लॉकडाउन में बच्‍चों के खिलाफ बढ़े हिंसा और उत्पीड़न के मामले, सुप्रीम कोर्ट से गुहार

Update: 2020-04-12 15:34 GMT

रजू अनेजा और सुमीर सोढ़ी नाम की दो वकीलों ने सीजेआई एस.ए. बोबड़े से बाल उत्पीड़ने के बढ़ते मामलों का संज्ञान लेने की गुहार लगाई है, उन्‍होंने कहा है कि लॉकडाउन में ओवरऑल क्राइम रेट तो कम हुआ है मगर बच्‍चों से बदसलूकी और हिंसा के मामले बढ़ गए हैं...

जे.पी.सिंह की रिपोर्ट

जनज्वार। देश में कोरोना संकट के कारण 21 दिनों का देशव्यापी लॉकडाउन चल रहा है जिसमें पोड़ोफाईलस जमकर बच्चों का यौन उत्पीडन कर रहे हैं। ये हम नहीं कह रहे हैं बल्कि चाइल्डलाइन इंडिया हेल्पलाइन की रिपोर्ट कह रही है। रिपोर्ट के मुताबिक 20 से 31 मार्च के बीच ‘चाइल्डलाइन 1098’ पर कुल 3.07 लाख कॉल्स आए। इनमें से 30 फीसदी यानी 92 हजार कॉल बच्चों के उत्पीड़न और हिंसा से जुड़ी थीं।

कॉल करने वालों ने बच्चों को हिंसा और उत्पीड़न से सुरक्षा दिलाने की गुहार लगाई। यानी कोरोना वायरस लॉकडाउन की वजह से चाइल्‍ड अब्‍यूज के मामले बढ़े हैं। आरजू अनेजा और सुमीर सोढ़ी नाम की दो वकीलों ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) एस.ए. बोबड़े से मामले का संज्ञान लेने की गुहार लगाई है। उन्‍होंने कहा है कि लॉकडाउन में ओवरऑल क्राइम रेट तो कम हुआ है मगर बच्‍चों से बदसलूकी और हिंसा के मामले बढ़ गए हैं।

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कीलों ने अपने पत्र में कहा है कि नॉर्मल हालात में सताए गए बच्‍चों का घर में रहना सेफ नहीं समझा जाता क्‍योंकि हो सकता है कि घरवाले और परेशान करें। लॉकडाउन में इन बच्‍चों की समस्‍या बढ़ गई क्‍योंकि वे घरों से निकल ही नहीं सकते। आइसोलेशन की वजह से सपोर्ट नेटवर्क्‍स ढह गए हैं। जिसके चलते विक्टिम्‍स के भाग पाना या मदद मांग पाना मुश्किल हो रहा है। उन्‍होंने कहा कि अगर चाइल्‍ड एब्‍यूज के विक्टिम्‍स का साथ देने और उन्‍हें सेफ रखने के लिए जल्‍द कदम नहीं उठाए गए तो लॉकडाउन में मामले बढ़ते रहेंगे।

पनी पत्र याचिका में दोनों वकीलों ने उच्चतम न्यायालय से इस सम्बंध में जल्‍द गाइडलाइंस बनाने की मांग की है। उनकी मांग है कि बच्‍चों को काउंसलिंग मुहैया कराई जाए। चाइल्‍ड वेलफेयर के लिए काम करने वाले एनजीओ/संस्‍थाओं को मोबलाइज करने की जरूरत है। वकीलों ने अपनी याचिका में मीडिया में छपी ख़बरों को आधार बनाया। इसके अलावा उन्‍होंने कहा कि चाइल्ड लाइन हेल्‍पलाइन को लॉकडाउन के दौरान पिछले कुछ दिनों में 92 हजार से ज्‍यादा कॉल्‍स आई हैं। 24 मार्च 2020 के बाद से कॉल्‍स की संख्‍या में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

कीलों के मुताबिक, ऐसे मामलों के रिपोर्ट होने में बढोतरी और जो रिपोर्ट नहीं होते वो मामले सिर्फ भारत तक सीमित नहीं हैं, पूरी दुनिया में ऐसा हो रहा है। लेटर में कहा गया कि चाइल्‍ड एब्‍यूज सीधे-सीधे जीवन के मूल अधिकार का उल्‍लंघन है। वकीलों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा था कि भारत में COVID-19 का मामला गंभीर होता जा रहा है, ऐसे में वायरस को चाइल्‍ड केयर इंस्‍टीट्यूशंस तक पहुंचने से रोका जाए।

त्र में वकीलों ने कहा कि लॉकडाउन के वक्‍त बच्‍चों को बुरे बर्ताव से बचाने के लिए सरकार ने कोई गाइडलाइन नहीं बनाई। ना ही इस दिशा में कोई सकारात्मक कदम उठाया गया है। उन्‍होंने कहा कि COVID-19 महामारी हमारे समय की सबसे बड़ी चुनौती है और भारत में इसका प्रकोप फैलता जा रहा है, चांसेज हैं कि लॉकडाउन बढ़ाया जाएगा।

स बीच चाइल्डलाइन इंडिया हेल्पलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक 20 से 31 मार्च के बीच ‘चाइल्डलाइन 1098’ पर कुल 3.07 लाख कॉल्स आए। इनमें से 30 फीसदी यानी 92 हजार कॉल बच्चों के उत्पीड़न और हिंसा से जुड़ी थीं। कॉल करने वालों ने बच्चों को हिंसा और उत्पीड़न से सुरक्षा दिलाने की गुहार लगाई। चाइल्डलाइन इंडिया की उपनिदेशक हरलीन वालिया ने बताया कि यह रिपोर्ट चिंताजनक है। मंगलवार को जिलों की बाल बचाव इकाइयों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में इस रिपोर्ट को शेयर किया गया। कॉन्फ्रेंस में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

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लॉकडाउन के दौरान महिलाओं के खिलाफ भी हिंसा में 40 से 50 % की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। राष्ट्रीय महिला आयोग को मिलने वाली शिकायतें इस बीच बढ़कर दोगुनी हो गई हैं। हरलीन वालिया बताती हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च को राष्ट्र को संबोधन दिया। अगले दिन से लॉकडाउन हो गया। इसके बाद से फोन कॉल 50% तक बढ़ गए। आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने हाल ही में कहा था कि घरेलू हिंसा काफी चिंताजनक है। इसके लिए सामाजिक सुधार की जरूरत है।

वालिया के अनुसार बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य के संबंध में 11 फीसदी कॉल आईं। बाल श्रम के संबंध में आठ फीसदी, लापता और घर से भागे बच्चों के संबंध में आठ फीसदी और बेघर बच्चों के बारे में 5 फीसदी कॉल आईं। इसके अलावा हेल्पलाइन को 1,677 कॉल ऐसी मिलीं जिनमें कोरोना वायरस के संबंध में सवाल किए गए और 237 कॉल में बीमार लोगों के लिए सहायता मांगी गई।

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