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'कोरोना वायरस नहीं, पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारियों की लापरवाही ने मेरी मां को मार डाला'

Nirmal kant
16 April 2020 8:50 AM GMT
कोरोना वायरस नहीं, पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारियों की लापरवाही ने मेरी मां को मार डाला
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मुंबई में अपने परिवार से अलग क्वारंटीन वार्ड में रह रही 55 वर्षीय अफसारी बानो को ब्लड प्रेशर की दवा नहीं दिए जाने से मौत हो गई...

जनज्वार। 11 अप्रैल की सुबह जब स्वास्थ्य अधिकारियों के एक दल ने सोहराब फारूकी और उनके परिवार को क्वारंटीन किया, तो कुल नौ सदस्य थे। चार दिन बाद जब वे बुधवार शाम को घर लौटे तो आठ थे।

25 वर्षीय सोहराब मुंबई में होटल मैनेजमेंट के स्टुडेंट हैं जो धारावी में रहते हैं। धारावी एशिया का सबसे बड़ी मलिन बस्ती है जहां झुग्गी झोपड़ियां एक एक दूसरे से चिपकी हुई हैं जिससे आसपास वायरस के फैलने के लिए एक उपजाऊ जमीन बन जाती है।

धारावी में कोरोनावायरस के अबतक साठ पॉजिटिव मामले आए हैं और आठ मौतें हुईं हैं। उनमें से एक पॉजिटिव के घर के विपरीत में फारुकी रहता है। जो कुछ दिन पहले अस्पताल में भर्ती हुआ था।

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10 अप्रैल की रात को स्वास्थ्य अधिकारियों के एक दल ने फारूकी के पड़ोसी के घर का दौरा किया। फारुकी ने अल जजीरा को बताया, इससे पहले कि वे चले जाते, उन्होंने हमें एक टेस्ट के लिए कहा कि कहीं हम संक्रमित तो नहीं हैं।

गले दिन सुबह-सुबह फारुकी, उनके माता पिता, उनके बड़े भाई-भाभी, उनके दो बच्चों और दो भतीजों को उनके घर से लगभग एक किलोमीटर दूर (0.6 मील) की एक स्पोर्ट्स कॉम्पलैक्स में ले जाया गया।

बताया, क्वारंटीन वार्ड मूल रुप से एक बड़ा हॉल था जिसमें कुल 31 लोगों को बंद किया गया था। फारुकी ने बताया कि वहां केवल दो शौचालय थे-एक पुरुषों के लिए और दूसरा महिलाओं के लिए। दोनों अस्वच्छ थे।

फारुकी ने एक अधिकारी से पूछा कि उन्हें कितने समय तक यहां रहना होगा। उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

फारुकी कहते हैं, हमें बताया गया कि जब मेडिकल टीम उपलब्ध होगी हमारे टेस्ट किए जाएंगे। मुझे अपने माता पिता की चिंता हो रही थी।

फारुकी की मां अफसारी बानो (55 वर्षीय) मधुमेह, थायराइड और ब्लड प्रेशर की पीड़ित थीं। उन्होंने बताया कि उनके पिता अंसार अहमद भी अपनी उम्र (64 वर्षीय) की वजह से संक्रमण की चपेट में थे।

ह आगे कहते हैं, क्योंकि हम नहीं जानते थे कि हम कब तक क्वारंटीन वार्ड में रहेंगे, इसलिए मैने अपनी मां के लिए पर्याप्त दवाएं नहीं लीं थीं।

'लेकिन मेरे पास उनकी एक फाइल थी। 11 अप्रैल की सुबह उन्होंने हमें नाश्ता उपलब्ध कराया, उसके बाद मैने उन्हें उस दवा का नाम बताया जिसकी मुझे जरुरत थी।'

फारुकी ने अल जजीरा को बताया लेकिन उसे दवा नहीं मिली। उन्होंने कहा कि यह दवा स्टोर में उपलब्ध नहीं थी।

'अगले दिन रविवार था। हमें बताया गया कि स्टोर बंद हैं। सोमवार (13 अप्रैल) को एक डॉक्टर हमारे पास आया जिसने मुझे आश्वासन दिया कि हमें अगले दिन दवा मिल जाएगी।'

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स बीच अफसारी (सोहराब फारुकी की मां) का ब्लड प्रेशर बढ़ गया था। वह अस्वस्थ महसूस कर रही थीं और उन्हें चलना भी मुश्किल हो रहा था।

फारुकी कहते हैं, मैने उनसे व्हीलचेयर के लिए अनुरोध किया। उन्होंने मुझे एक व्हीलचेयर दो मिनट के लिए और मुझे कैमरे के सामने बोलने के लिए कहा कि मुझे व्हीलचेयर मिली है लेकिन दवाएं अभी तक नहीं मिल पायीं हैं।

'मुझे बताया गया कि वीडियो को उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा। उन्होंने वीडियो शूट करने के बाद व्हीलचेयर को हमसे व्हीलचेयर को वापस ले लिया और कहा कि मुझे आधे घंटे में एक नया व्हीलचेयर मिलेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।'

स बीच अफसारी को वॉशरूम जाना पड़ा। वह धीरे-धीरे वहाँ से चली तो गईं लेकिन बाहर निकलते ही वह गिर गईं।

फारुकी बताते हैं, उसे पसीना आने लगा और उनकी (अफसारी) नाक से एक सफेद तरल पदार्थ निकलने लगा। मैं एक एंबुलेंस के लिए चिल्लाया लेकिन वार्ड के डॉक्टरों ने इसकी व्यवस्था नहीं की। आखिरकार हमें उसे कैब से अस्पताल ले जाना पड़ा।

स्पताल क्वारंटीन सेंटर से लगभग तीन किलोमीटर दूर था और देशव्यापी लॉकडाउन होने के कारण सड़कें सुनसान होने के कारण बस पांच मिनट की ड्राइव पर दूर था। लेकिन उन्हें देर हो चुकी थीं।

को मृत कर दिया गया। सोहराब फारुकी ने इसके बाद ट्वीटर पर एक पोस्ट में लिखा, कोविड-19 के कारण नहीं बल्कि पुलिस और चिकित्सा अधिकारियों की लापरवाही के कारण मैने अपनी मां को खो दिया है।

लाके के स्वास्थ्य अधिकारी वीरेंद्र मोहिते ने अल जजीरा को बताया कि वे इस मामले को देख रहे हैं। वह कहते हैं, यह एक गंभीर मुद्दा है और हम लकुना का पता लगा रहे हैं।

स्पताल से अफसारी का शव मिलने के बाद फारूकी ने अपने परिवार और दोस्तों के साथ उसे एक स्थानीय कब्रिस्तान में दफनाया।

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न्होंने कहा, हमने अंतिम संस्कार की अनुमति मांगी ती। जब हमने अंतिम संस्कार किया तब पुलिस ने हमें अपनी कार के अंदर नहीं आने दिया।

मारे एक रिश्तेदार के पास एक मोटरसाइकिल थी। वह हमें एक-एक करके क्वारंटीन वार्ड में ले गया। हमारे साथ ऐसा व्यवहार किया गया जैसे हम कोरोनावायरस के मरीज थे जबकि अभी तक हमारे जांच का परिणाम सामने नहीं आया था।

फारुकी जब अपनी मां के मौत के मामले को सोशल मीडिया पर ले गए तब उनके परिवार का कोरोना वायरस टेस्ट किया गया। परिवार बुधवार की शाम अपने घर लौट आया। अब उन्हें टेस्ट के परिणाम का इंतजार है।

(रिपोर्ट मूलत: अलजजीरा में प्रकाशित।)

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