जनज्वार से जुड़े रहे पत्रकार किशोर राम कोर्ट से दोषमुक्त, बोले 'सिस्टम की इस यंत्रणा से निकल गया हूं यही काफी, दलित होने की सजा भुगती है मैंने'

एक फर्जी मुकदमे ने मेरा जीवन-कैरियर सब तबाह कर दिया, शासन-प्रशासन को एक दलित पत्रकार आंखों में गड़ रहा था, जिसकी सजा मैं भुगत चुका हूं....

Update: 2026-01-31 15:48 GMT

पत्रकार किशोर राम कोर्ट से दोषमुक्त

Dalit Journalist Kishore Ram Acquitted : 'पिछले 4 सालों से केस-मुकदमे के न खत्म होने वाले दौर से मैं थक गया हूं, आज जब कोर्ट ने निर्दोष घोषित किया है तो लग रहा है इससे बाहर निकल गया हूं यही काफी है। पहले महीने भर से ज्यादा की जेल और उसके बाद पुलिस, समाज और आर्थिक चुनौतियों से जूझते हुए अब मुझे सिस्टम से कोई उम्मीद नहीं है, बस चाहता हूं शांति से जीवन बिताऊं। एक फर्जी मुकदमे ने मेरा जीवन-कैरियर सब तबाह कर दिया। शासन-प्रशासन को एक दलित पत्रकार आंखों में गड़ रहा था, जिसकी सजा मैं भुगत चुका हूं। केस-मुकदमे में फंसने के दौरान सोचा कि प्रोफेशन बदलकर सरकारी नौकरी की तैयारी करूं, ताकि जीवन थोड़ा स्थिर हो, मगर इस केस के चक्कर में मैं यह भी नहीं कर पाया, क्योंकि हर जगह चरित्र प्रमाणपत्र चाहिए होता है।'

ये शब्द हैं उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़ मूल के दलित पत्रकार रहे किशोर राम के। जनज्वार से जुड़े रहे किशोर को आज 31 जनवरी को ही कोर्ट ने चार साल पुराने एक मामले में निर्दोष करार दिया है, मगर वो अब सिस्टम से पूरी तरह निराश हो चुके हैं और पत्रकारिता छोड़कर गुजर-बसर करने के लिए कुछ और काम-धंधा करते हैं।

स्थानीय न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में किशोर राम को उनके विरुद्ध चल रहे आपराधिक मामले में साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त (Acquitted) कर दिया है। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह निर्णय आज शनिवार 31 जनवरी को सुनाया।

गौरतलब है कि फौजदारी वाद संख्या 977/2024 (राज्य बनाम किशोर राम) की सुनवाई सिविल जज (सी०डि०)/न्यायिक मजिस्ट्रेट, पिथौरागढ़ की अदालत में चल रही थी। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक अभियोजन अधिकारी रितेश वर्मा ने पैरवी की, जबकि अभियुक्त किशोर राम की ओर से अधिवक्ता प्रदीप पाठक ने न्यायालय के समक्ष मजबूती से अपना पक्ष रखा।

28 जनवरी 2026 को न्यायालय में इस मामले की अंतिम बहस हुई थी। बचाव पक्ष में किशोर राम के अधिवक्ता प्रदीप पाठक ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल के विरुद्ध लगाए गए आरोप निराधार हैं और अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहा है। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की गहन बहस सुनने के बाद, विद्वान न्यायाधीश आरती सरोहा (सिविल जज/न्यायिक मजिस्ट्रेट) ने शनिवार, 31 जनवरी 2026 को अपना निर्णय सुनाया। न्यायालय ने किशोर राम को सभी आरोपों से बरी करते हुए दोषमुक्त घोषित कर दिया।

गौरतलब है कि चार साल पहले 24 फरवरी 2022 को पिथौरागढ़ पुलिस ने किशोर राम को भारतीय दंड संहिता की धारा 153 ए के तहत दो समुदायों के बीच वैमनस्य भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया था और सीजीएम कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया। पुलिस ने आरोप लगाया कि पत्रकार किशोर राम ने वेब पोर्टल जनज्वार के लिए की गई अपनी दो वीडियो रिपोर्ट्स में बार-बार अनुसूचित जाति शब्द का इस्तेमाल कर समुदायों के बीच वैमनस्यता फैलाने का प्रयास किया है।

