Jhansi News: भाजपा का किला बने बुंदेलखंड की 19 विधानसभाओं की इन सीटों पर इस बार समाजवादी पार्टी लगा सकती हैं सेंध...

बुन्देलखण्ड में अपनी खोयी जमीन को हासिल करने के लिए सपा पूरे जीजान से लगी है। आगामी विधानसभा चुनाव में बुन्देलखण्ड की कई सीटें ऐसी हैं, जिन पर समाजवादी पार्टी भाजपा को कड़ी टक्कर देने की तैयारी में है...

Update: 2021-12-06 06:35 GMT

(अखिलेश की बुंदेलखंड रैली में उमड़ पड़ा जनसैलाब)

झाँसी से लक्ष्मी नारायण शर्मा की रिपोर्ट  

Jhansi News: उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए साल 2017 के हुए चुनाव में बुन्देलखण्ड के सात जिलों की सभी उन्नीस सीटों पर भारतीय जनता पार्टी को जीत हासिल हुई थी। भाजपा को बुन्देलखण्ड में जिस तरह से सफलता मिली, उसके बाद सपा, बसपा और कांग्रेस जैसे दल यहां शून्य पर पहुंच गए। वर्ष 2017 में भाजपा के चुनावी लहर में बुन्देलखण्ड के समाजवादी पार्टी के कई दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा था।

अब जब विधानसभा चुनाव 2022 करीब है तो बुन्देलखण्ड में अपनी खोयी जमीन को हासिल करने के लिए समाजवादी पार्टी पूरे जीजान से लगी है। आगामी विधानसभा चुनाव में बुन्देलखण्ड की कई सीटें ऐसी हैं, जिन पर समाजवादी पार्टी भाजपा को कड़ी टक्कर देने की तैयारी में है।

झाँसी जिले की गरौठा विधानसभा सीट सपा के लिए काफी महत्वपूर्ण रही है। बुन्देलखण्ड के कद्दावर नेता दीप नारायण सिंह यादव ने इस सीट पर लंबे समय तक काबिज कांग्रेस नेता और समथर स्टेट के राजा रंजीत सिंह जूदेव को हराकर यहां जीत हासिल किया था। जूदेव कभी यूपी सरकार में गृह राज्यमंत्री हुआ करते थे और गांधी परिवार के भी काफी करीबी रहे हैं।

इस सीट पर साल 2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव में दीप नारायण सिंह ने जीत हासिल की लेकिन 2017 के चुनाव में वे भाजपा नेता जवाहर लाल राजपूत से चुनाव हार गए। अखिलेश यादव के बेहद करीबी और बुन्देलखण्ड के प्रभावशाली नेता दीप नारायण इस बार पूरी तैयारी के साथ भाजपा को चुनौती देने के मकसद से चुनावी मैदान में होंगे और पार्टी को भी इस विधानसभा सीट से काफी उम्मीद है।

झाँसी जिले की एक महत्वपूर्ण विधानसभा सीट बबीना है। फिलहाल 2022 के लिए इस सीट पर समाजवादी पार्टी अपनी दमदार दावेदारी पेश कर रही है। वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के राजीव सिंह पारीछा इस सीट से विधायक हैं। वे उमा भारती के बेहद करीबी माने जाते हैं।साल 2017 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर सपा ने बुन्देलखण्ड के दिग्गज नेता डॉ चंद्रपाल सिंह यादव के बेटे यशपाल को प्रत्याशी बनाया था लेकिन उन्हें भाजपा प्रत्याशी राजीव सिंह पारीछा से हार का सामना करना पड़ा था।

इससे पहले 2012 के विधानसभा चुनाव में डॉ चंद्रपाल सिंह यादव खुद इस सीट से चुनाव लड़े थे और उन्हें बसपा के कृष्णपाल राजपूत से हार मिली थी। पूर्व में लोकसभा और राज्यसभा के सांसद रह चुके और वर्तमान में कृभको के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ चंद्रपाल यादव के लिए यह सीट इस बार प्रतिष्ठा का प्रश्न होगी। इस सीट पर सपा की ओर से टिकट के कई दावेदारों के बावजूद अभी तक यशपाल की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है और सपा की कोशिश होगी कि इस सीट पर अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराकर भाजपा की घेराबंदी की जा सके।

