मुस्लिमों के खिलाफ जहर उगलते सुदर्शन टीवी ने हलफनामे में किया हिंदू टेरर का जिक्र तो सुप्रीम कोर्ट बोला आपसे किसने मांगी राय?

सुदर्शन टीवी के कार्यक्रम 'बिन्दास बोल' को नियंत्रित करने के स्वरूप को लेकर हो रही सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि वह बोलने की आजादी में कटौती नहीं करना चाहता है, हालांकि बेंच ने इसे लेकर नाराजगी जाहिर किया कि सुदर्शन चैनल ने अपने हलफनामे में एक अंग्रेजी चैनल द्वारा पूर्व में हिन्दू टेरर पर किए गए कार्यक्रम का नाम लिया है....

Update: 2020-09-21 18:54 GMT

File photo

जनज्वार। नौकरशाही में मुस्लिमों की कथित घुसपैठ के सुदर्शन टीवी के कार्यक्रम को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हलफनामे में सुदर्शन टीवी की ओर से किए गए हिन्दू टेरर के जिक्र पर कोर्ट ने कहा कि आपसे किसने राय मांगी है?

सुदर्शन टीवी के कार्यक्रम 'बिन्दास बोल' को नियंत्रित करने के स्वरूप को लेकर हो रही सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि वह बोलने की आजादी में कटौती नहीं करना चाहता है।

हालांकि बेंच ने इसे लेकर नाराजगी जाहिर किया कि सुदर्शन चैनल ने अपने हलफनामे में एक अंग्रेजी चैनल द्वारा पूर्व में हिन्दू टेरर पर किए गए कार्यक्रम का नाम लिया है। न्यायालय द्वारा 'बिन्दास बोल' कार्यक्रम का हिस्सा 'यूपीएससी जिहाद' की कडियों के प्रसारण पर पहले ही प्रतिबंध लगाया जा चुका है।

सोमवार को हो रही सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ ने सुदर्शन टीवी से सवाल किया कि आपने अंग्रेजी न्यूज चैनल के कार्यक्रमों के बारे में क्यों कहा। आपसे किसने कार्यक्रम के बारे में राय मांगी थी।

इसपर चैनल के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि उनके हलफनामे में हिन्दू टेरर पर अंग्रेजी चैनल उसके कार्यक्रम का जिक्र किया गया है, क्योंकि उनसे पूछा गया था कि यूपीएससी जिहाद की कड़ियों में मुस्लिम व्यक्तियों को टोपी और हरा रंग धारण किए क्यों दिखाया गया है।

इसपर पीठ ने सवाल किया, कि क्या इसका मतलब यह है कि हर बार जब न्यायाधीश सवाल पूछेंगे तो आप अपना दृष्टिकोण बतायेंगे। न्यायाधीश तो बेहतर जानकारी प्राप्त करने लिए सवाल करते हैं।

याचिकाकर्ताओं द्वारा यह कहे जाने पर कि इन कड़ियों ने केबल टीवी निययमों के तहत कार्यक्रम संहिता का उल्लंघन किया है, शीर्ष अदालत ने मंत्रणा की कि उसके आदेश के माध्यम से किस सीमा तक अंकुश लगाया जा सकता है। पीठ ने टिप्पणी किया कि इस कार्यक्रम में विदेश से धन प्राप्त करने या आरक्षण जैसे मुद्दों पर जनहित शामिल है। अगर हम निषोधाज्ञा जारी करते हैं तो यह किस तरह का होगा, क्या यह मुकम्मल रोक होनी चाहिए। इसमें जनहित भी जुड़ा है।

Tags:    

Similar News