राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति ने कहा बाबर नहीं था विवादित जमीन का मालिक, न ही उसने मस्जिद बनवाई

Update: 2019-08-30 07:36 GMT

राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति ने दिया तर्क, ऐसी ज़मीन जिस पर दो लोगों का कब्ज़ा हो और एक मस्जिद बनाने का विरोध करे तो उस जमीन पर भी मस्जिद नहीं बनाई जा सकती, 1860 तक विवादित स्ट्रकचर में मुसलमानों के नमाज पढ़ने का नहीं है कोई सबूत...

जेपी सिंह की रिपोर्ट

योध्या भूमि विवाद मामले में गुरुवार 29 अगस्त को उच्चतम न्यायालय में 15वें दिन सुनवाई हुई। अभी तक हिंदू पक्ष विवादित स्थल पर मालिकाने का कोई ठोस प्रमाण नहीं दे सका है। राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति के वकील पीएन मिश्रा ने पांच सदस्यीय संविधान पीठ के सामने दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि बाबर ने मस्जिद का निर्माण नहीं कराया था और न ही वह विवादित जमीन का मालिक था। जब वह जमीन का मालिक ही नहीं था तो सुन्नी वक्फ बोर्ड का मामले में दावा ही नहीं बनता।

पीएन मिश्रा ने किताबों को सबूत के तौर पर स्वीकार करने संबंधी इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का जिक्र किया। मिश्रा ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि ये साबित नहीं हो पाया है कि विवादित जमीन पर मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण बाबर ने कराया था या औरंगजेब ने?

राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति के वकील ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले के मुताबिक, एक जज ने लिखा था कि इसका कोई सबूत नहीं मिला है कि ढांचे का निर्माण बाबर ने कराया था, जबकि दूसरे जज ने कहा था कि इसे औरंगजेब ने बनवाया था। लेकिन मुस्लिम पक्षकार साबित नहीं कर पाए कि मस्जिद का निर्माण बाबर ने करवाया था। ऐसे में मेरा कहना है कि जब कोई सबूत ही नहीं है तो मुस्लिम पक्षकार को विवादित जमीन पर कब्जा या हिस्सेदारी नहीं दी जा सकती।

पीएन मिश्रा ने कहा कि हाईकोर्ट के जज एसयू खान का निष्कर्ष अनुमान पर आधारित था। उन्होंने अपने फैसले में कहा था कि 'इस बाबत सबूत नहीं है कि मस्जिद का निर्माण बाबर ने किया था, लेकिन मैं ये अनुमान लगा सकता हूं कि ये मस्जिद बाबर ने बनवाई थी।' यह तो स्पष्ट है कि मस्जिद को मंदिर के ऊपर बनाया गया था, क्योंकि मंदिर के अवशेष उस जगह से मिले हैं। जबकी कुछ लोगों का मानना है कि मंदिर को ध्वस्त कर के मस्जिद बनाई गई।

स्टिस बोबडे ने पीएन मिश्रा से तीन बिंदु स्प्ष्ट करने को कहा, 1- वहां पर एक इस्ट्रक्चर था इस बारे में कोई विवाद नहीं है, पर क्या वह स्ट्रक्चर मस्जिद है या नहीं, बहस यह है, 2- वह इस्ट्रक्चर किसको समर्पित था?

पीएन मिश्रा ने कहा कि 1648 में शाहजहां का शासन था और औरंगजेब गुजरात का शासन था। इस पर मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने अप्पति जताई। मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा अब तक 24 बार मिश्रा संदर्भ से बाहर जाकर किस्से कहानियां सुना चुके है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि ये अपने तथ्यों को रख रहे हैं, लेकिन उन्होंने मिश्रा से भी कहा कि सिर्फ संदर्भ बताएं।

पीएन मिश्रा ने कहा कि सिर्फ कोर्ट मुझे गाइड कर सकता है, मेरे साथी वकील नहीं।चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि आप स्वतंत्र हैं अपने तथ्य रखने के लिए, आप अपना पक्ष रखें। पीएन मिश्रा ने मस्जिद बनाने के बारे में बहस करते हुए कहा कि इस्लाम में मस्जिद बनाने के क्या कानून हैं। एक मस्जिद उसी जगह पर बनाई जा सकती है जब उसका मालिक मस्जिद बनने की इजाज़त दे, वक़्फ़ को दी गई जमीन मालिक की होनी चाहिए।

कौल राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति इस्लाम के अनुसार दूसरे के पूजास्थल को गिराकर या ध्वस्त करके उस जगह पर मस्जिद नहीं बनाई जा सकती। उन्होंने कहा कि ऐसी ज़मीन जिस पर दो लोगों का कब्ज़ा हो और एक मस्जिद बनाने का विरोध करे तो उस जमीन पर भी मस्जिद नहीं बनाई जा सकती। विवादित स्ट्रक्चर को जुमे की नमाज के लिए 2-3 घण्टे के लिए ही खोला जाता था। सन 1860 तक विवादित स्ट्रकचर में मुसलमानों के नमाज पढ़ने का कोई सबूत नहीं है। इस्लामिक कानून के अनुसार अगर कहीं मस्जिद में आज़ान होती है और 2 समय की नमाज नहीं होती है तो वह मस्जिद नहीं रह जाती।

स्टिस बोबडे ने पूछा कि क्या कोई राजा राज्य की सम्पति से वक्फ बना सकता है या उसे पहले यह खरीदनी होगी? मिश्रा ने तारीख ए फिरोज शाही का हवाला देते हुए कहा है कि विजित संपत्ति से विजेता एक पारिश्रमिक के रूप में 1/10 का मालिक है और अपने पारिश्रमिक में से वह एक वक्फ बना सकता है। राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति की ओर से वकील पीएन मिश्रा की बहस शुक्रवार 30 अगस्त को भी जारी रहेगी।

च्चतम न्यायालय में 6 अगस्त से प्रतिदिन सुनवाई शुरू हुई। मंगलवार 27 अगस्त को 13वीं सुनवाई में निर्मोही अखाड़ा के वकील सुशील कुमार जैन ने दलील दी कि विवादित ढांचे में मुस्लिमों ने 1934 के बाद से कभी नमाज नहीं पढ़ी। मुस्लिम पक्ष ने स्वीकार किया कि 1855 से पहले वहां नमाज पढ़े जाने का साक्ष्य नहीं है।

बुधवार 28 अगस्त को 14वीं सुनवाई में राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति के वकील पीएन मिश्रा ने कहा- अयोध्या में मंदिर बाबर ने नहीं, बल्कि औरंगजेब ने तुड़वाया था। अपने दावे को साबित करने के लिए समिति ने प्राचीन मुस्लिम किताबें सबूत के तौर पर पेश कीं। हालांकि एक किताब पर मुस्लिम पक्ष ने आपत्ति भी जताई।

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