झाँसी जिले की मऊरानीपुर विधानसभा सीट पर सपा मजबूत घेराबंदी के साथ चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। यह सीट अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व है। यहां इस समय भारतीय जनता पार्टी के बिहारी लाल आर्य विधायक हैं। वे पूर्व में कांग्रेस पार्टी से विधायक हुआ करते थे और पूर्व में यूपी सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। बिहारी 2017 के चुनाव से ठीक पहले भाजपा में शामिल हुए और इस सीट पर सपा की डॉ रश्मि आर्य को हराकर जीत हासिल की। इस बार उनके टिकट को लेकर संशय जाहिर किया जा रहा है। साल 2012 में डॉ रश्मि आर्य इस सीट पर सपा के टिकट से चुनाव जीती थीं। राजनीतिक रूप से डॉ रश्मि आर्य का परिवार इस क्षेत्र में प्रभावशाली माना जाता है लेकिन काफी समय से उनके भाजपा में जाने की अटकलें लगती रही हैं।

चर्चाएं हैं कि वे भाजपा से चुनाव लड़ सकती हैं। इस सीट पर बसपा ने पूर्व मंत्री रतन लाल अहिरवार के बेटे रोहित रतन को प्रत्याशी बनाया है। दूसरी ओर बुन्देलखण्ड में कभी बसपा के कद्दावर नेता रहे तिलक चन्द्र अहिरवार के इस सीट से सपा से चुनाव लड़ने की अटकलें जोरो पर हैं। तिलक को अखिलेश यादव ने कुछ समय पहले पार्टी में शामिल कराया है और इस क्षेत्र में तिलक काफी सक्रिय नजर आ रहे है।

हमीरपुर जिले की हमीरपुर विधानसभा सीट पर वर्तमान में भाजपा का कब्जा है लेकिन सपा ने पिछले विधानसभा चुनाव में यहां मजबूती से चुनाव लड़ा था और इस बार भी पार्टी यहां पूरे दमखम के साथ मैदान में उतरने की तैयारी में है। इसी तरह हमीरपुर जिले की राठ विधानसभा सीट पर भाजपा को चुनौती देने के लिए सपा की ओर से गयादीन अनुरागी को मैदान में उतारे जाने के कयास लगाए जा रहे हैं। वे पूर्व में कांग्रेस पार्टी से विधायक रह चुके हैं।

वर्तमान में इस सीट पर भाजपा की मनीषा अनुरागी विधायक हैं। चित्रकूट जिले की चित्रकूट विधानसभा सीट पर पिछले विधानसभा चुनाव में सपा के वीर सिंह और मानिकपुर सीट पर विधानसभा के उपचुनाव में डॉ निर्भय सिंह पटेल ने काफी दमदारी से चुनाव लड़ा था। हालांकि ये दोनों सीटें फिलहाल भाजपा के ही खाते में हैं लेकिन इन दोनों ही सीटों पर सपा पूरी ताकत के साथ जोर आजमाइश की तैयारी में है।

महोबा जिले की दो विधानसभा सीटों पर भी सपा विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रही है। महोबा सीट से वर्तमान में भाजपा के राकेश गोस्वामी और चरखारी सीट से भाजपा के ही ब्रजभूषण सिंह राजपूत विधायक हैं। इन दोनों सीटों पर पिछले विधानसभा चुनाव 2017 में सिद्धगोपाल साहू और उर्मिला सिंह राजपूत ने चुनाव जीतने के लिए काफी जोर आजमाइश की थी लेकिन हार का सामना करना पड़ा था। अब टिकट के ऐलान और आने वाले दिनों में बनने वाले समीकरणों पर भी काफी कुछ निर्भर करेगा। 

बुन्देलखण्ड की कई सीटें ऐसी हैं, जिन पर मुख्य दौड़ में आने के लिए अभी सपा को काफी मेहनत की जरूरत पड़ेगी। झांसी सदर विधानसभा सीट पर फिलहाल सपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की है क्योंकि इस सीट पर पार्टी कभी मुख्य दौड़ में ही नहीं आ सकी। इसके अलावा ललितपुर, जालौन और बांदा जिलों की विधानसभा सीटों पर भी रेस में आने के लिए सपा को काफी पसीना बहाना है।

यूपी में खुद को मुख्य विपक्षी दल के तौर पर पेश कर रही समाजवादी पार्टी की बुन्देलखण्ड में हो रही सियासी गतिविधियों पर नजर रखना फिलहाल बेहद दिलचस्प होगा क्योंकि यहां एक-एक सीट पर पार्टी पूरी ताकत के साथ समीकरणों को तलाशने और तराशने में जुटी है, जिससे भाजपा के सामने मजबूत चुनौती पेश की जा सके।

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