Chennai Airport News : परांदूर में हवाई अड्डे के खिलाफ ग्रामीण जान देने को तैयार, कहा - ' हमारी कब्र पर बनेगा चेन्नई का दूसरा हवाई अड्डा '

Chennai Airport News : मेरे पिता और पूर्वज यहीं रहते थे और हमारा इस मिट्टी से नाता है। भले ही हम चेन्नई में बस गए फिर भी हम इस जगह को घर कहते हैं। यह पैसे की बात नहीं है। हम अपनी जमीन नहीं खोना चाहते।

Update: 2022-08-20 06:02 GMT

Chennai airport News : परांदूर में हवाई अड्डे के खिलाफ ग्रामीण जान देने को तैयार, कहा - हमारी कब्र पर बनेगा चेन्नई का दूसरा हवाई अड्डा

Chennai Airport News : तमिलनाडु ( Tamil Nadu ) की एमके स्टालिन ( MK Stalin ) सरकार ने हाल ही में चेन्नई का दूसरा हवाई हड्डा परांदूर ( Parandur News ) में बनाने की घोषणा की है। अब इसके खिलाफ परांदूर सहित आसपास के गांवों के लोग मुखर हो गए हैं। ग्रामीण स्टालिन सरकार और कांचीपुरम ( Kanchipuram ) जिला प्रशासन के तानाशही रवैये के खिलाफ जान देने पर उतारू हैं। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि सरकार पहले उनकी शर्तों को माने। ऐसा न करने की स्थिति में सरकार उनकी कब्र पर ही एयरपोर्ट ( Chennai second airport will be built on our grave ) बना पाएगी। फिलहाल, ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार की एयरपोर्ट योजना ( airport Plan ) के खिलाफ लामबंद होना शुरू कर दिया है।

ग्रामीणों की मांग है पर सरकार एयरपोर्ट का खाका ग्रामीणों के सामने पेश करे। खाके में मुआवजे, पर्यावरणीय दुष्प्रभावों से बचाने की योजना और पुनर्वास की योजना के साथ ग्रामीणों के रोजगार का भी उल्लेख सरकार करे। साथ ही खाके की शर्तो को मानना सरकार के लिए बाध्यकारी होना चाहिए न कि स्वैच्छिक।

स्टालिन की तानाशाही से नहीं डरते, डीएम ने लोगों को अपमानित क्यों किया

परांदूर ( Parandur ) और आसपास के कई गांवों के नाराज लोगों का कहना है कि एमके स्टालिन सरकार का रवैया तानाशाही वाला है। परांदूर में हवाई अड्डा बनाने के फैसले से पहले न तो सरकार ने और न ही जिला प्रशासन के अधिकारियों ने ग्रामीणों से सहमति ली। कांचीपुरम जिले के डीएम इस बाबत मिलने पहुंचे लोगों को अपमानित किया। डीएम को लोगों के धर उजड़ने की चिंता नहीं है। उन्हें भूमाफियाओं, रियल एस्टेट एजेंसियों और स्थानीय नेताओं के हितों की चिंता है। वो इन लोगों से इस बाबत बैठक करते हैं, लेकिन जिसका घर और जीविकोपार्जन छीन का हवाई अड्डा बनाना चाहते हैं, उसने जब उनसे जानकारी चाही तो उन्होंने ग्रामीणों को अपमानित करते हुए कहा कि न्यूज चैनल वालों से ले लो। इस बारे में मुझसे मिलने की जरूरत नहीं है।

नागापट्टू के एक कारोबारी बालाजी का कहना है कि परांदूर और आसपास के लोग अपने भविष्य को लेकर अंधेरे में हैं। हकीकत को जानने के लिए इगनापुरम, नागापट्टू और परंदूर गांवों के निवासियों ने पांच बसें किराए पर लीं। 8 अगस्त को कांचीपुरम जिला कलेक्टर के कार्यालय में पहुंच गए लेकिन कलेक्टर केवल पांच लोगों से मिले। हवाई अड्डे को लेकर ग्रामीणों के साथ कलेक्टर की प्रतिक्रिया अच्छी नहीं थी। डीएम ने कहा कि अगर हमें समाचार के माध्यम से हवाई अड्डे के बारे में पता चला तो हमें मीडिया घरानों से इसके बारे में डिटेल जानकारी भी हासिल कर लेनी चाहिए। उनके पास हमें देने के लिए कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने हमारी स्थिति को समझने या हमारे भ्रम को शांत करना जरूरी नहीं समझा।

