अंधविश्वास : इलाज के नाम पर परिजनों ने 13 दिन की बच्ची को गर्म सलाखों से दर्जनों जगह दागा, हालत गंभीर

टोने-टोटके में पड़कर बच्ची को इलाज के नाम पर जगह-जगह गर्म सलाखों से दागा गया, जिससे मासूस की हालत और ज्यादा बिगड़ गयी....

Update: 2020-09-02 05:42 GMT

बच्‍चों को बुखार हो या निमोनिया भीलवाड़ा में इन सबका इलाज गर्म सलाखों से दागना यानी डांव लगाना माना जाता है (प्रतीकात्मक तस्वीर)

भीलवाड़ा। कोरोना जितनी तेजी से पांव पसार रहा है, कुछ उतनी ही तेजी से इसको लेकर फैला अंधविश्वास भी जड़ें जमाते जा रहा है। पहले से ही हमारा समाज अंधविश्वास में बुरी तरह जकड़ा हुआ है, उस पर अगर कोई कोरोना को भी अंधविश्वास ठहरा कर जो उपाय बताता है, लोग तुरंत बिना शक—सुबहा के उसे मान लेते हैं।

कोरोना के नाम पर कहीं उसे माई बनाकर पूजा गया, तो कभी कहा गया कि गोमूत्र सेवन से ये रोग नहीं होगा, और भी तमाम तरह के अंधविश्वास, तंत्र—मंत्र, ढोंग—पाखंड आये दिन कोरोना के नाम पर हो रहे हैं। इतना ही नहीं कोरोना को भगाने के लिए लोगों ने जीभ चढ़ाना, बलि चढ़ाना समेत दूसरे तमाम कुकर्म करने भी शुरू कर दिये हैं।

अंधविश्वास के ऐसे-ऐसे मामले सामने आते हैं, जिनके बारे में सोचकर ही रूह कांप जाती है। ऐसा ही एक मामला राजस्थान के भीलवाड़ा में सामने आया है, जहां अंधविश्वास के कारण एक 13 दिन की मासूम बच्ची का जिस तरह उत्पीड़न किया गया, उसके बारे में सोचकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। 13 दिन की मासूम के बीमार होने पर उसे लोहे की गर्म सलाखों से दर्जनों जगह पर दागा गया और स्वस्थ होने के इंतजार में उसे तड़पता हुआ छोड़ दिया।

अंधविश्वासी माता-पिता ने अपनी ही 13 दिन की मासूम बच्ची को ईलाज के नाम पर ऐसा दंश दिया कि बच्ची जिंदगी और मौत से जूझ रही है। जब बच्ची की हालत बहुत ज्यादा बिगड़ी तो परिजन उसे एमजीएच में इलाज के लिए लेकर पहुंचे।

मीडिया में आई खबर के मुताबिक भीलवाड़ा जिले के पारोली थाना क्षेत्र के फलासेड गांव निवासी सोजी राम की 13 दिन की मासूम बच्ची को लगभग एक सप्ताह से निमोनिया की शिकायत थी, मगर बजाय इलाज के अंधविश्वास में आकर बच्ची के परिजनों ने उसके शरीर को जगह-जगह से गर्म सलाखों से गोंद दिया। बच्ची को उसके परिजनों ने शरीर पर दो दर्जन से ज्यादा ऐसे घाव दिए हैं, जिससे उसकी हालत बहुत खराब हो गयी।

टोने-टोटके में पड़कर बच्ची को इलाज के नाम पर जगह-जगह गर्म सलाखों से दागा गया, जिससे मासूस की हालत और ज्यादा बिगड़ गयी।

दर्द से तड़पती बच्ची की हालत में जब कोई सुधार नहीं आया बल्कि हालत और बिगड़ गयी तो परिजन उसे लेकर भीलवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय में पहुंचे। वहां उसे एमजीएच के एनआईसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया।

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. इंद्रा का कहना है कि बच्ची की हालत फिलहाल गंभीर बनी हुई है। उसके शरीर पर लगाए गए घाव के कारण उसके खून में भी कीटाणु होने की आशंका है।

राजस्थान के इस इलाके समेत कई अन्य जगह यह कुप्रथा है कि बच्चों को निमोनिया होने पर उन्हें गर्म सलाखों से दाग दिया जाता है। जागरुकता के अभाव में यह कुप्रथा पूरे समाज में फैली हुई है। इसलिए यहां अकसर बच्चों को गर्म सलाखों से दागे जाने के ऐसे मामले जब-तब सामने आते रहते हैं। ऐसी घटनाओं के लिए दोषी कोई और नहीं बल्कि अज्ञानता के अभाव में मां-बाप ही होते हैं।  

बच्‍चों को बुखार हो या निमोनिया भीलवाड़ा में इन सबका इलाज गर्म सलाखों से दागना यानी डांव लगाना माना जाता है। पिछले लंबे समय से यह अंधविश्‍वास ग्रामीण इलाकों में पैर पसारता जा रहा है। अब तक भीलवाड़ा के महात्‍मा गांधी चिकित्‍सालय में डांव लगाने से गंभीर हालत में पहुंचे बच्चों के कई मामले सामने आ चुके हैं। डॉक्टर कहते हैं कि वे परिजनों को इसके प्रति जागरुक करते हैं, मगर कम होने के बजाय यह मामले और तेजी से पांव पसार रहे हैं। कई बच्चों की तो ऐसे मामलों में मौत तक हो जाती है। 

Tags:    

Similar News