उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के नवनियुक्त अध्यक्ष ने बुल्डोजर का नाम रखा 'धाकड़ धामी', कहा अवैध कब्जा हटाने हैं बहुत जरूरी
Dhakad Dhami : उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष बनने के बाद जिस तरह से भाजपा प्रवक्ता मौ. शादाब शम्स ने भारतीय जनता पार्टी की प्रिय विध्वंसकारी राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए बुलडोजर का नामकरण ही धाकड़ धामी रखा है, उसने वसीम रिज़वी की याद ताजा कर दी...
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के नवनियुक्त अध्यक्ष ने बुल्डोजर का नाम रखा ‘धाकड़ धामी’, कहा अवैध कब्जा हटाने हैं बहुत जरूरी (photo : fb)
Dhakad Dhami : उत्तराखंड वक्फ बोर्ड अपनी संपत्तियों से अवैध कब्जे हटाने के लिए अपना खुद का बुलडोजर खरीदेगा। बोर्ड के अध्यक्ष निर्वाचित होते ही भाजपा नेता मौ. शादाब शम्स ने यह ऐलान किया है। शम्स बुधवार 7 सितंबर को ही उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए हैं।
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के नए अध्यक्ष के रूप में निर्विरोध चुने जाने के तुरंत बाद भाजपा नेता मौ. शादाब शम्स ने बुधवार को बोर्ड की मुख्य प्राथमिकता वक्फ संपत्तियों को अवैध कब्जे और अतिक्रमण से मुक्त कराना बताते हुए इस काम के लिए अपना खुद का बुलडोजर खरीदने की बात कही है। है। शम्स के मुताबिक बोर्ड ने इस मामले में सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ चर्चा भी कर ली है। शम्स का कहना है कि वह 'धाकड़ धामी' बुलडोजर चलाने का प्रस्ताव ला रहे हैं। इसके बाद वक्फ बोर्ड अपना बुलडोजर खरीदेगा।
भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता रहे शादाब शम्स ने बताया कि उत्तराखंड राज्य बनने के बाद किए गए एक सर्वे के मुताबिक वक्फ बोर्ड के तहत करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है। जिसमें से ज्यादातर देहरादून व हरिद्वार जिले में हैं। इनमें से तमाम संपत्तियां ऐसी हैं, जिन पर लोगों ने अवैध कब्जे कब्जे कर रखे हैं। यह सभी संपत्तियां गरीबों के लिए थी। इन संपत्तियों को अवैध कब्जे से छुड़ाना ही हमारी मुख्य प्राथमिकता है। वक्फ माफिया और अतिक्रमण में शामिल लोगों पर बुलडोजर चलाकर इन संपत्तियों को मुक्त कराया जायेगा। इन संपत्तियों को मुक्त करने के लिए बोर्ड के पास अब अपना ट्रिब्यूनल और अपना कोर्ट भी है, जिससे इच्छा शक्ति के साथ इन मामलों के निपटारे और भी त्वरित गति से होंगे।
बोर्ड की अगली बैठक में अपना खुद का बुलडोजर खरीदने का प्रस्ताव लाया जायेगा। अवैध कब्जे से मुक्त कराने के बाद इन संपत्तियों का उपयोग शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए किया जाएगा। बोर्ड अपने खुद के स्कूल और कॉलेज खोलेगा जिससे हमारे बच्चों को सही शिक्षा मिल सके और समुदाय को इससे फायदा हो सके। वक्फ बोर्ड यह सुनिश्चित करेगा कि इसके तहत मदरसों में अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा हो और शिक्षा का पूरा पाठ्यक्रम उत्तराखंड बोर्ड के अनुसार हो।
बता दें कि वक्फ बोर्ड एक कानूनी संगठन है, जो वक्फ संपत्तियों की उचित देखरेख की व्यवस्था के अलावा यहां से अर्जित पैसे का उपयोग मुस्लिम सिद्धांतों और कानून के अनुरूप करवाता है। राज्य में बोर्ड की तमाम संपत्तियां हैं, जो बोर्ड की लापरवाही के कारण अवैध कब्जों की भेंट चढ़ी हुई हैं। ऐसे कई कब्जों के मामले न्यायालय में भी चल रहे हैं, जो बोर्ड की लचर पैरवी की वजह लंबे खींच रहे हैं।
रिज़वी से आगे निकलने की होड़ में हैं क्या शादाब शम्स
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष बनने के बाद जिस तरह से भाजपा प्रवक्ता मौ. शादाब शम्स ने भारतीय जनता पार्टी की प्रिय विध्वंसकारी राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए बुलडोजर का नामकरण ही धाकड़ धामी रखा है, उसने वसीम रिज़वी की याद ताजा कर दी। शिया वक्फ बोर्ड उप्र के अध्यक्ष रहे वसीम रिज़वी भी पूर्व में इसी प्रकार की बयानबाजियों के चलते चर्चाओं के केंद्र में आए थे। भारतीय जनता पार्टी को लुभाने वाले बयानों से चर्चा में आए वसीम अपनी राजनैतिक महत्त्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए इतने आगे बढ़ गए थे कि उन्होंने बिना किसी अध्ययन के मौजूदा राजनीति से प्रभावित होकर इस्लाम धर्म का परित्याग कर हिंदू धर्म अंगीकार कर अपना नाम जितेंद्र नारायण त्यागी ही रख लिया था।
कुछ समय तक वह इस्लाम धर्म के खिलाफ जहर उगलते हुए अपने को लाइमलाइट में रखने में सफल भी हुए। लेकिन इन बयानबाजियों के कारण वह जैसे ही कानून की चपेट में आकर जेलयात्रा पर रवाना हुए तो उनके सारे भ्रम एक-एक करके टूटने शुरू हो गए। सुप्रीम कोर्ट की दया से हेल्थ ग्राउंड पर जमानत के बाद बाहर आए रिज़वी की निराशा का आलम यह है कि वह जीवन से ही विरक्त होने की कगार पर हैं। बकौल उनके, उनके साथ धोखा हुआ है। पहले उन्हें उकसाने वाले लोगों ने ही उन्हें मंझधार में छोड़ दिया है। ऐसे में उत्तराखंड के वक्फ बोर्ड के नवनिर्वाचित अध्यक्ष शादाब शम्स के धाकड़ धामी बुलडोजर वाले बयान को भी लोग भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को खुश बताने वाला बता रहे हैं।
बिना जनाधार के मुस्लिम नेताओं के भाजपा में संख्या के आधार पर इक्का-दुक्का ही होने के बाद उन्हें राजनीति की सीढियां चढ़कर ऊपर पहुंचने के लिए कई टोटके करने पड़ते हैं, जिसमें मुस्लिम विरोधी बयानबाजी से लेकर पार्टी के एजेंडे को आक्रामक तौर पर लागू करना प्रमुख है। रिज़वी पहला रास्ता अपनाकर हिट हुए थे तो लगता है शादाब भाजपा की विध्वंसकारी राजनीति के एजेंडे को महिमामंडित करके दूसरे रास्ते से भाजपा में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखना चाहते हैं।