़ी वजह बन रहा है। देश में प्रतिवर्ष 16 लाख लोग ब्रेन स्ट्रोक के शिकार होते हैं। जिनमें से एक तिहाई की मौत हो जाती है। लगभग 17% लोग मानसिक तनाव की वजह से ब्रेन स्ट्रोक के शिकार होते हैं। और 4% लोग गुस्से की वजह से ब्रेन स्ट्रोक के शिकार होते हैं। अल्कोहल और धूम्रपान के अत्यधिक सेवन से 20% मरीजों को ब्रेन स्ट्रोक होता है। ऐसे भी मरीजों की मौत हुई है जिनकी उम्र 40 वर्ष से कम थी।

नमक और चीनी के अत्यधिक सेवन से स्ट्रोक का खतरा

जो लोग नमक, चीनी और वसा युक्त भोजन का अधिक सेवन करते हैं उनमें डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, मोटापे और हार्ट डिजीज के खतरे के साथ ही स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है। यह बीमारी किसी को भी किसी भी उम्र में हो सकती है। लेकिन यह बीमारी पुरुषों में ज्यादा पाई जाती है।

नहाते समय सीधे सिर पर पानी डालने से स्ट्रोक का खतरा

शरीर में खून का प्रवाह ऊपर से नीचे की तरफ होता है। ऐसे में नहाते समय ठंडा पानी पहले सिर पर डालने से ब्रेन की नसें सिकुड़ने लगती है। और खून के थक्के भी जम जाते हैं। सिर ठंडा हो जाता है। इस स्थिति में दिल को तेजी से ऊपर सिर की तरफ खून भेजना पड़ता है। जिससे हार्टअटैक भी हो सकता है और ब्रेन हेमरेज भी। इसलिए नहाते समय पहले पैरों और शरीर के अन्य अंगों पर पानी डालें और आखिर में सिर पर डालें। ऐसा करने से ब्रेन स्ट्रोक के खतरे से काफी हद तक सेफ रहा जा सकता है।

स्ट्रोक से ब्रेन स्ट्रोक से जुड़े तथ्य और मिथ

हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, ब्रेन स्ट्रोक किसी को भी किसी भी उम्र में हो सकता है। लोगों में गलतफहमी है कि यह सिर्फ बुजुर्ग या ज्यादा उम्र के लोगों को ही होता है। एक्सपर्ट के मुताबिक, खराब जीवनशैली और मोटापे के कारण 18 से 65 साल के किसी भी व्यक्ति को ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है।

आम लोगों में यह धारणा बनी हुई है कि यह बीमारी बहुत कम होती है लेकिन सच यह है कि स्ट्रोक की बीमारी भी काफी लोगों को होती है। और कई देशों में तो यह बीमारी काफी आम है। स्ट्रोक का मुख्य कारण ब्लड प्रेशर डायबिटीज और मोटापा होता है। इसलिए अच्छी और हेल्दी लाइफस्टाइल की मदद से इस बीमारी से बचाव किया जा सकता है।

कई बार स्ट्रोक के कारण ब्लड क्लॉट बन जाता है और सामान्य धारणा है कि यह क्लॉट पूरी तरह से ठीक नहीं होता। लेकिन यह मिथ है। क्योंकि अगर मरीज में स्ट्रोक के लक्षण दिखना शुरू हो जाए तो सिर्फ 4 घंटे के अंदर ही हॉस्पिटल ले जाने पर डॉक्टर दिमागी नुकसान को बिल्कुल रिवर्स या उल्टा कर सकते हैं। स्ट्रोक के बारे में एक मिथ यह भी है कि यह आनुवांशिक नहीं होता। जबकि स्ट्रोक का खतरा पीढ़ी दर पीढ़ी चल सकता है। हाइपरटेंशन और मोटापे की तरह ही स्ट्रोक भी आनुवांशिक है। अगर किसी व्यक्ति को बहुत कम उम्र में स्ट्रोक आता है तो इसका मतलब यह है कि इसके पीछे क्लोटिंग डिसऑर्डर या कार्डियक ट्यूमर जिम्मेदार हो सकता है जो कि उन्हें पिछली पीढ़ी से विरासत में मिला है।

ब्रेन स्ट्रोक से बचने के उपाय

ब्रेन स्ट्रोक के खतरे से बचने के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। दिन भर में 3 लीटर या 10 गिलास पानी और अन्य तरह के तरल पदार्थों का सेवन करें। खाने में नमक चीनी और वसा का कम से कम मात्रा या संतुलित तरीके से सेवन करें। विटामिन E, C और विटामिन-A को भरपूर मात्रा में लें। अदरक का सेवन करें। अदरक रक्त को पतला करता है। हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें। ब्लड स्ट्रोक की मुख्य वजह ब्लड प्रेशर है इसलिए नियमित रूप से कुछ कुछ समय अंतराल पर ब्लड प्रेशर की जांच कराते रहें। शराब और धूम्रपान ना करें। और सप्ताह में कम से कम पांच दिन योग और व्यायाम करना ना भूलें।

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