परांदूर के ग्रामीणों को न तो राज्य सरकार के प्रतिनिधियों ने, न ही जिला प्रशासन के अधिकारियों ने कोई जानकारी दी है। इस बात को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि हमारे साथ क्या होने वाला है। परांदुर के लोग चेन्नई के दूसरे हवाई अड्डे की योजना का विरोध करेंगे। अफसोस की बात ये है कि परांदूर और आसपास के गांवों के लोगों को पहली बार टेलीविजन चैनलों के जरिए इस बात की जानकारी मिली कि परांदूर में चेन्नई का दूसरा हवाई अड्डा बनाया जाएगा।

लोगों को सता रहा घर और भूसंपत्ति खोने का डर

परांदूर के लोग इस बारे में शासन-प्रशासन के स्तर पर पुख्ता जानकारी न मिलने की वजह से भ्रम की स्थिति में हैं। उन्हें इस बात का डर सता रहा है कि वो अपने घर और भूसंपत्ति खो देंगे। लोगों को मुआवजा मिलेगा या नहीं जैसी बातों को लेकर भी सभी को भ्रम में रखा जा रहा है। भूमाफिया से जुड़े लोग ग्रामीणों को धमकाने लगे हैं। कहते हैं जीमन दे दो और पैसा ले लो, नहीं तो कुछ नहीं मिलेगा। साथ ही कांचीपुरम जिला प्रशासन के अधिकारियों की उदासीनता ने लोगों की गंभीर चिंता में डाल दिया है।

जमीन हड़पने में जुटे भूमाफिया

खास बात यह है कि डीएम ने हवाई अड्डे की योजना को लेकर भले ही कोई जानकारी नहीं दी लेकिन रियल एस्टेट एजेंट इस योजना का लाभ उठाने के लिए जमीन कब्जाने और खरीदने की मुहिम में जुट गए हैं। रियल एस्टेट एजेंसियों के एजेंटों ने लोगों से संपर्क करना शुरू कर दिया है। लोगों का कहना है कि सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट न होने से घबराकर बहुत से लोग औने-पौने दामों में एजेंसियों को अपनी जमीन बेच सकते हैं।

जन सुनवाई केवल दिखावा, लोग नहीं मंत्री हुए शामिल

लोगों के विरोध को देखते हुए डीएम ने 15 अगस्त जनसुनवाई बुलाकर लोगों को लूप में लेने की योजना तैयार की। 16 अगस्त की सुबह नौ बजे जिला कलेक्टर कार्यालय में परंदूर और आस-पास के कई संबंधित निवासियों को तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा। कुछ लोगों की सुनी गई। अधिकांश को वापस कर दिया गया। दूसरी तरफ डीएम ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के नेताओं, 13 गांवों के चुनिंदा लोगों के साथ बैठक की। जनसुनवाई में उद्योग मंत्री थंगम थेनारासु, लोक निर्माण मंत्री ईवी वेलु और टीएम अनबरसन और ग्रामीणों की उपस्थिति में हुई।

पहले समुचित मुआवजा तय करे सरकार

मद्रास उच्च न्यायालय के वकील और थंडालम गांव के निवासी पट्टाबीरमन का कहना है कि वे अपनी जमीन छोड़ने या अपना स्थान छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं लेकिन अगर सरकार हमारी राय को नजरअंदाज करने जा रही है। हमें कम से कम प्रति सेंट जमीन के बदले 5 लाख रुपए और 15 लाख रुपए प्रति घर का मुआवजा मिलना चाहिए। प्रशासन के अधिकारी ग्रामीणों एकता को तोडना चाहते हैं। ऐसा कर वो क्षेत्र में माफियाओं, मंत्रियों, दंबगों को लाभ पहुचाना चाहते हैं। अब ग्रामीणों ने फैसला लिया है कि हम उनके जाल में नहीं फंसेंगे। हमने जनसुनवाई से दूर रहने का फैसला लिया है।

