Asaduddin Owaisi News : क्या गुजरात में विपक्ष को कमजोर करेंगे ओवैसी, हर बार BJP को क्यों पहुंचा रहे लाभ

Asaduddin Owaisi News : आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ( Arvind Kejriwal ) ने भारतीय नोट पर लक्ष्मी-गणेश का फोटो लगाने की मांग कर चुनाव ( Gujrat chunav 2022 ) को हिंदू बनाम मुस्लिम कर दिया है। अगर इसका असर हुआ तो भाजपा का नुकसान होना तय है।

Update: 2022-10-29 08:30 GMT

Asaduddin Owaisi News : क्या गुजरात में विपक्ष को कमजोर करेंगे ओवैसी, हर बार BJP को क्यों पहुंचा रहे लाभ

Asaduddin Owaisi News : गुजरात विधानसभा चुनाव ( Gujrat Chunav 2022 ) को लेकर राजनीति चरम पर है। अभी तक गुजरात चुनाव में मुख्य मुकाबला कांग्रेस ( Congress ) और भाजपा ( BJP ) के बीच होती रही है, लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी ( AAP ) के एंट्री से माहौल बदल गया है। इतना ही नहीं, एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ( AIMIM Chief Asaduddin Owaisi ) भी अब लगातार गुजरात का दौरा कर रहे हैं। अपने चिर परिचित अंदाज में गुजरात के सियासी माहौल को हिंदू बनाम मुस्लिम ( Hindu Vs Muslim ) करने के लिए धर्म का तड़का लगाने से गुरेज नहीं कर रहे हैं।

केजरीवाल के यू-टर्न से सकते में BJP

एक तरफ भाजपा अपने गढ़ में और बेहतर प्रदर्शन की रणनीति में जुटी है। इस बार भाजपा के सामने 27 साल का एंटी इंकंबेंसी का खतरा सबसे ज्यादा है। इस बीच आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ( Arvind Kejriwal ) ने भारतीय नोट पर लक्ष्मी-गणेश का फोटो लगाने की मांग कर मामले को पूरी तरह से हिंदू बनाम मुस्लिम कर दिया है। अगर इसका असर हुआ तो भाजपा का नुकसान होना तय है। यही वजह है कि दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के सियासी यू-टर्न से सबसे ज्यादा भाजपा सकते में है। भाजपा के नेता इसलिए सकते में नहीं हैं कि केजरीवाल के इस गेम प्लान से वो गुजरात में चुनाव हार जाएंगे, बल्कि मोदी-शाह की चिंता ये है इसका दूरगामी असर भाजपा के लिए भविष्य में नुकसानदेह हो सकता है। ऐसा इसलिए कि अरविंद केजरीवाल ने अल्पसंख्यवाद और गरीब-पिछ़ड़ों की राजनीति के बदले भविष्य में भगवा राजनीति के संकेत दिए हैं।

संघी चाल से भाजपा को सियासी मात देने की योजना 

आप के रणनीतिकारों के इस रूख से साफ है कि राजनीति में सत्ता हासिल करना हर राजनेता का पहला ध्येय होता है। उसके बाद ये सवाल होता है कि वो किस रणनीति के तहत सरकार चलाता है। राजनीति की मूल सच्चाई पर अमल करते हुए केजरीवाल ने हिंदू वोटों की राजनीति करने का संकेत खुले तौर पर दे दिया है। उन्होंने बता दिया है कि हिंदू मतदाताओं को नाराज कर देश पर राज नहीं किया जा सकता है। यानि पार्टी को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में लाने के लिए भाजपा के हिंदू वोट बैंक में सेंध लगाने की जरूरत है। आप के इस चाल को भाजपा नेतृत्व भांप चुकी है और जरूरी सावधानी बरतने में भी भगवाधारी जुट गए हैं। केजरीवाल के खिलाफ अब तक का सबसे धारदार सियासी हमला भाजपा यूं ही नहीं कर रही है।

ओवैसी गुजरात में लगाएंगे यूपी-बिहार वाला सियासी तड़का!

