Prophet Mohammad Row : नूपुर शर्मा पर SC के फैसले का मायावती ने किया स्वागत, अखिलेश यादव बोले - देश में माहौल बिगाड़ने की सजा भी मिलनी चाहिए

Prophet Mohammad Row : नूपुर शर्मा पर सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने ट्वीट कर लिखा है कि कोर्ट का यह आदेश सभी के लिए सबक है जो इस तरह के बयान देकर देश का माहौल बिगाड़ने का प्रयास करते हैं...

Update: 2022-07-01 14:39 GMT

Prophet Mohammad Row : नूपुर शर्मा पर SC के फैसले का मायावती ने किया स्वागत, अखिलेश यादव बोले - देश में माहौल बिगाड़ने की सजा भी मिलनी चाहिए

Prophet Mohammad Row : नूपुर शर्मा पर सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने ट्वीट कर लिखा है कि कोर्ट का यह आदेश सभी के लिए सबक है जो इस तरह के बयान देकर देश का माहौल बिगाड़ने का प्रयास करते हैं। कुछ ही देर बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी ट्वीट कर लिखा कि सिर्फ मुख को ही नहीं शरीर को भी माफी मांगनी चाहिए। देश में शांति और सौहार्द बिगाड़ने की सजा भी मिलनी चाहिए।

मायावती ने किया फैसले का स्वागत

बता दें कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने ट्वीट किया है। 'नूपुर शर्मा पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद मायावती ने ट्वीट कर लिखा कि 'माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा नूपुर शर्मा के विरुद्ध आज लिए गए सख्त स्टैंड तथा अपने भड़काऊ बयान से देश को हिंसक माहौल में झोंकने हेतु उनसे माफी मांगने का निर्देश उन सभी के लिए जरूरी सबक है, जो देश को सांप्रदायिकता की आग में झोंक कर अपनी राजनीति चमका रहे हैं।'

मायावती ने अपने सिलसिलवर ट्वीट में लिखा है कि 'साथ ही, नफरती भाषण के लिए नूपुर शर्मा के विरुद्ध एफआईआर होने के बावजूद पुलिस द्वारा उनके प्रति निष्क्रिय रवैये का भी मा. कोर्ट द्वारा संज्ञान लेने से संभव है कि आगे इस प्रकार की प्रवृति पर थोड़ा रोक लगे।'

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर क्या बोले अखिलेश यादव

बता दें कि नूपुर शर्मा पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद अखिलेश यादव ने भी ट्वीट कर लिखा कि 'सिर्फ मुख को नहीं, शरीर को भी माफी मांगनी चाहिए। देश में अशांति और सौहार्द बिगाड़ने की सजा मिलनी चाहिए।'

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई ने नूपुर शर्मा को फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा की ओर से दाख‍िल की गई याच‍िका की सुनवाई की। शुक्रवार को कहा कि 'इस प्रकार के बयान देने से उनका क्या मतलब है। इन बयानों के कारण देश में दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हुईं। ये लोग धार्मिक नहीं हैं। वे अन्य धर्मों का सम्मान नहीं करते। ये टिप्पणियां या तो सस्ता प्रचार पाने के लिए की गईं अथवा किसी राजनीतिक एजेंडे या घृणित गतिविधि के तहत की गईं।'

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