Gujrat Chunav : पहले चरण के 788 में से 167 उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले, 100 पर हत्या-रेप जैसे गंभीर आरोप - एडीआर रिपोर्ट

Gujarat Chunav 2022 : पहले चरण के दागी 167 उम्मीदवारों में से 100 ने चुनाव आयोग को अपने हलफनामे में खुद के खिलाफ हत्या और रेप के मामले लंबित होने की जानकारी दी है।

Update: 2022-11-25 04:03 GMT

Gujrat Chunav : पहले चरण के 788 में से 167 पर आपराधिक मामले, 100 पर हत्या और रेप जैसे गंभीर आरोप - एडीआर रिपोर्ट

Gujrat Chunav 2022 : गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले चरण का चुनाव प्रचार चरम पर है। पहले चरण में कुल 182 में से 89 सीटों के लिए मतदान होना है। 89 सीटों पर कुल 788 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। इनमें से 167 उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। एडीआर की रिपोर्ट ( ADR Report ) के मुताबिक 100 प्रत्याशियों पर हत्या और बलात्कार ( murder and rape cases ) जैसे गंभीर आरोपों में मामला दर्ज है और अदालत में विचाराधीन है।

25 सीटों पर 3 या अधिक प्रत्याशी अपराधिक मामलों के आरोपी

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR report ) की रिपोर्ट के मुताबिक पहले चरण में 21 फीसदी प्रत्याशियों के खिलाफ आपराधिक मामले हैं। इनमें से 13 प्रतिशत उम्मीदवारों पर गंभीर आरोप हैं। एडीआर ने पहले चरण में कुल 89 निर्वाचन क्षेत्रों में से 25 को रेड अलर्ट सीटों की श्रेणी में चिन्हित किया है। इन सीटों पर तीन या उससे अधिक उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। खुद प्रत्याशियों ने भी इस बात की जानकारी चुनाव आयोग को अपने हलफनामे में दी है।

एडीआर की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक आम आदमी पार्टी 89 में से 88 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। आप के 36 प्रतिशत उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। उसके 30 प्रतिशत उम्मीदवार हत्या, बलात्कार, हमला, अपहरण जैसे गंभीर आरोप हैं। आप द्वारा मैदान में उतारे गए आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवारों की संख्या 32 है। दूसरे नंबर पर कांग्रेस है, जिसके 35 प्रतिशत आपराधिक उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा है। ऐसे 20 फीसदी अभ्यर्थियों पर गंभीर मामले चल रहे हैं। कांग्रेस पहले चरण के सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस के 89 प्रत्याशियों में से 31 उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले विचाराधीन हैं।

भाजपा के 14 प्रत्याशी दागी

जहां तक गुजरात में सत्तारूढ़ भाजपा की बात है तो पहले चरण के चुनाव में सभी सीटों पर पार्टी चुनाव लड़ रही है। भाजपा के आपराधिक रिकॉर्ड वाले 14 उम्मीदवार पहले चरण में मैदान में हैं। एडीआर ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि प्रतिशत के लिहाज से ऐसे उम्मीदवारों की कुल संख्या का 16 प्रतिशत है। भाजपा के 12 प्रत्याशी पर गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं। वहीं पहले चरण में 14 सीटों पर चुनाव लड़ रही भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) के चार उम्मीदवार (29 प्रतिशत) घोषित आपराधिक मामलों वाले हैं। उसके कुल सात फीसदी उम्मीदवारों पर इस बार गंभीर आपराधिक मामले हैं।

गुजरात विधानसभा चुनाव 2017 में पहले चरण में चुनाव लड़ने वाले 15 प्रतिशत उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले थे, जबकि आठ प्रतिशत उम्मीदवारों पर गंभीर आपराधिक मामले थे। प्रतिशत के लिहाज से पहले चरण में इस बार ज्यादा प्रत्याशियों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। गुजरात चुनाव के पहले चरण के दागी 167 उम्मीदवारों में से 100 ने चुनाव आयोग को सौंपे गए हलफनामे में अपने खिलाफ गंभीर मामले घोषित किए हैं। इनमें महिलाओं के खिलाफ अपराध के नौ मामले, हत्या के तीन मामले और हत्या के प्रयास के 12 मामले शामिल हैं। 2017 में पहले चरण में ऐसे 78 उम्मीदवार मैदान में थे।

इन उम्मीदवारों पर दर्ज हैं गंभीर आपराधिक मामले

इस बार जिन उम्मीदवारों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं उनमें जनक तलविया (भाजपा), वसंत पटेल (कांग्रेस), अमरदास देसानी (निर्दलीय) हैं। आपराधिक रिकॉर्ड वाले अन्य उम्मीदवारों में भाजपा के पुरुषोत्तम सोलंकी, कांग्रेस के गनीबेन ठाकोर और जिग्नेश मेवानी, आप के गोपाल इटालिया और अल्पेश कठेरिया शामिल हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस, बीजेपी और बीटीपी ने पहले चरण में क्रमश: 36, 25 और 67 फीसदी आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवार उतारे थे।

ये हैं सुप्रीम कोर्ट के आदेश

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 25 सितंबर 2018 को अपने आदेश में कहा था कि सभी राजनीतिक दलों के लिए लंबित आपराधिक मामलों और ऐसे उम्मीदवारों के चयन के कारणों की जानकारी अपनी वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य है। इतना ही नहीं इस सूचना को एक स्थानीय और एक राष्ट्रीय दैनिक में प्रकाशित करने और आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने का भी आदेश दिया था। एडीआर के प्रमुख अनिल वर्मा ने इस बारे में बताया है कि दागी प्रत्याशियों ने सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग के निर्देशों का ठीक से पालन नहीं किया है। यानि चुनाव के पहले चरण में उम्मीदवारों के चयन में राजनीतिक दलों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है क्योंकि उन्होंने फिर से लगभग 21 प्रतिशत उम्मीदवारों को टिकट देने की अपनी पुरानी प्रथा का पालन किया है।

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