वहीं, राजनीति की ही बात करें तो इस मामले में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी पीछे रहने वालों में नहीं हैं। उन्होंने भारतीय राजनीति में खुद की प्रासंगिकता को बरकरार रखने के लिए बिहार, पश्चिम बंगाल और यूपी की तरह गुजरात में भी धर्म का सियासी तड़का लगाने का काम शुरू कर दिया है। असदुद्दीन ओवैसी ( AIMIM Chief Asaduddin Owaisi ) 29 अक्टूबर से राज्य के दो दिवसीय दौरे पर गुजरात पहुंचने वाले हैं। प्रस्तावित दौरे के तहत पहले दिन ओवैसी पाटन जिले के सिद्धपुर में सिद्धपुर-छपी हाईवे पर स्थित होटल माइलस्टोन और वडगाम के महेदीपुरा इलाके में एक जनसभा को संबोधित करेंगे। दूसरे दिन हैदराबाद से सांसद अहमदाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे और बापूनगर निर्वाचन क्षेत्र वाले गांधीनगर के राखियाल क्षेत्र में एक और जनसभा को संबोधित करेंगे। गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए एआईएमआईएम ने अब तक दानिलिमदा (एससी), जमालपुर-खड़िया, सूरत-पूर्व, बापूनगर और लिंबायत सीटों पर उम्मीदवार उतार चुके हैं। ओवैसी ने अहमदाबाद के जमालपुर-खड़िया से कांग्रेस के पूर्व विधायक और पार्टी के राज्य प्रमुख साबिर काबलीवाला, दानिलिमदा (एससी) सीट से दलित चेहरा कौशिका परमार, सूरत-पूर्व से वसीम कुरैशी, अहमदाबाद के बापूनगर से शाहनवाज खान पठान और सूरत के लिंबायत से अब्दुल बशीर शेख को मैदान में उतारा है।

AIMIM की एंट्री से बढ़ी आप और कांग्रेस की चिंता

ओवैसी के इस चाल को देखते हुए कांग्रेस और आप ने भी नोट कर लिया है। इन दलों के नेताओं का आरोप है कि ओवैसी की भाजपा नेताओं से बातचीत हो चुकी है। वो भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश करेंगे। यूपी और बिहार में ऐसा कर चुके हैं। अब वो गुजरात में वही काम कर रहे हैं। ओवैसी की सक्रियता कांग्रेस और AAP की टेंशन बढ़ गई है। बता दें कि गुजरात में अभी तक मुख्य तौर पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबला होता आ रहा है। इस बार आम आदमी पार्टी (AAP) और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के भी चुनावी मैदान में उतरने को लेकर सूबे में सियासी हलचल तेज हो गई है।

गुजरात में पहली बार एआईएमआईएम चुनाव लड़ने जा रही है। चूंकि केजरीवाल की तरह एआईएमआईएम राष्ट्रीय राजनीति में दखल बनाने की कोशिश में जुटे हैं इसलिए दोनों दल 2024 के आम चुनाव की तैयारी में अभी से जुट गए हैं। यही वजह है कि दोनों दलों के नेताओं ने राजनीति में अपनी सक्रियता अभी से बढ़ा दी है। ताकि उनकी लोकप्रियता में इजाफा हो सके।

अभी तय नहीं कौन काटेगा किसका वोट

अब सवाल यह उठता है कि औवैसी और केजरीवाल किसका वोट काटेंगे। केजरीवाल के रुख से तो साफ है कि उनका इरादा हिंदू वोट बैंक में सेंध में लगाने की है। यानि भाजपा को नुकसान पहुंचाने की है। इस प्रयास में वो कुछ न कुछ झटका तो भाजपा को देंगे ही, झटका कितना दे पाएंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है। साथ ही वो कांग्रेस के वोट बैंक पर सेंध लगाएंगे। हाल के एबीपी सी वोटर के सर्वे में भी इस बात के संकेत मिले हैं कि मुस्लिम मतदाताओं का एक तबका आप के पक्ष में वोट करेगा। बहुत हद तक यही काम असदुद्दीन ओवैसी भी करेंगे। यही वजह है कि वो उन सीटों पर पार्टी का प्रत्याशी उतार रहे हैं, जहां पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। गुजरात में मतदाताओं का ये तबका अभी तक कांग्रेस पक्ष में मतदान करता आया है।

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