Bihar News : नीतीश कुमार ने BJP के सामने क्यों किया समर्पण, जानें पूरा मामला

Bihar News : सरस्वती पूजा के दौरान डीजे बजाने पर दो भाजपा समर्थकों की गिरफ़्तारी हुई थी। इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष ने एक थानेदार और डीएसपी के तबादले को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था। दूसरी तरफ स्थानीय सांसद राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ऐसा नहीं चाहते थे।

Update: 2022-03-19 03:51 GMT

 जिस SDPO को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश और स्पीकर में हुई थी कहासुनी उनका तबादला

Bihar News : बिहार में सत्ताधारी पार्टी जेडीयू ( JDU ) और भाजपा ( BJP ) के बीच शह और मात का खेल जारी है। इस मामाले में ताजा अपडेट यह है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ( Nitish Kumar ) ने विधानसभा स्पीकर के साथ लखीसराय मामले को लेकर पिछले कुछ दिनों से जारी विवाद मामले में घुटने टेक दिए हैं। सीएम नीतीश कुमार ने विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ( Vijay Kumar Sinha ) की इच्छा के मुताबिक लखीसराय के डीएसपी रंजन कुमार का आखिरकार तबादला कर दिया है। सीएम के इस रुख को उनकी हार माना जा रहा है।

सीएम और स्पीकर के बीच विवाद की मूल वजह बने एसडीपीओ ( SDPO ) का तबादला कर दिया गया है। इस संबंध में राज्य के गृह विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है। बताया गया है कि ऐसा नीतीश कुमार ( Nitish Kumar ) से हरी झंडी मिलने के बाद किया गया है। ताजा आदेश के मुताबिक अब सैयद इमरान मसूद को लखीसराय का नया एसडीपीओ ( SDPO ) बनाया गया है।

दरअसल, लखीसराय विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ( Vijay Kumar sinha ) का विधानसभा क्षेत्र हैं। कुछ दिन पहले जब सरस्वती पूजा के दौरान कोरोना नियमों के उल्लंघन के आधार पर दो भाजपा समर्थकों की गिरफ़्तारी हुई थी तब से विधानसभा अध्यक्ष ने एक थानेदार और डीएसपी के तबादले को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था। दूसरी तरफ स्थानीय सांसद राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ऐसा नहीं चाहते थे। ललन सिंह नीतीश कुमार के करीबी नेता हैं। बिहार की राजनीति में माना जाता है कि ललन सिंह का समर्थन सीएम सीमा से पार जाकर भी करते हैं।

 जब विधानसभा सत्र शुरू हुआ तो इस संबंध में कई बार प्रश्न भाजपा विधायकों ने उठाया और सोमवार को जब सरकार के जवाब के बाद भी अध्यक्ष ने टिप्पणी की तो सीएम ने नीतीश कुमार फटकार लगाते हुए स्पीकर को खरी खोटी सुना दी।

लखीसराय मुद्दे पर विधानसभा में सीएम नीतीश कुमार ( Nitish Kumar ) के उग्र तेवर के बाद अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा और भाजपा विधायकों में नीतीश के प्रति काफी रोष था। इसका असर यह हुआ कि विवाद के अगले दिन न विजय कुमार सिन्हा सदन की कार्यवाही चलाने के लिए सदन में आये ना नीतीश कुमार कार्यवाही में हिस्सा लेने पहुंचे। बताया जा रहा है कि बुधवार शाम कैबिनेट के बाद नीतीश कुमार दोनों दलों के वरिष्ठ मंत्रियों के बीच बचाव के बाद अध्यक्ष से मिले और नाराज़ सिन्हा को जल्द डीएसपी को हटाने का आश्वासन दिया गया। इसके बाद दो दिनों के अंदर उन्होंने शुक्रवार को सरकारी कार्यालय में अवकाश के बावजूद तबादले की अधिसूचना जारी करवा दी। भाजपा सूत्रों के मुताबिक नीतीश इस मुद्दे पर भाजपा के तेवर से बचाव की मुद्रा में हैं। फिलहाल अपनी गद्दी एक अधिकारी की बलि देकर बचा ली है।

जेडीयू के नेता भी मानते हैं कि नीतीश कुमार ने भाजपा के सामने घुटने एक बार फिर टेक दिए हैं। हालांकि, जेडीयू नेता का यह भी कहना है कि तबादले का दबाव नीतीश ने खुद अपने सिर विधानसभा के अंदर आक्रामक भाषा के कारण लिया है। इस बात से कोई इनकार नहीं कर रहा कि सरकार में अब भाजपा का वर्चस्व और बढ़ेगा और आने वाले दिनों में नीतीश कुमार को हर मुद्दे पर अपने सहयोगी के सामने झुकना पड़ेगा।

इससे पहले सासाराम से भाजपा सांसद छेदी पासवान ने कहा थ कि सत्ता के लिए जदयू नेता नीतीश कुमार मोस्ट वांटेड मुंबई अंडरवर्ल्ड डॉन और 1993 सीरियल ब्लास्ट का मास्टरमाइंड दाउद इब्राहिम से भी हाथ मिला सकते हैं। इस पर नीतीश कुमार ने भाजपा शीर्ष नेतृत्व से अपनी नाराजगी जाहिर की थी।

बता दें कि 2020 विधानसभा चुनाव के बाद से नीतीश कुमार का कद सियासी लिहाज छोटा हो गया है। ये बात अलग है कि भाजपा की मजबूरियों की वजह से वो दोबारा सीएम बने। यही वजह है कि नीतीश कुमार अब पहले की तरह अपने अंदाज में काम नहीं कर पा रहे हैं। भाजपा नेता समय—समय पर उन्हें यह अहसास कराते रहते हैं कि सरकार में बड़ी पार्टी होने के नाते वो अकेले सभी फैसले नहीं ले सकते।

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