पुलिस ने जनज्वार के सोशल मीडिया पर पब्लिश जिन वीडियोज के आधार पर पत्रकार किशोर राम के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया, वो दोनों अलग-अलग मामले हैं। एक मामला दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले युवक की हत्या का तो दूसरा दलित लड़की के साथ कथित तौर पर रेप का मामला। पहले इन दोनों मामलों को जानते हैं। पहला- 13 फरवरी को पिथौरागढ़ के डीडीहाट ब्लॉक के गांव तल्ली भैसोढ़ी में दलित युवक रामी राम की हत्या को लेकर किशोर राम उसी गांव के लोगों और मृतक के रिश्तेदारों से बात करने और घटना के बारे में जानकारी लेने के लिए पहुंचे थे। इस दौरान गांव के लोगों और उनके रिश्तेदारों ने घटना के बारे में पूरी कहानी बताई थी।

परिजनों ने आरोप लगाया था कि 13 फरवरी को रामी राम को राजेंद्र सिंह देउपा ने फोन करके बुलाया था। रिश्तेदारों ने गोकुल सिंह देउपा पर रामी राम की हत्या का आरोप लगाया था। उनके मुताबिक रामी राम की पत्थरों से कुचलकर हत्या की गई थी। इस दौरान रामी राम की पत्नी ने भी आरोप लगाया था कि उनका पति कांग्रेस का समर्थक था इसलिए भाजपा से जुड़े लोगों ने उसे मौत के घाट उतार दिया, जबकि दूसरा वीडियो एक नाबालिग दलित बेटी के साथ दुष्कर्म से जुड़ा था। किशोर राम ने इस मामले में भी पीड़ित परिवार का पक्ष जानने की कोशिश की थी। इस दौरान लड़की के पिता ने बताया था कि यह घटना 18 जनवरी की रात की है। जिसमें दो लड़के गौरव बिष्ट और किशन नाम डीजे वाले के साथ गए थे, जिन्होंने मेरी मेरी दो नाबालिग बेटियों को कार में घुमाने के बहाने अपने चंगुल में फंसाया। इसके बाद पूरी रात इन्होंने हवस का शिकार बनाकर टनकपुर-पिथौरागढ़ हाईवे पर छोड़ दिया। रात के पता नहीं कितने बजे रहे होंगे। उसके बाद एक ट्रक ड्राइवर ने हमारी बेटियों को तप्पड़ नामक जगह पर छोड़ा। फिर उसके मोबाइल से फोन कर मेरे घर को जानकारी दी गई। उसके बाद मैंने प्रशासन के लिए कार्रवाई के लिए कहा तो प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की। अभी मैं स्वयं यहां आया हूं तो मेरे साथ भी ऐसे व्यवहार किया जाता है कि जैसे मैंने कोई जुर्म किया हो।

इस मामले में एफआईआर पर किशोर ने तब कहा था, 'मुझे 16 तारीख को डीएम साहब ने मुझे आश्वासन दिया था कि तहसीलदार साहब के पास जाओ, लेकिन तहसीलदार साहब मुझे बिना बताए एसडीएम साहब के पास लेकर गए। उनके साथ वार्तालाप हुई तो वो मेरे साथ ऐसे पेश हुए जैसे मैं कोई आरोपी हूं। मेरे से इस तरह का सवाल जवाब कर रहे हैं कि जो तुमने जो बलात्कार का आरोप लगा रखा है पुष्टि नहीं होगी तो जेल जाना पड़ेगा। लड़के की ओर से भी दबाव बनाया जा रहा है। लड़की के पिता ने यह भी चेतावनी दी थी कि इस मामले में अगर कार्रवाई नहीं होती है तो मैं डीएम कार्यालय के सामने आत्महत्या करूंगा।'

किशोर राम पिथौरागढ़ के झूलाघाट के रहने वाले हैं। बीते कुछ वर्षों से वह 'जनज्वार' के लिए रिपोर्टिंग कर रहे थे। किशोर दलित, आदिवासी, पिछड़ों और गरीबों के मुद्दों पर केंद्रित रिपोर्टिंग करते रहे। अंबेडकर छात्रावासों की स्थिति, दलित भोजन माता प्रकरण के अलावा किशोर ने जमीनी मुद्दों को अपनी रिपोर्टिंग के जरिए उठाया था, जो चर्चा का विषय भी बने।

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