वो हमें जमीन में दफन कर दें, बना लें हवाई अड्डा

दूसरी तरफ नागपट्टू निवासी मैथिली का कहना है कि यहां के निवासी दूसरा हवाईअड्डा नहीं चाहते हैं। सरकार परंदूर के लोगों को नया आवास देने की योजना बना रही है या नहीं, क्या सरकार और नौकरशाहों को अंदाजा है कि वो क्या करने की कोशिश कर रहे हैं, हम अपनी खेत की जमीन नहीं छोड़ेंगे। सरकार को ऐसा करने के लिए हम पर दबाव बनाना बंद कर दे। अगर हम यहां खेती करना बंद कर दें तो आप क्या करेंगे। भोजन किस अनाज के भरोसे करेंगे। अगर सरकार हवाईअड्डे के निर्माण को लेकर जिद्द पर अड़ी तो हवाई अड्डा हमारे जमीन में दफनाने के बाद ही बन सकता है। मैथिली कहती हैं कि वे चाहे तो हमारे घरों को जेसीबी और बुलडोजर से तोड़ दें। हमें जमीन के नीचे दफन कर दें। उसके बाद हवाईअड्डा बना लें।

विरोध करने वालों को दिया जा रहा है आतंकी धाराओं में फंसाने की धमकी

इस क्षेत्र के गांव के कुछ युवकों ने भी इस परियोजना के खिलाफ अपना विरोध जताया है। चौंकाने वाली बात यह है कि विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों को स्थानीय राजनेताओं ने लोगों को आतंकवाद रोकथाम अधिनियम और गुंडा अधिनियम के तहत फंसाने की धमकी दी है।

परांदूर की धरती मेरी मां है, कोई इसे कैसे छीन सकता है

चेन्नई में बसे एक व्यवसायी का कहना है कि परांदूर में हवाई अड्डे के निर्माण का मतलब होगा कि वह अपनी मातृभूमि से सभी संबंध खो देंगे। यह मेरी जन्मभूमि है। मेरे पिता और पूर्वज यहीं रहते थे और हमारा इस मिट्टी से नाता है। भले ही हम चेन्नई में बस गए फिर भी हम इस जगह को घर कहते हैं। यह पैसे की बात नहीं है। हम अपनी जमीन नहीं खोना चाहते। परांदूर पंचायत अध्यक्ष बलरामन ने अपने लोगों के साथ खड़े होने का फैसला किया है। उनका कहना है कि परंदूर क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए कृषि एक महत्वपूर्ण आजीविका है। यहां के लोग मुझसे पूछ रहे हैं कि अगर हवाईअड्डे के निर्माण के लिए उनकी जमीन का अधिग्रहण किया गया तो वे क्या करेंगे। मैं, यहां अपने लोगों के साथ खड़ा हूं।

मंडराया पर्यावरणीय दुष्प्रभावों का खतरा

चेन्नई के प्रकृतिवादी और कार्यकर्ता युवान एवेस ने इस संबंध में कई चिंताओं पर प्रकाश डाला। उनका कहना है कि अगर दूसरे हवाई अड्डे के निर्माण पर अमल होता है तो जीवाश्म ईंधन की बड़े पैमाने पर खपत होगी। भूजल जहरीला हो जाएगा। वायु प्रदूषण और अन्य गतिविधियों की वजह से लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित होगा। सरकार ने इन पहलुओं पर नहीं सोचा है। युवान कहते हैं कि विकास परियोजनाओं को शुरू करते समय किसानों और पशुपालकों की आजीविका के साथ-साथ प्रवासी पक्षियों के जीवन को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए था।

क्या कहा था सीएम एमके स्टालिन ने

Chennai Airport News : तमिलनाडु ( Tamil Nadu ) के सीएम स्टालिन ( MK Stalin) ने कहा कि चेन्नई का मीनांबक्कम हवाई अड्डा हर साल 2.2 करोड़ यात्रियों को संभालता है। अगले सात वर्षों में अपनी विस्तार योजनाओं को साकार करने के बाद हवाई अड्डा 3.5 करोड़ यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा। परंदूर में प्रस्तावित हवाई अड्डा सालाना 10 करोड़ यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा। इसमें दो रनवे, टर्मिनल भवन, टैक्सीवे, कार्गो टर्मिनल और अन्य बुनियादी ढांचे विकसित किए जाएंगे। परंदूर एयरपोर्ट को अनुमानित बजट 20,000 करोड़ रुपए है। यह फैसला यात्रियों की बढ़ती संख्या और मीनांबक्कम हवाई अड्डे पर कार्गो सेवाओं की मांग के अलावा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवाओं की राज्य की जरूरत को देखते हुए लिया गया है। हवाई अड्डे के लिए स्थान चयन का काम तमिलनाडु औद्योगिक विकास निगम को सौंपा गया था। टीआईडीसीओ ने उपयुक्तता के आधार पर परांदूर को इसके लिए चुना है।

Tags:    

Similar News