Bikaner News Hindi: पुलिस महकमे में मिसाल बने बीकानेर के SHO, एक लड़की को न्याय दिलाने के लिए पार की सभी हदें

Bikaner News Hindi: अक्सर किसी मामले की जांच में पुलिस की लापरवाही से आरोपी सजा पाने से बच जाते हैं, मगर इस मामले में बीकानेर जिले में एक एसएचओ धीरेन्द्र सिंह ने मिसाल पेश की है।

Update: 2021-11-23 06:59 GMT

Bikaner News Hindi: अक्सर किसी मामले की जांच में पुलिस की लापरवाही से आरोपी सजा पाने से बच जाते हैं, मगर इस मामले में बीकानेर जिले में एक एसएचओ धीरेन्द्र सिंह ने मिसाल पेश की है। बीकानेर जिले के बीछवाल पुलिस थाने के एसएचओ रहे धीरेंद्र सिंह वो पुलिस अफसर हैं, जिन्होंने दो साल की रेप पीड़िता बच्ची को न्याय को दिलाने के लिए खुद केस लड़ा जबकि बच्ची की मां ने एफआईआर ​तक लिखवाने से इनकार कर दिया था।

साल 2016 में धीरेंद्र सिंह बीकानेर बीछवाल पुलिस थाने में एसएचओ थे। तब जंगल में एक बच्ची के मिलने की सूचना मिली। धीरेंद्र सिंह टीम के साथ मौके पर गए। बच्ची को जंगल से उठाया और अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टर ने बच्ची के साथ रेप की पुष्टि की।

धीरेंद्र सिंह ने काफी मशक्कत के बाद बच्ची की मां को ढूंढा। उसे FIR कराने के लिए कहा लेकिन माँ ने FIR दर्ज कराने से इनकार कर दिया। गांव वालों से कहा गया कि वो FIR करवाएं ताकि पुलिस दोषी को सजा दिला सके लेकिन कोई सामने नहीं आया। इस पर धीरेंद्र सिंह ने न्याय दिलाने की सोची।

धीरेंद्र सिंह पुलिस थाने आये और खुद परिवादी बनकर FIR दर्ज करवाई। FIR दर्ज करने के बाद मामले की बारीकी से जांच की। आरोपी छोटूराम जाट को गिरफ्तार किया। मामला अदालत पहुंचा तो उसकी मां को गवाही के लिए बुलाया गया। कई बार समन भेजा लेकिन माँ ने गवाही से इंकार कर दिया। इसी के चलते फैसला होने में पांच साल लग गए।

SHO धीरेन्द्र ने बताया कि इस दौरान काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा। केस के दौरान मेरा ट्रांसफर बीछवाल थाने से पहले बीकानेर और बाद में बीकानेर रेंज से ही ट्रांसफर हो गया। बेटी को न्याय दिलाने के लिए बार-बार बीकानेर आता रहा। उसके लिए सबूत जुटाता रहा।

इस केस के लिए अधिकांश सबूत खुद SHO धीरेन्द्र ने ही जुटाए। धीरेंद्र सिंह ने कहा ये मेरे जीवन की सबसे बड़ी खुशी है। बच्ची का परिवार उसे न्याय दिलाने के लिए तैयार नहीं था लेकिन मैं इस घटना से अंदर तक हिल गया था।मैंने खाकी पहनी इसीलिए थी कि किसी को न्याय दिला सकूं। जब मेरे सामने पीड़ित एक दो साल की बच्ची है तो फिर उसे न्याय दिलाना मेरी सबसे बड़ी जिम्मेदारी थी। मेरे जीवन की सबसे बड़ी खुशी है कि उस बेटी को न्याय मिल गया। आरोपी को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है।

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