Rape Case Delhi : मोदी सरकार के पूर्व मंत्री शाहनवाज हुसैन पर रेप का केस दर्ज कराने में पीड़िता को लग गए 4 साल, HC ने कहा 3 महीने में दो रिपोर्ट
Rape Case Delhi : दिल्ली की एक महिला को शाहनवाज हुसैन ( Shahanwaz Hussain ) के खिलाफ एफआईआर ( FIR ) दर्ज कराने में चार साल तक का लंबा इंतजार करना पड़ा। इस मामले में दिल्ली पुलिस ( Delhi Police ) का कहना है कि भाजपा नेता के खिलाफ मामला नहीं बनता है।
Rape Case Delhi : मोदी सरकार के पूर्व मंत्री शाहनवाज हुसैन पर रेप का केस दर्ज कराने में पीड़िता को लग गए 4 साल, HC ने कहा 3 महीने में दो रिपोर्ट
Rape Case Delhi : दिल्ली हाईकोर्ट ( Delhi High Court ) ने रेप के एक मामले में मोदी सरकार के पूर्व मंत्री शाहनवाज हुसैन ( Shahanwaz Hussain ) को झटका देते हुए दिल्ली पुलिस को दुष्कर्म ( Rape Case ) सहित अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। अदालत ने दिल्ली पुलिस को तीन माह में अपनी जांच पूरी करने को कहा है। दरअसल, दिल्ली की रहने वाली एक महिला ने जनवरी 2018 में निचली अदालत में याचिका दायर कर हुसैन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का गुजारिश की थी, लेकिन एफआईआर दर्ज कराने के लिए पीड़िता को चार साल तक का इंतजार करना पड़ा। अब इसे शाहनवाज हुसैन का दबाव कहें या कुछ और, पुलिस ( Delhi Police ) अभी तक एफआईआर ( FIR ) दर्ज करने से बचती रही है।
इस मामले में पीड़ित की याचिका पर सुनवाई करते हुए 17 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट ने दुष्कर्म ( Rape Case Delhi ) के मामले में भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन को राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने पुलिस को शाहनवाज हुसैन ( Shahanwaz Hussain ) के खिलाफ दुष्कर्म सहित अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर तीन माह में जांच पूरी करने का निर्देश दिया है। इससे पहले दिल्ली की रहने वाली पीड़ित महिला ने जनवरी 2018 में निचली अदालत में याचिका दायर कर हुसैन के खिलाफ दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज करने का गुजारिश की थी। महिला ने आरोप लगाया था कि हुसैन ने छतरपुर फार्म हाउस में उसके साथ दुष्कर्म किया व जान से मारने की धमकी दी।
मजिस्ट्रेटी कोर्ट ने 7 जुलाई को हुसैन के खिलाफ धारा 376, 328, 120 और 506 के तहत एफआईआर दर्ज करने का आदेश देते हुए कहा था कि महिला की शिकायत में संज्ञेय अपराध का मामला है। इसके जवाब में दिल्ली पुलिस ने पेश रिपोर्ट में तर्क रखा कि हुसैन के खिलाफ मामला नहीं बनता लेकिन अदालत ने पुलिस के तर्क को खारिज कर दिया था।
अब दिल्ली हाईकोर्ट की जज न्यायमूर्ति आशा मेनन ने फैसले में कहा कि सभी तथ्यों को देखने से स्पष्ट है कि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने से दिल्ली पुलिस बच रही है। अदालत ने कहा कि पुलिस की ओर से निचली अदालत में पेश रिपोर्ट अंतिम रिपोर्ट नहीं थी जबकि अपराध का संज्ञान लेने के लिए अधिकार प्राप्त मजिस्ट्रेट को अंतिम रिपोर्ट अग्रेषित करने की जरूरत है।
इस मामले ( Rape Case Delhi ) में दिल्ली पुलिस अदालत के औपचारिक आदेश के बिना भी संज्ञेय अपराध का खुलासा होने पर जांच के साथ आगे बढ़ सकती है। एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। इस तरह की जांच के निष्कर्ष पर पुलिस को धारा 173 सीआरपीसी के तहत एक अंतिम रिपोर्ट जमा करनी होगी। यहां तक कि मजिस्ट्रेट रिपोर्ट को स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं है। फिर भी यह निर्धारित कर सकता है कि संज्ञान लेना है या नहीं और मामले को आगे बढ़ाना है या नहीं। अदालत ने हुसैन की अपील को खारिज करते हुए कहा कि यदि मजिस्ट्रेट एफआईआर के बिना क्लोजर रिपोर्ट या धारा 176 सीआरपीसी के तहत रिपोर्ट के रूप में मानने का इरादा रखते है तब भी उन्हें नोटिस जारी कर अभियोक्ता को विरूद्ध याचिका दायर करने का अधिकार देने सहित मामले से निपटना पड़ता है।
इससे पहले 13 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट ने बलात्कार ( Rape ) का आरोप लगाने वाली एक महिला की शिकायत पर भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन( Shahanwaz Hussain ) के खिलाफ दिल्ली पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के निचली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी थी। निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली हुसैन की याचिका पर जस्टिस एके पाठक ने कथित पीड़िता और पुलिस को नोटिस जारी किए और उनसे जवाब मांगा है।
ये है पूरा मामला
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शहनवाज हुसैन ( Shahanwaz Hussain ) के खिलाफ दिल्ली की एक महिला ने 12 अप्रैल 2018 को छतरपुर के एक फार्म हाउस में नशीला पदार्थ खिलाकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। महिला ने इस बारे में दिल्ली पुलिस में शिकायत की थी लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं किए जाने के बाद उसने अदालत में अर्जी दाखिल कर भाजपा नेता के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की। इस मामले में साकेत जिला अदालत स्थित मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने 7 जुलाई 2018 को दिल्ली पुलिस को भाजपा नेता शहनवाज हुसैन के खिलाफ दुष्कर्म व अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था।