कोशी नवनिर्माण मंच ने उठाई आवाज: डगमारा प्रोजेक्ट के 2 हजार 400 करोड़ रुपए का बजट कोशी में ही खर्च करे सरकार

Dagmara Hydro-Electric Project: बिहार के कोशी इलाके की डगमारा परियोजना को 56 साल बाद पिछले वर्ष ही हरी झंडी मिली थी और इस साल की शुरूआत में ही 7 जनवरी को योजना को बंद करने का सरकार ने फैसला सुना दिया। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने परियोजना की और बिजली उत्पादन की लागत ज्यादा होने समेत कई बिंदुओं के चलते बंद करने का फैसला किया।

Update: 2022-01-17 17:28 GMT

Dagmara Hydro-Electric Project: बिहार के कोशी इलाके की डगमारा परियोजना को 56 साल बाद पिछले वर्ष ही हरी झंडी मिली थी और इस साल की शुरूआत में ही 7 जनवरी को योजना को बंद करने का सरकार ने फैसला सुना दिया। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने परियोजना की और बिजली उत्पादन की लागत ज्यादा होने समेत कई बिंदुओं के चलते बंद करने का फैसला किया। इसके बाद अब प्रस्तावित डगमारा परियोजना रोके जाने की स्थिति में, इस क्षेत्र के जनविकास व आत्मनिर्भर कोशी क्षेत्र बनाने हेतु, डगमारा परियोजना के निवेश को इस क्षेत्र में लाखों लोगों के रोजगार सृजन, बाढ़ की समस्या के समाधान और सौर उर्जा उत्पादन के क्षेत्र लगाये जाने की मांग कोशी नव निर्माण मंच ने सरकार से की है।

बाढ़ प्रभावित कोशी क्षेत्र में लंबे समय से वहां के लोगों के पुनर्वास समेत सेवा के कार्य में लगी संस्था कोशी नवनिर्माण मंच ने 17 जनवरी दिन सोमवार को इस आशय का 14 सूत्रीय मांगपत्र बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह, बिहार के उपममुख्य मंत्री व वित्त मंत्री तारकिशोर प्रसाद, ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र यादव, उद्योग मंत्री शाहनवाज हुसैन को भेजा गया।

मांग पत्र में लिखा गया है कि जिले की बहुप्रतीक्षित प्रस्तावित "डगमारा परियोजना" को आर्थिक व अन्य कारणों से रोक दी गयी है जिसका हम स्वागत करते हंै, इस परियोजना से कोशी क्षेत्र के लोगों को यह अभिलाषा लगी थी कि इससे क्षेत्र में रोजगार सृजन होगा, क्षेत्र में बिजली का उत्पादन के साथ ही कोशी क्षेत्र में बाढ़ की समस्या का समाधान भी होगा। हालांकि परियोजना के मूल ज्ञात दस्तावेजों से यह साफ था कि यह परियोजना आर्थिक रूप से ही नही बल्कि पर्यावर्णीय, सामाजिक रूप से भी अव्यवहारिक व त्रासदपूर्ण थी। परन्तु रोजगार सृजन बाढ़ नियन्त्रण की लोगों कि अभिलाषा बेहद आवश्यक व जरूरी है। इसके सम्बन्ध में कोशी नव निर्माण मंच का मानना है इस परियोजना के लिए जो निवेश लगने थे उस निवेश को क्षेत्र में ही लगाने की बेहद जरूरत है। ग्लोबल वार्मिंग के दौर में पहुंच चुकी दुनिया में परिस्थितयों के अनुरूप यहाँ जन विकास के कार्यक्रम संचालित हों। इस क्षेत्र में सौर उर्जा (सोलर) के असीम सम्भावनाओं पर कार्य शुरू किया जाए, पर्यावर्णीय व कार्बन क्रेडिट की दृष्टि से भी इसका दूरगामी भविष्य है, उसी प्रकार जिलों में मक्का आधारित अनेक प्रकार के उद्योगों, सब्जी व फल प्रसंस्करण उद्योग, मखाना प्रसंस्करण उद्योग, कोशी की मछली, बत्तक पालन को बढ़ावा देना, मशाला उद्योगों, धान व् गेंहूं के फूड प्रोसेसिंग उद्योग, डेयरी यूनिटों को स्थापित कराने के साथ ही अन्य आवश्यक वस्तुएं जो आसानी से निर्मित हो सकती है और उनका दुसरे राज्यों या देशों से मंगाना पड़ता है। उनके उद्योग विकसित करने की बेहद जरूरत है।

