उत्तराखंड में आफत की बारिश: नैनीताल में राजमार्ग सहित 44 सड़कें हुई बंद, हेमकुंड यात्रा रोकी गई तो बागेश्वर में 122 ट्रेकर्स खराब मौसम में फंसे,

Uttarakhand Weather Update: उत्तराखंड में पिछले 48 घंटे से हो रही बारिश के चलते पहाड़ से लेकर मैदान तक का जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। बरसाती नदी नाले उफनाए जाने और भूस्खलन तथा मलवा आने से सैंकड़ों सड़कों का यातायात ठप्प हो गया है।

Update: 2022-10-09 17:18 GMT

उत्तराखंड में आफत की बारिश: नैनीताल जिले में राजमार्ग सहित 44 सड़कें हुई बंद, हेमकुंड यात्रा रोकी गई तो बागेश्वर में 122 ट्रेकर्स खराब मौसम में फंसे, चम्पावत जिले में कल भी स्कूल बंद

Uttarakhand Weather Update: उत्तराखंड में पिछले 48 घंटे से हो रही बारिश के चलते पहाड़ से लेकर मैदान तक का जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। बरसाती नदी नाले उफनाए जाने और भूस्खलन तथा मलवा आने से सैंकड़ों सड़कों का यातायात ठप्प हो गया है। अकेले नैनीताल जिले की 44 सड़कें बंद हो चुकी हैं। जबकि जिले के सुदूर क्षेत्रों में हुए नुकसान की खबर अभी आनी बाकी है। भारी बारिश के चलते हेमकुंड यात्रा को भी प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से रोक दिया है जबकि बागेश्वर जिले में ट्रेकिंग पर गए 122 ट्रेकर्स के खराब मौसम में फंसे होने से प्रशासन के हाथ पांव फूले हुए हैं। उधर केदारनाथ ट्रेकिंग रूट पर भी कुछ ट्रेकर्स फंसे होने की खबर है। बरसात की वजह से हजारों एकड़ फसल खराब होने का अंदेशा है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने बारिश से हुई खराब फसलों का आकलन कर किसानों को मुआवजा जल्दी दिए जाने की मांग की है। बारिश के कहर को देखते हुए चम्पावत जिले में कल सोमवार को भी स्कूल बंद रखने के आदेश जिलाधिकारी द्वारा जारी किए जा चुके हैं।


उत्तराखंड में पिछले 48 घंटे से लगातार मूसलाधार बरसात जारी है। जिस वजह से कुमाउं व गढ़वाल के सभी 11 पर्वतीय जिलों के इलाकों में भूस्खलन की वजह से सैंकड़ों की संख्या में रास्ते बंद हुए हैं। नैनीताल जिले में भी बारिश का खासा असर देखने को मिला है। जहां पिछले 48 घंटे से हो रही रिकॉर्ड बरसात की वजह से नैनीताल जिले में आपदा प्रबंधन विभाग के नए अपडेट में बंद सड़कों की संख्या 29 से बढ़कर 44 हो गई है। यह सड़के बंद होने की वजह से जिले भर का आवागमन प्रभावित हुआ है।

नैनीताल में बंद सड़कों की संख्या 29 से हुई 44

जिला आपदा प्रबंधन द्वारा जारी सूचना में जिले की स्थिति का ताजा ब्यौरा 9 अक्तूबर शाम चार बजे के बुलेटिन में जारी किया गया है, उसके अनुसार जिले में कई राजमार्गों सहित 44 सड़कें भूस्खलन और मलवा आने की वजह से बंद पड़ी हैं। सुबह के बुलेटिन में इन बंद सड़कों की संख्या 29 थी। प्रशासन की ओर से कुछ सड़कों को कल तो बाकी को परसों तक खोलने का दावा किया जा रहा है। लेकिन यदि बारिश का जो सिलसिला खबर भेजते समय है, वहीं आगे भी जारी रहा तो बंद सड़कों को खोलने में लगने वाले वक्त की सीमा निश्चित तौर पर बढ़ेगी। हल्द्वानी अल्मोड़ा राजमार्ग पर तो मलवा हटाने के लिए खुद पुलिस कर्मचारियों को सड़क पर उतरना पड़ा है।



