जानें कब सामान्य होगी रेल सेवा और ज्यादा किराया वसूली के बावजूद घाटे का रोना क्यों रो रही मोदी सरकार

भारतीय रेलवे इन दिनों 1,089 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन कर रहा है, कोरोना महामारी के पहले रेलवे की ओर से 1768 ट्रेनों का संचालन किया जा रहा था....

Update: 2020-12-19 06:59 GMT

प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली, जनज्वार। एक तरफ तो कोरोना के नाम पर रेलवे द्वारा सिर्फ स्पेशल ट्रेनों को चलाकर यात्रियों से पहले की अपेक्षा काफी ज्यादा किराया वसूला जा रहा है, दूसरी तरफ इस दौरान रेल सेवाएं सामान्य नहीं की जा रही हैं। साथ ही लोकल और पैसेंजर ट्रेनें भी नहीं चलाई जा रहीं हैं, जिस कारण लोगों को भारी परेशानी हो रही है। ऐसे में रेल सेवाएं कब से सामान्य होंगी, हर किसी के मन में यह सवाल है।

रेलवे ने शुक्रवार को स्पष्ट कर दिया है कि रेल सेवा सामान्य होने में अभी समय लगेगा। इस संबंध में रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वीके यादव ने यह जानकारी दी है।

रेलवे की तरफ से शुक्रवार को कहा गया 'सामान्य रेल सेवाएं बहाल होने की निश्चित तारीख बता पाना संभव नहीं है। रेलवे अधिकारी हालात पर करीब से नजर रख रहे हैं और सामान्य ट्रेन सेवाओं को धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से बहाल किया जाएगा।'

हालांकि रेलवे लगातार अपनी आय में कमी और घाटे का रोना रो रहा है, वह भी तब, जब यात्रियों से काफी ज्यादा पैसे वसूल कर रहा है। घाटे को लेकर रेलवे ने कहा 'पिछले साल के मुकाबले इस साल अभी तक यात्री श्रेणी की आय में 87 फीसद की कमी देखी गई है।'

उल्लेखनीय है कि भारतीय रेलवे इन दिनों 1,089 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन कर रहा है। कोरोना महामारी के पहले रेलवे की ओर से 1768 ट्रेनों का संचालन किया जा रहा था।

रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष व सीईओ वीके यादव ने कहा 'अब तक हम 1,768 ट्रेनों की तुलना में 1,089 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन कर रहे हैं। रेलवे 264 कोलकाता मेट्रो ट्रेनों और 3,936 उपनगरीय सेवाओं का संचालन कर रहा है।'

अध्यक्ष ने कहा कि रेलवे ट्रेन सेवाओं की सतत निगरानी कर रहा है। कोरोना महामारी के दौरान ट्रेनों की अधिक मांग और वेटिंग लिस्ट की अधिकता के कारण 20 विशेष क्लोन ट्रेनों का संचालन किया गया जो अभी तक चल रहीं हैं। उन्होंने कहा कि त्योहारी सीजन के दौरान भीड़ कम करने तथा कन्फर्म टिकटों की मांग को देखते हुए 618 विशेष ट्रेनों का संचालन किया गया।

लोकल ट्रेनों या छोटी रूट की ट्रेनों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा 'रेलवे देश भर में 131 यात्री ट्रेनें चलाया जा रहा है। सभी जोन महाप्रबंधकों से राज्य सरकार से बात करने के लिए कहा गया है कि क्या उनके जोन में और ट्रेनें चलाने की आवश्यकता है। यदि जरूरत पड़ी तो और ट्रेनों का संचालन किया जाएगा।'

हालांकि यात्री लगातार लोकल और पैसेंजर ट्रेनों को चलाने की मांग कर रहे हैं, चूंकि विभिन्न राज्यों में लोकल सरकारी और प्राइवेट बस सेवाएं चल रहीं हैं, पर एक तो ये नाकाफी साबित हो रहीं हैं और दूसरी ओर प्राइवेट बस सेवाएं काफी महंगी भी हैं।

रेलवे के सीईओ और चेयरमैन वीके के यादव ने यह भी कहा कि कोविड की वजह से रेलवे को आर्थिक नुकसान हुआ है। अब तक पिछले साल के मुकाबले 87 फीसद कम कमाई हुई है।

उन्होने बताया कि पिछले साल जहां 53 हजार करोड़ की कमाई हुई थी। वहीं, अभी तक सिर्फ 4600 करोड़ रही है। आपको बता दें कि बीते साल कैग ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि साल 2017-18 में भारतीय रेल को अपनी सेवाओं के बदले में 98.44 रुपए ख़र्च करके 100 रुपए मिले हैं। जबकि साल 2015-16 में रेलवे को 90.49 रुपए ख़र्च करके 100 रुपए की कमाई होती थी।

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