कानपुर पुलिस ने गिरफ्तार 5 लोगों को बताया PFI का सदस्य, कहा योगी की यात्रा में डालना चाहते थे खलल

Update: 2020-01-31 12:16 GMT

कानपुर पुलिस ने कहा CAA बिल को लेकर शहर में बनी थी जो दंगे की स्थिति और उसमें 3 लोगों की मौत के साथ कई पुलिसकर्मी व मीडियाकर्मी घायल हुए थे, उसके पीछे था PFI का हाथ, इन पांचों के अलावा PFI के कई और लोगों को किया जायेगा गिरफ्तार...

कानपुर से मनीष दुबे

जनज्वार। कानपुर के बाबूपुरवा से पुलिस ने आज 31 जनवरी को 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि ये पांचों PFI के सदस्य हैं।

सके अलावा यूपी पुलिस ने लखनऊ से भी 3 लोगों को CAA-NRC के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया है और इन्हें भी पुलिस पीएफआई का सदस्य बता रही है। यूपी पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार पीएफआई सदस्यों के नाम शकीलुर्रहमान, शबी खान और अरशद हैं। आरोपी लखनऊ में रहकर पीएफआई के लिए काम करते हैं ओर लखनऊ में बीते साल 19 दिसंबर को हिंसा भड़की में संलिप्त रहे हैं।

पुलिस का कहना है कि मुखबिर द्वारा दी गयी जानकारी पर कथित तौर पर PFI के इन 5 लोगों को झकरकटी पुल के नीचे रेलवे गेट के पास से गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किये गए लोगों में मोहम्मद उमर पुत्र मुद्दीन, सैय्यद अब्दुल पुत्र कयूम, फैजान मुमताज पुत्र मुमताज अहमद, मोहम्मद वासिफ पुत्र मोहम्मद फहीम और सरवर आलम पुत्र नवाब खान हैं शामिल हैं, जिन्हें पुलिस PFI सदस्य बता रही है।

गौरतलब है कि PFI पर कानपुर के बाबूपुरवा और यतीमखाना में हिंसा भड़काने का आरोप पहले से ही लगा हुआ है। कानपुर में हुई हिंसा में दर्ज एफआईआर में जो आरोपी बनाए गए हैं उनमें इन पाँचों के नाम भी शामिल थे, जिन्हें आज पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार किये गए सभी सदस्य थाना बाबूपुरवा में हुए बवाल में संलिप्त हैं। इन सभी पर 362/19 की धारा 147/ 148/ 149/ 332/ 353/ 336/ 307/ 188/ 427/ 34/ 109/ 302 समेत 7 क्रिमिनल एक्ट 3/4 पीपीडी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

कानपुर पुलिस ने यह भी दावा किया है कि गिरफ्तार किये गये लोग नमामि गंगा कार्यक्रम में शामिल होने आ रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरोध में भीड़ एकत्रित कर रहे थे। पुलिस का कहना है कि इस संगठन का बीते साल के आखिर में हुए दंगे में भी हाथ रहा था। इसके अलावा पुलिस का कहना है कि 29-30 जनवरी को हुए विरोध व धरना-प्रदर्शन में भी यह संगठन शामिल था।

क्या है पीएफआई

पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया या पीएफआई को एक चरमपंथी इस्लामिक संगठन घोषित किया हुआ है। हालांकि PFI खुद को पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के हक में आवाज उठाने वाला संगठन बताता है। इस संगठन की स्थापना 2006 में नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट (NDF) के उत्तराधिकारी के रूप में हुई थी। पुलिस कहती है कि इस संगठन की जड़ें केरल के कालीकट से हैं और इसका मुख्यालय दिल्ली के शाहीन बाग में स्थित है।

पुलिस का दावा है कि मुस्लिम चरमपंथी संगठन होने के कारण इसकी ज्यादातर गतिविधियां मुस्लिमों के इर्द-गिर्द घूमती हैं। पहले भी ये संगठन मुस्लिम आरक्षण के लिए सड़कों पर उतर चुका है। यह संगठन 2006 में उस वक़्त सुर्ख़ियों में आया था जब दिल्ली के रामलीला मैदान में इसने नेशनल पॉलिटिकल कांफ्रेंस का आयोजन किया गया था। तब लोगों की एक बड़ी संख्या ने इस कांफ्रेंस में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी।

हा जाता है कि PFI फिलहाल देश के 23 राज्यों में फैला हुआ है और अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। पीएफआई खुद को न्याय, स्वतंत्रता और सुरक्षा का पैरोकार बताता है और मुस्लिमों के अलावा देशभर के दलितों, आदिवासियों पर होने वाले अत्याचार के लिए समय समय पर आवाज उठाने की बात भी करता है।

विवादों से रहा है पुराना नाता

पीएफआई का विवादों से पुराना रिश्ता रहा है। PFI को सिमी (स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया) की बी विंग कहा जाता है। कहते हैं कि अप्रैल 1977 में बनाये गये संगठन सिमी पर जब 2006 में बैन लगा तो उसके फ़ौरन बाद ही शोषित मुसलमानों, आदिवासियों और दलितों के अधिकार के नाम पर पीएफआई का गठन किया गया था। संगठन की कार्यप्रणाली सिमी से मिलती जुलती बतायी जाती है। उत्तर प्रदेश में पीएफआई के बैन की मांग बार—बार उठायी जाती रही है।

PFI को बैन किये जाने की मांग 2012 में भी हुई थी। हालांकि केरल की सरकार ने PFI का बचाव करते हुए केरल हाई कोर्ट को बताया था कि ये सिमी से अलग हुए सदस्यों का संगठन है, जो कुछ मुद्दों पर सरकार का विरोध करता है। ये सवाल जवाब केरल की सरकार से तब हुए थे जब उसके पास संगठन द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर आजादी मार्च किये जाने की शिकायतें आई थीं।

हाईकोर्ट ने सरकार के दावों को खारिज कर दिया था, मगर बैन को बरक़रार रखा था। केरल पुलिस ने PFI कार्यकर्ताओं के पास से बम, हथियार, सीडी और तमाम ऐसे दस्तावेज बरामद किये जाने का दावा किया था, जिनमें PFI अल कायदा और तालिबान का समर्थन करता नजर आ रहा था।

पीएफआई के कार्यकर्ता लव जिहाद को लेकर दंगा भड़काने, शांति को प्रभावित करने, लूटपाट और हत्या जैसी वारदातों में आरोपित रह चुके हैं। पुलिस कहती है कि PFI एक आतंकवादी संगठन है, जिसके तार कई अलग अलग संगठनों से जुड़े हैं।

ज 31 जनवरी को पीएफआई के 5 लोगों की गिरफ्तरी पर एसएसपी अनंतदेव तिवारी कहते हैं कि 'पिछले साल के आखिर में CAA बिल को लेकर जो दंगे की स्थिति बन गई थी, उसमें तीन लोगों की मौत के साथ कई पुलिसकर्मी व मीडियाकर्मी घायल हुए थे। उसकी वजह बैन हो चुका PFI संगठन माना जा रहा है। यह लोग शहर का अमन चैन खराब करना चाहते थे। लोगों को लगातार उकसा रहे थे। PFI के 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है आगे और भी गिरफ्तारियां की जाएंगी।'

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