कहीं गुजरात वाली शिपयार्ड बैंक लूट दबाने के लिए तो दाऊद इब्राहिम पर छापे की कथा शुरू नहीं की गई है?

ABG Shipyard Scam: यह वादा उसी वक्त किया गया था जब देश के हर एक व्यक्ति के खाते में काला धन वापसी का 15-15 लाख रूपया देने की बात कही गई थी। लेकिन न दाऊद आया और न 15-15 लाख...

Update: 2022-02-16 03:06 GMT

(गुजरात के एबीजी शिपयार्ड में अब तक की सबसे बड़ी लूट)

मनीष दुबे की रिपोर्ट

ABG Shipyard Scam: कल मंगलवार को अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम (Dawood Ibrahim) के मुंबई स्थित 10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। यह कार्रवाई ईडी ने की। कहा गया कि हवाला और ड्रग्स ट्रेफिकिंग का इनपुट मिला था। कल ही सीबीआई ने मंगलवार को जानकारी दी कि 22,842 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में आरोपियों के खिलाफ लुक-आउट सर्कुलर (LOC) जारी किया गया है।

सीबीआई के अधिकारियों ने यह भी बताया कि अब इस मामले से जुड़े आरोपी देश छोड़कर बाहर नहीं जा सकते हैं क्योंकि इनके लिए नोटिस जारी कर दिया गया है। लेकिन इन दोनो ही मामलों के आपस में जुड़े होने का अंदेशा जताया जा रहा है। यह हम आप आम जनता नहीं समझती..क्योंकि सब बड़े-बड़े खेल हैं। सत्ता की नब्ज जानने वाले एक बड़े नौकरशाह ने जनज्वार को इशारों-इशारों में कहा कि इस वक्त जो न हो जाए वह कम है।

ध्यान से समझा जाए तो इस अधिकारी द्वारा कहे गये ये शब्द बड़े मायने रखते हैं। केंद्र की भाजपा सरकार ने कुर्सी मिलने से पहले यह दावा किया था कि वह सत्ता में आते ही दाऊद का गिरेबान पकड़कर उसे भारत लाएंगे। यह वादा उसी वक्त किया गया था जब देश के हर एक व्यक्ति के खाते में काला धन वापसी का 15-15 लाख रूपया देने की बात कही गई थी। लेकिन न दाऊद आया और न 15-15 लाख। दोनो ऐसे छू-मंतर हुए जैसे इस वक्त गुजरात से गधे।

गुजरात और दाऊद को लेकर लोगों का मत

क्या दाऊद आज से गलत काम कर रहा है। यब बात देश और विदेश का बच्चा-बच्चा जानता है कि दाऊद और उसका कारोबार क्या है। ईडी ने छापे भी वहीं मारे जो लोग सालों पहले दुनियां से रूखसत हो चुके हैं। हसीना पारकर और इकबाल मिर्ची जिनके यहां छापे पड़े उनकी मौत हो चुकी है। ऐसे में केंद्रीय जांच एजेंसियों ने क्या बरामद किया क्या नहीं यह तो वही जाने या फिर वो जिनके इशारे पर छापेमारी की गई।

लेकिन इन सबके बीच गुजरात में अब तक की सबसे बड़ी लूट हो गई। लगभग 23 हजार करोड़ की चपत लगा दी गई। सवाल है कि क्या ये लूट करने वाले कथित आरोपी अकेले ही यह रकम डकार गये। बेहद संदेहास्पद बात है, वह ये कि किसी को कानो कान खबर नहीं हुई। जिस देश में एक नागरिक को एक मोटरसाइकिल तक खरीदने में तमाम कागज पत्तर दिखाने पड़ते हैं, इंतजार करना पड़ता है वहां इतनी बड़ी लूट आखिर बिना मिलीभगत के कैसे संभव है। 

कल जैसे ही यह खबर आई की दाऊद के ठिकानों पर छापेमारी हो रही वैसे ही मीडिया का तमाम धड़ा लाईव-गैरलाईव दाऊद पर जा टिका। शिपयार्ड मामला जैसे हुआ ही नहीं। इतने बड़े मामले का ऑपरेशन करने की बजाए मीडिया हमेशा की तरह देश और देश की जनता को दाऊद के नाम पर गुमराह करने में जुट गई। शक की सुई वहीं से घूम जाती है। लेकिन यह हमारे आपके समझने से अधिक देश की आवाम को समझना ज्यादा पड़ेगा, कि उसकी मेहनत की कमाई कौन और कैसे लूटकर ले जाता है।

भगोड़ा दाऊद और उसकी मृतक बहन हसीना

गुजरात की इस लूट के बाद शेयर बाजार में भी मंदी दर्ज की गई। जाहिर है महंगाई बढ़ेगी। महंगाई बढ़ेगी तो सरकार नहीं भरपाई जनता करेगी। लेकिन इस बीच सरकार की मौन प्रवृत्ति सवाल को हल्का करने की बजाए गहराती है। क्योंकि जब सारे रास्ते बंद हो चुकते हैं तो दाऊद, चीन, पाकिस्तान, जिन्ना, हिजाब, हिंदू-मुस्लिम तो हैं ही जनता को बरगलाने के लिए। जिसमें सबसे अधिक छिछली भूमिका गोदी मीडिया अदा करता है।

क्या है ABG Shipyard Scam?

जांच एजेंसियों ने 7 फरवरी को एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड (ABG Shipyard Scam) और उसके पूर्व अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक ऋषि कमलेश अग्रवाल के साथ-साथ तत्कालीन कार्यकारी निदेशक संथानम मुथास्वामी, निदेशक अश्विनी कुमार, सुशील कुमार अग्रवाल और रवि विमल नेवेटिया और एक अन्य कंपनी एबीजी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ ICICI बैंक के नेतृत्व वाले बैंकों के एक समूह के साथ धोखाधड़ी करने के आरोप में मामला दर्ज किया था। ये मामला IPC and the Prevention of Corruption Act के तहत दर्ज किया गया है।

कंपनी पर आरोप है कि उसने 2012 और 2017 के बीच सिंगापुर और अन्य माध्यमों में सहायक कंपनियों के माध्यम से ऋण राशि को डायवर्ट किया। ये FIR भारतीय स्टेट बैंक की 2019 की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है, जो कंपनी को ऋणदाताओं में से एक है। बता दें कि कांग्रेस ने गुजरात के एबीजी शिपयार्ड द्वारा 22,842 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। कांग्रेस ने कहा था कि पीएम मोदी को ये बताना चाहिए कि आखिर ये धोखाधड़ी कैसे हुई और वो चुप कैसे हैं।

वहीं, इस मामले पर वित्त मंत्री ने कहा कि ABG शिपयार्ड का अकाउंट नवंबर, 2013 में ही नॉन परफार्मिंग अकाउंट (NPA) घोषित हुआ था। इस मामले में एक्शन लिए जाने की भी उन्होंने बात कही। 

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