बीजेपी ने पीडीपी से समर्थन लिया वापस, महबूबा सरकार अल्पमत में

Update: 2018-06-19 09:20 GMT

अतिवाद की राजनीति करने वाली दो पार्टियों के बीच आखिरकार आज तलाक हो ही गया, वैसे भी लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, मोदी जी की पार्टी को दंगों का सहारा फिर मुसलमानों की पार्टी से एकता अब कैसी...

जनज्वार, दिल्ली। इसे कहते हैं सौ चूहे खाके बिल्ली चली हज को। भाजपा महासचिव और कश्मीर के प्रभारी राम माधव ने मेहबूबा सरकार से समर्थन वापसी की घोषणा करते हुए कहा कि हम देशहित और भारत की सुरक्षा के मद्देनजर पीडीपी सरकार से समर्थन वापस ले रहे हैं।

राम माधव ने बताया कि भाजपा ने समर्थन वापसी का पत्र राज्यपाल को सौंप दिया है और सिफारिश की है कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए। महबूबा मुफ्ती ने अपना इस्तीफा सौंप दिया है और वह शाम 4 बजे राज्यपाल से मिलेंगी ।

जेएनयू की पूर्व छात्र नेता शेहला रशीद कश्मीर की रहने वाली हैं और उन्होंने गठबंधन की टूट पर कुछ इस तरह प्रतिक्रिया दी है



राम माधव ने सरकार से समर्थन वापसी पर कहा कि केंद्र सरकार घाटी के लिए सबकुछ करना चाहती है, लेकिन महबूबा सरकर ने अपने किए वादे पूरे नहीं किए। हमारे नेताओं ने जम्मू और लद्दाख के विकास को लेकर बहुत मुश्किल झेली हैं।हमने जो पीडीपी से गठबंधन किया था, उसका सिर्फ एक ही कारण था लोगों के वोट का सम्मान। अगर हम सरकार नहीं मिलकर बनाते तो उस समय राष्ट्रपति शासन लागू होता।

पर इन कारणों से इतर जो कारण साफ दिख रहे हैं वह लोकसभा चुनावों के मद्देनजर भाजपा को हर ​कीमत पर हिंदूवादी पार्टी साबित करना और वह पीडीपी जैसी मुस्लिम बहुसंख्या वाली पाटी में रहते संभव नहीं था।

वहीं कांग्रेस ने इस टूट पर खुशी जताई है और कहा कि हमें अच्छा लगा कि भाजपा को अपनी गलती का अहसास हो गया है।

हालांकि इस मामले में पीडीपी के प्रवक्ता का कहना कि इस मामले में उनकी पार्टी बिलकुल अनभिज्ञ है। समर्थन वापसी जिस तरह से बीजेपी ने किया है, वह रहस्यपूर्ण है।



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