भारी बरसात से पहाड़ियों पर हिमपात हुआ शुरू

उत्तराखंड की ऊंची चोटियों पर बर्फबारी का दौर शुरू हो गया है। चमोली में बीते कई दिनों से मौसम खराब बना हुआ है। वहीं हेमकुंड साहिब और बदरीनाथ धाम में चोटियों में बर्फबारी हो रही है। रविवार को भी हेमकुंड और बदरीनाथ, केदारनाथ और कुमाऊं के मुनस्यारी व बागेश्वर जिले की तमाम ऊंचाई वाली चोटियों पर जमकर हिमपात हुआ है। जिससे तराई और भावर में ठंड का इजाफा हुआ है। हेमकुंड साहिब में करीब एक इंच से अधिक ताजा बर्फ जम गई है। उच्च हिमालय में दूसरे दिन भी हिमपात जारी है। बीते शुक्रवार रात को गंगोत्री व यमुनोत्री धाम की पहाड़ियों पर इस सीजन का पहला हिमपात हुआ। वहीं दोनों धामों में रुक-रुककर बारिश का सिलसिला जारी है। गंगोत्री धाम के तीर्थपुरोहित राजेश सेमवाल ने बताया कि गंगोत्री धाम में शुक्रवार रात से ही बारिश हो रही है जिससे धाम से लगी पहाड़ियों पर बर्फबारी हुआ है। बारिश व बर्फबारी से गंगोत्री धाम के तापमान में गिरावट आई है। यमुनोत्री धाम में भी गत शुक्रवार रात बारिश और धाम से लगी पहाड़ियों पर हिमपात हुआ। पिथौरागढ़ जिले में गुंजी से कुटी और आदि कैलास मार्ग भारी हिमपात से बंद है। नावीढांग में ढाई फीट तो कुटी ज्योलिंगकोंग में तीन फीट हिमपात हुआ है। गुंजी, नाबी, रोंगकोंग सहित अन्य स्थानों पर हिमपात जारी है। मुनस्यारी के रालम, मिलम सहित उच्च हिमालयी गांवों में हिमपात जारी है।


हेमकुंड यात्रा को सुरक्षा के लिहाज से घांघरिया में रोका

हेमकुंड साहिब में भारी बर्फबारी के चलते सुरक्षा की दृष्टि से हेमकुंड यात्रा को रोक दिया गया है। घांघरिया में लगभग ढाई सौ तीर्थयात्री रोके गए हैं। भारी बर्फबारी के चलते हेमकुंड साहिब की यात्रा को रोक दिया गया है। घांघरिया में तैनात एसआई नरेंद्र कोठियाल ने बताया कि हेमकुंड साहिब में भारी बर्फबारी के चलते सुरक्षा की दृष्टि से यात्रा को रोका गया है। घांघरिया में लगभग ढाई सौ तीर्थयात्री रोके गए हैं। मौसम खुलने के बाद ही यात्रा को शुरू किया जाएगा। लेकिन इसकी संभावना इसलिए कम हैं, क्योंकि हेमकुंड यात्रा कल दस अक्टूबर को समाप्त हो रही है। जानकारी के अनुसार हेमकुंड साहिब के कपाट 10 अक्तूबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे, जिसको लेकर हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट ने तैयारी शुरू कर दी है। लगातार मौसम खराब होने से केदारनाथ व हेमकुंड साहिब में और बदरीनाथ की ऊंची चोटियों में भी बर्फबारी हुई। हेमकुंड में करीब ढाई इंच तक बर्फ जम गई है।

बागेश्वर के खराब मौसम की चपेट में फंसे 122 ट्रेकर्स

बागेश्वर के उच्च हिमालय क्षेत्र में ट्रैकिंग पर गये 122 लोग मौसम खराब होने से फंस गये हैं। राहत की बात यह है कि सभी ट्रैकर्स सुरक्षित हैं। लेकिन प्रशासन उनकी सुरक्षा को लेकर फिक्रमंद है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शिखा सुयाल ने बताया कि पंजीकरण करके गए सभी टैकर्स सुरक्षित जगहों पर रुके हुए हैं। वहां गये लोगों से सैटेलाइट फोन से संपर्क हो चुका है। बारिश रूकने के बाद सभी वापस आ जायेंगे। कुछ ट्रैकिंग दलों से सेटेलाइट फोन के माध्यम से संपर्क हो रहा है। उन्होंने बताया गया कि कुल 159 ट्रैकर्स गये थे जिनमें से 51 ट्रैकर्स वापस आ गए हैं। उधर पिंडारी जीरो प्वाइंट पर 15 ट्रैकर्स के होने की जानकारी है। जो वहाँ सन्यासी बाबा की कुटिया में रूके हैं। कठलिया में छह और खाती में 71 ट्रैकर्स रुके हैं। इसके अलावा तो में 16 ट्रैकर्स रुके हुए हैं। सभी ट्रैकर्स सुरक्षित हैं और बारिश के रूकने तथा मौसम सही होने का इंतजार कर रहे हैं। केदारनाथ रूट पर भी कुछ ट्रेकर्स के खराब मौसम में फंसे होने की सूचना है।