कोशी नवनिर्माण के संस्थापक महेंद्र यादव ने कहा कि इसके लिए रोड मैप बनाकर नये- नये इंटरपन्योर विकसित करने की जरूरत है। जिससे लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा और जिला पलायन की अभिशाप से आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ेगा। उस मांग पत्र में कोशी समस्या के समाधान के लिए सरकार कार्य करे और जब तक समाधान नही हो रहा है तब तक के लिए तटबन्ध के बीच के लोगों के कल्याण के लिए बने कोशी पीड़ित प्राधिकार को तत्काल पुनः सक्रिय कर उसमें वर्णित सभी कार्यक्रम धरातल पर अविलम्ब लागू कराने, लगान मुक्ति के लिए कानून बनाने, पुनर्वास से वंचितों को अभियान चलाकर नया सर्वे करते हुए पुनर्वासित कराने की मांग की गयी है।


डगमारा परियोजना एक वर्ष के अंदर ही बंद

कोशी इलाके की डगमारा परियोजना को पिछले साल 56 वर्ष बाद हरी झंडी मिली थी और इस साल 7 जनवरी को योजना को बंद करने का फैसला किया गया। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने परियोजना की लागत और बिजली उत्पादन की लागत ज्यादा होने समेत कई बिंदुओं के चलते बंद करने का फैसला किया। इस प्रोजेक्ट के जरिए कहा जा रहा था कोशी के एक बड़े इलाके सलाना बाढ़ की विभीषिका से मुक्ति मिलेगी और बिजली भी बनेगी। अब परियोजना पर तालेबंदी की खबर से कहीं खुशी तो कहीं मायूसी है। डगमारा परियोजना की सबसे पहले बात 1965 में हुई जब केंद्रीय जल आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष कंवरसेन ने कोशी इलाके के लिए डगमारा में दूसरे बैराज की आवश्यकता पर बल दिया गया था। लेकिन परियोजना को औपचारिक हरी झंडी मिलने में 56 साल लग गए। 130 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता का यह प्रोजेक्ट कोशी बैराज से डाउन स्ट्रीम में करीब 60 किलोमीटर नीचे और कोशी महासेतु से थोड़ा ऊपर बनना था। यह बहुउद्देशीय हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट था, जिसकी लागत 2 हजार 400 करोड़ रुपए अनुमानित थी। 14 जून 2021 को भारत सरकार के नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन और बिहार राज्य जल विद्युत निगम के साथ द्विपक्षीय समझौता हो हुआ था। इससे पहले 18 अप्रैल, 2021 को नीतीश कुमार कैबिनेट ने योजना के मौजूदा स्वरूप को स्वीकृति दी थी।

परियोजना के तहत कोसी नदी के बाएं एवं दाएं दोनों ओर एक-एक पावर हाउस बनना था। बिहार सरकार के मुताबिक इस परियोजना के पूरा होने के बाद सुपौल सहित सात जिलों को लाभ होता। इनमें दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, सहरसा, मधेपुरा और अररिया शामिल थे। लेकिन नदी और बाढ़ को लेकर कोशी को समझने वालों के मुताबिक ये परियोजना बाढ़ से बचाने नहीं बल्कि इलाके को डुबाने वाली थी। इसलिए वो लगातार इसका विरोध कर रहे थे। अब जबकि इस परियोजना को आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया गया है, विरोध करने वाले खुश हैं और डगमारा के सहारे अपने इलाके में विकास का सपना देखने वाले लोग मायूस हैं।

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