आमने-सामने आए हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्री, कैप्टन की चेतावनी- कृषि कानून वापस लें वरना हो जाएगी देर

पंजाब के सीएम ने कहा कि उनकी सरकार कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के रुख के साथ खड़ी है। यहां तक ​​कि दिल्ली की सीमा पर मारे गए लोगों के परिवारों को मुआवजा और नौकरी भी दे रही है.....

Update: 2021-08-31 09:52 GMT

मनोज ठाकुर की रिपोर्ट

जनज्वार ब्यूरो/चंडीगढ़। शनिवार को करनाल हाईवे पर बसताड़ा टोल प्लाजा पर किसानों पर लाठीचार्ज के बाद हरियाणा और पंजाब के सीएम आमने सामने हैं। दोनों सीएम के बीच जुबानी जंग चल रही है कि कृषि के मोर्चे पर कौन सा राज्य बेहतर कर रहा है। मनोहर लाल खट्टर ने करनाल में हुए घटनाक्रम की जिम्मेदारी पंजाब पर डाली थी। बदले में पंजाब के

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध कर रहे किसानों पर हमले का बचाव करने के लिए लाठीचार्ज की जिम्मेदारी पंजाब पर डाल कर मनोहर लाल अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं। कैप्टन ने कहा कि अशांति के लिए पंजाब नहीं बल्कि भाजपा जिम्मेदार है। वहीं सीएम मनोहर लाल ने कहा था कि कैप्टन अमरिंदर सिंह और हरियाणा कांग्रेस के विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा किसानों को भड़का रहे हैं।

अमरिंदर सिंह ने यह भी कहा कि किसान करनाल में भाजपा की एक बैठक का विरोध कर रहे थे। जिन पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था, वे पंजाब के नहीं बल्कि हरियाणा के थे। उन्होंने करनाल एसडीएम के वायरल वीडियो की ओर इशारा करते हुए कहा कि इससे साबित हो जाता है कि पुलिस और प्रशासन ने पहले ही किसानों पर लाठीचार्ज की तैयारी कर ली थी। अब हरियाणा के सीएम झूठ बोल रहे हैं।

पंजाब के सीएम ने कहा कि उनकी सरकार कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के रुख के साथ खड़ी है। यहां तक ​​कि दिल्ली की सीमा पर मारे गए लोगों के परिवारों को मुआवजा और नौकरी भी दे रही है।," उन्होंने भाजपा को "अन्नदाता" पर ध्यान देने की चेतावनी देते हुए कहा कि इससे पहले कि बहुत देर हो जाए। भाजपा सरकार कृषि कानूनों को रद्द कर दे।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह की एक फोटो को हरियाणा की ओर से वायरल किया गया, इसमें बताया गया कि पंजाब सरकार आंदोलन को भड़का रही है। इसके जवाब में कैप्टन ने कहा, यह फोटो गन्ना उत्पादक किसानों को मिठाई खिलाने की है। क्योंकि सरकार ने उनकी बात मान ली थी। खट्टर भी यदि तीन कृषि कानून खत्म करने की मेरी, '(अमरिंदर सिंह) की बात मान लेते हैं तो मैं खट्टर को भी इसी तरह से मिठाई खिलाउंगा।'

करनाल लाठीचार्ज में चारों तरफ से आलोचना का सामना कर ही सरकार बचाव के रास्ते तलाश रही है। खट्टर सरकार की हरियाणा में ही नहीं बल्कि पंजाब और यहां तक कि देश भर में कड़ी आलोचना हो रही है। मामला उस वक्त और ज्यादा तूल पकड़ गया, जब एसडीएम आयुष सिन्हा का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ। इसमें वह नाका तोड़ने वाले किसानों का सिर फोड़ने की हिदायत पुलिस को दे रहे हैं।

वीडियो के बाद खट्टर सरकार की कड़ी आलोचना हो रही है। इधर सरकार एसडीएम के साथ खड़ी है। मनोहर लाल ने कहा कि एसडीएम ने अपनी ड्यूटी निभाई है, हालांकि उनके शब्द सही नहीं थे।

लाठीचार्ज के बाद हरियाणा के सीएम मनोहर लाल ने कई ट्वीट्स करते हुए किसानों के लिए अपनी सरकार की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री से खुद तय करने को कहा कि कौन 'किसान समर्थक' है।

उदाहरण के लिए, उन्होंने पोस्ट किया: "हरियाणा एमएसपी पर 10 फसलों की खरीद करता है - धान, गेहूं, सरसों, बाजरा, चना, मूंग, मक्का, मूंगफली, सूरजमुखी और कपास । यह भी दावा किया कि एमएसपी भुगतान सीधे किसान के खाते में होता है। उन्होंने सवाल किया कि क्या पंजाब किसान से एमएसपी पर फसल खरीदता है?"

इसी तरह, उन्होंने कहा, "हरियाणा प्रत्येक किसान को पराली प्रबंधन के लिए 1,000 रुपये प्रति एकड़ का भुगतान करता है और धान की पुआल की बिक्री के लिए लिंकेज प्रदान करता है। पंजाब किसान को क्या प्रोत्साहन प्रदान करता है?"

इसके जवाब में कैप्टन ने कहा कि आप तीन कृषि कानून वापस ले लो, किसान नौ माह से दिल्ली बार्डर पर तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। तब पता चलेगा कि आप की सरकार कितना किसान हितैषी है।

कैप्टन ने कहा कि भाजपा सरकार तीन कृषि कानून वापस नहीं लेगी। क्योंकि उन्हें अपने कॉरपोरेट मित्रों को को खुश करना है। भाजपा सरकार को किसानों की नहीं बल्कि कारपोरेट्स की चिंता है। इसलिए कृषि कानून पर सरकार अड़ियल रवैया अपना रही है।

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