तंत्र-मंत्र के चक्कर में पड़ मोक्ष के लिए BHU के MBBS छात्र ने गंगा में ली समाधि, 5 दिन बाद लाश बरामद

विंध्याचल में लगे सीसी कैमरों की फुटेज से भी पता चला है कि नवनीत ने नारियल और सिंदूर खरीदा था। इसके बाद उसने गंगा स्नान किया और फिर बाहर आकर पूजा-पाठ की थी...

Update: 2020-06-15 16:50 GMT
photo : शुभम कश्यप की एफबी से

जनज्वार। पिछले कई दिनों से लापता बीएचयू के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आईएमएस) में एमबीबीएस के छात्र रहे डॉ. नवनीत पराशर का शव पुलिस ने शनिवार 13 मई को उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में चील्ह थानाक्षेत्र के कोल्हुआ गांव में गंगा घाट के किनारे बरामद किया। नवनीत पराशर 9 जून को विंध्याचल मंदिर के पास से गायब हुआ था।

जानकारी के मुताबिक बिहार स्थित गोपालगंज जिले के महम्मदपुर थाने के हकामगंज गांव निवासी मनोज सिंह के पुत्र नवनीत पराशर बीएचयू में साल 2014 से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद इंटर्नशिप कर रहा था और साथ में एमडी की भी तैयारी कर रहा था।

इस मामले में शुरुआती पड़ताल के बाद लंका पुलिस का कहना है कि डॉ. नवनीत ने तंत्र-मंत्र के चक्कर में पड़ मोक्ष के लिए विंध्याचल जाकर जल समाधि ली थी। उसके साथियों ने भी इस बात की पुष्टि की। नवनीत के गायब होने के बाद से इस मामले की जांच कर रहे लंका इंस्पेक्टर अश्विनी कुमार चतुर्वेदी कहते हैं कि तंत्र—मंत्र के अलावा इस मामले में अभी और कोई एंगल सामने नहीं आया है।

पुलिस का कहना है कि नवनीत के दोस्तों, परिजनों और उसे जानने वालों से बातचीत की गई। कमरा भी चेक किया गया था। बीएचयू के धन्वंतरि हॉस्टल का कमरा छोड़ने से पहले नवनीत ने अपने दोस्त—मित्रों से बातचीत बंद कर दी थी। विंध्याचल में लगे सीसी कैमरों की फुटेज से भी पता चला है कि नवनीत ने नारियल और सिंदूर खरीदा था। इसके बाद उसने गंगा स्नान किया और फिर बाहर आकर पूजा-पाठ की थी।

file photo of Navneet Parashar

पुलिस के मुताबिक विंध्याचल में जिस पंडे से नवनीत पराशर की अंतिम बातचीत हुई थी, उसे उसने अपनी बाइक की चाबी बतौर दक्षिणा दान कर दी थी। पंडे को चाभी देने के बाद नवनीत ने उससे कहा था कि वह अपने पैर में लगी मिट्टी साफ करके वापस आ रहा है। नारियल और सिंदूर को घाट किनारे की सीढ़ियों पर ही छोड़कर वह गंगा की ओर चला गया, जिसके बाद उसका कुछ पता नहीं चला।

लंका इंस्पेक्टर अश्विनी कुमार चतुर्वेदी की मानें तो पुलिसिया जांच में अब तक जो तथ्य सामने आये हैं, वह ये साबित करते हैं कि नवनीत ने यह कदम मोक्षप्राप्ति के लिए उठाया था और जीते जी गंगा में समाधि ले ली थी। पुलिस का कहना है कि उसके दोस्तों—मित्रों से भी बात करने पर यह लगता है कि नवनीत ने मोक्ष प्राप्ति को ही अपने जीवन का एकमात्र उद्देश्य बना लिया थ्ज्ञा।

डॉ. नवनीत प्रकरण में बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल के पूर्व चिकित्सा अधीक्षक और आईएमएस के छात्र सलाहकार प्रो. विजयनाथ मिश्रा अमर उजाला से हुई बातचीत में कहते हैं कि इसकी जांच तफ्तीश से की जानी चाहिए। नवनीत पराशर के पिता ने अपने बेटे की मौत के लिए विंध्याचल के तांत्रिकों को जिम्मेदार ठहराया है। इसकी इसलिए भी जांच की जानी चाहिए क्योंकि तांत्रिकों के अंधविश्वास में न जाने कितने लोग फंस जायेंगे और इसी तरह मोक्ष प्राप्ति के लिए कितने नौजवान जलसमाधि या अन्य तरीकों से अपनी जान दे देंगे। डॉ. विजयनाथ कहते हैं कि इस मामले की पूरी पड़ताल कर जो भी नवनीत की मौत के लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाये।

नवनीत के परिजनों का आरोप है कि किसी तांत्रिक के चक्कर में पड़ने के कारण उसने मौत को चुना है। हालांकि नवनीत की लाश का पेट कटा मिला था, जिससे लग रहा था कि किसी ने उसे चाकू मारा हो। मगर पुलिस का कहना है कि नदी में जानवर उसका मांस खा गये थे इसलिए पेट में गड्ढा बन गया था।

मामले की जांच कर रही पुलिस का कहना है कि मृतक छात्र के दोस्तों से पूछताछ की गयी तो उन्होंने उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने और उसके किसी तांत्रिक के वश में आ जाने की बात बतायी थी। दोस्तों के मुताबिक नवनीत अक्सर अघोर, अघोरी, अध्यात्म और शरीर के तत्वों की बातें किया करता था।

नवनीत के पिता ने मीडिया को बताया कि पिता ने बताया कि आखिरी बार जब उससे बात हुई थी तो उसने हर महीने से कुछ ज्यादा रुपए मांगे थे। पूछने पर बताया था कि उसे रूद्राक्ष की माला और अध्यात्म से जुड़ा कुछ सामान खरीदना है।

फिलहाल पुलिस अलग-अलग कोणों से मामले की जांच कर रही है। बीएचयू के धन्वंतरी हॉस्टल के जिस कमरे में नवनीत रहता था, उसे पुलिस जांच के लिए फिलहाल सील कर दिया गया है।

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