भाजपा-आरएसएस नेताओं ने आला अधिकारियों की मौजूदगी में उड़ाया धारा 144 का मखौल

Update: 2019-12-28 06:19 GMT

यह सही है कि आरएसएस-बीजेपी कार्यकर्ताओं के दवाब के चलते बिछोर गांव के बघेल समाज के लोगों की 25 वर्षों की श्मशान की समस्या चंद घंटे में हल हो गई, मगर पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में इन्होंने खुलेआम उड़ाया धारा 144 का मखौल...

जनज्वार, नूह। हरियाणा के नूह जनपद में बड़े गांवों में शामिल बिछोर गांव में बघेल समाज के श्मशान घाट में तालाब का पानी भरा हुआ है। पानी भी दो-चार फुट गहरा नहीं, बल्कि दस-दस फुट गहरा। बघेल समाज के लोगों को यह समस्या कोई नई पैदा नहीं हुई है, पिछले करीब 25 साल से श्मशान में पानी भरा हुआ है। कुछ साल तो बची हुई जमीन में दाह संस्कार होता रहा, लेकिन अब सभी भूमि पर पानी का कब्ज़ा हो चुका है, जिसकी वजह से दाह संस्कार नहीं हो पा रहा है।

न्य समाज के गांव में श्मशान तो हैं, लेकिन बघेल समाज के लोग अपने ही श्मशान में शव का अंतिम संस्कार करने की मांग पर अड़ते हुए शुक्रवार 27 दिसंबर को एक शव को ट्रैक्टर-ट्राली में रखकर पूरी सामग्री के साथ लेकर लघु सचिवालय पुन्हाना परिसर में पहुँच गए और एसडीएम कार्यालय के पोर्च में शव को रखकर महिलाओं सहित लोग बैठ गए।

स बात का पता चलने पर बीजेपी-आरएसएस नेताओं का जमावड़ा लगने लगा तो प्रशासन के भी तमाम अधिकारी एक के बाद एक करके लघु सचिवालय में जुटने लगे। एसडीएम, डीएसपी, तहसीलदार, बीडीपीओ, एसएचओ पुन्हाना, सिटी चौकी इंचार्ज सहित सब अधिकारी आरएसएस से जुड़े लोगों को समझाकर मामले को शांत करने में जुट गए।

बिछोर गांव के लोगों की कमान संघ के लोगों ने थाम ली। कई घंटे तक मान-मनौव्वल का दौर चलता रहा। बीजेपी-संघ नेताओं के दवाब में आख़िरकार प्रशासन के अधिकारियों को आना पड़ा। बिछोर गांव के तालाब पंचायत से पट्टे पर लेकर मछली पालन करने वाले ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज कराने तथा तुरंत पानी में मिट्टी डालकर जमीन करने की शर्त पर आरएसएस और बिछोर के लोग माने।

खास बात तो यह है कि मछली पालन करने वाले ठेकेदार ने मामले में कोर्ट से स्टे लिया हुआ है, साथ ही जिला प्रशासन ने धारा 144 लगाई हुई है। उसके बावजूद भी आरएसएस-भाजपा कार्यकर्ता और प्रदर्शन करने वाले बिछोर गांव के लोग सैकड़ों की संखय में खूब नारेबाजी करते रहे। पुलिस और अधिकारी किसी मूकदर्शक की तरह महज देखते भर रहे।

पुन्हाना में इसी गांव के लोग दो बार महज दो माह में ऐसा चुके हैं। जमीन को समतल नहीं करने वाले अधिकारियों की लापरवाही के साथ-साथ धारा 144 का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तो कोई क़ानूनी कार्रवाई करने के बजाय आला अधिकारी बगले झांकते रहे, लेकिन ठेकेदार पर सारा ठीकरा फोड़कर मामले को शांत करने की कोशिश की। भले ही जिला प्रशासन ने मामला शांत करने के लिए ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करने का फैसला लिया हो, लेकिन कोर्ट को मिली स्टे से विवाद का अंत जल्दी होता दिखाई नहीं दे रहा।

गौरतलब है कि पिछले 20-25 वर्षों में बिछोर गांव में हिन्दू-मुस्लिम सरपंच लगभग बराबर रहे हैं, परन्तु समस्या का समाधान न तो ग्राम पंचायत से हुआ और न ही जिला प्रशासन से। बिछोर गांव के लोग सचिवालय में डेरा जमाकर बैठे तो मनरेगा से तुरंत मिट्टी डालने की तालाब में अनुमति मिल गई और काम भी हाथोंहाथ शुरू हो गया।

दो माह पहले जब बिछोर गांव के लोग पहली बार शव लेकर पुन्हाना पहुंचे थे, अगर तभी जिला प्रशासन ने गंभीरता दिखाई होती तो शायद ये बखेड़ा दोबारा खड़ा नहीं होता।

ताया जाता है कि बघेल समाज आधा एकड़ भूमि श्मशान घाट के लिए बिछोर गांव में है, जिसमें साथ में मछली पालन के लिए तालाब है। ग्राम पंचायत इसे पट्टे पर आमदनी के लिए छोड़ती है। बघेल समाज सहित लोगों का आरोप है कि मछली पालन करने वाला ठेकेदार तालाब में ज्यादा पानी भरता है, जिससे उनकी श्मशान की भूमि ने भी तालाब का रूप ले लिया है।

बीडीपीओ उपमा अरोड़ा ने कहा कि मिटटी डलवाने का काम शुरू हो गया है, फ़िलहाल कुछ जगह में मिट्टी डलवाकर शव का अंतिम संस्कार किया जायेगा। मछली पालन करने वाले ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी, अगले एक माह में सभी श्मशान की भूमि में मिट्टी डलवाकर जगह को समतल कराया जायेगा।

हीं डीएसपी अशोक कुमार ने कहा कि जिन भी लोगों की श्मशान घाट में पानी भरने के हालात के पीछे लापरवाही रही है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कुल मिलाकर धारा 144 का शुक्रवार को अधिकारियों की मौजूदगी में खूब मखौल उड़ता दिखाई दिया। आरएसएस-बीजेपी कार्यकर्ताओं के दवाब के चलते बिछोर गांव के बघेल समाज के लोगों की 25 वर्षों की समस्या चंद घंटे में हल हो गई।

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