कुमाउं के तीन जिलों में सोमवार को स्कूल बंद रखने के आदेश

मौसम विज्ञान विभाग के 10 अक्टूबर सोमवार को भी कहीं-कहीं भारी बारिश का अलर्ट मिलने के बाद खबर भेजे जाने तक कुमाउं के तीन जिलों में स्कूल कॉलेज बंद रखने के आदेश जारी हो चुके हैं। सोमवार को चम्पावत जिले के सभी शासकीय, अशासकीय विद्यालयों में कक्षा 1 से कक्षा 12 तक संचालित समस्त शैक्षणिक संस्थाओं एवं समस्त आंगनबाड़ी केन्द्रों में एक दिवसीय अवकाश घोषित किये जाने के आदेश जिलाधिकारी चम्पावत नरेन्द्र सिंह भंडारी ने जारी कर दिए हैं। जिलाधिकारी ने मुख्य शिक्षा अधिकारी चम्पावत को सभी विद्यालयों में तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास, चम्पावत को समस्त ऑगनबाड़ी केन्द्रों में आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करवाने के निर्देश दिए हैं। तो भारी बारिश को देखते हुए अल्मोड़ा जिले के स्कूलों में भी कल सोमवार को अवकाश घोषित किया गया है। यहां अपर जिलाधिकारी/प्रभारी जिलाधिकारी सीएस मर्तोलिया ने बताया कि बारिश की संभावना को देखते हुए सोमवार 10 अक्टूबर को कक्षा 1 से 12 तक के सभी शासकीय व अशासकीय विद्यालयों के साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया है। नैनीताल जिले में भी लगातार जारी बारिश के मद्देनजर जनपद के शासकीय, अर्द्धशासकीय, निजी विद्यालय व आगनवाड़ी केंद्र में 10 अक्टूबर सोमवार का अवकाश रहेगा। जिला मजिस्ट्रेट धीरज सिंह गर्ब्याल ने सभी शासकीय, अर्द्धशासकीय एवं निजी विद्यालयों में (कक्षा 01 से 12 तक संचालित समस्त शैक्षणिक संस्थाओं) एवं आंगनबाड़ी केन्द्र को बंद रखने तथा प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक, समस्त शैक्षणिक एवं मिनिस्ट्रियल एवं अन्य कार्मिक निर्धारित समयानुसार अपने-अपने विद्यालयों, कार्यालयों में उपस्थित रहने के आदेश दिए है।

यशपाल आर्य ने किसानों को मुआवजा दिए जाने की मांग की

उत्तराखंड के नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने राज्य में बारिश से किसानो की फसल बर्बाद होने पर चिंता व्यक्त करते हुए किसानों को तत्काल मुआवजे की मांग की है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल ने कहा कि भरी बरसात की वजह से किसानों के खेतों में पानी भर गया है जिससे खेतों में खड़ी फसल खराब हो गई है। ऐसे में किसानों के सामने उसकी रोजी-रोटी का संकट खड़ा गया है। जहां कल तक किसानों की फसल लहरा रही थी वहां अब बारिश का पानी खेतों में लबालब भरा हुआ नजर आ रहा है। कुछ किसानों ने अपनी फसल काटकर खलिहान में रख थी तो कुछ किसान अपनी फसल काटने की तैयारी कर रही थे। त्यौहार आने की खुशी में किसान जल्द से जल्द अपनी खेती किसानी का काम निपटाने की सोच रहे थे लेकिन बारिश ने किसानों के इस पूरी उम्मीद पर पानी फेर दिया किसानों की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। इस बारिश की वजह से उत्तराखंड के किसानों के सामने आर्थिक संकट आ गया है। उनको भविष्य की चिंता सताने लगी है। इसलिए सरकार जल्द खराब फसलों का सर्वे करवाकर किसानों के लिए मुआवजे की घोषणा करे।

48 घंटे से हो रही लगातार मूसलाधार बरसात से अभी निजात नहीं

उत्तराखंड में पिछले 48 घंटे से लगातार मूसलाधार बरसात की वजह से आम जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। सड़कें बंद होने से लोग परेशान हैं तो पहाड़ी और मैदानी काश्तकारों के लिए बुरी खबर यह है कि तमाम फसलें इस बरसात की वजह से चौपट हो गई हैं। मैदान में जहां खेतों में पकी हुई धान तथा अन्य फसलें लगातार बरसात से संकट में हैं तो वहीं पहाड़ी इलाकों की फसलों पर भी इस बरसात ने बुरा प्रभाव डाला है। राज्य के मौसम विभाग ने अगले पांच दिनों के मौसम जो नया अपडेट जारी किया है, उसके अनुसार अभी प्रदेश में कम से मंगलवार तक बारिश को लेकर खतरा बना हुआ है।

नदियों का जलस्तर खतरे तक पहुंचने की कगार पर

उत्तराखंड में भारी बरसात की वजह से नदियों व बरसाती नालों में भी जल स्तर लगातार बढ़ रहा है। कोसी नदी का जलस्तर चेतावनी के स्तर को पार कर गया है। नदियों के पानी डिस्चार्ज के मिले ब्यौरे के अनुसार गौला नदी में 17064 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है। जबकि कोसी बैराज से 12983 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है। नंधौर नदी से भी 4635 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है। बता दें कि कोसी नदी का चेतावनी डिस्चार्ज लेबल दस हजार क्यूसेक है। जबकि वहां से 12983 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा है।

Tags:    

Similar News