PM's Gujrat Visit : चुनाव परिणामों के अगले ही दिन गुजरात में "भगवा टोपी" में नजर आए प्रधानमंत्री, अब इसके क्या मायने हैं?

PM's Gujrat Visit : चुनाव परिणामों के अगले ही दिन शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने गृह राज्य गुजरात के दौरे पर थे, प्रधानमंत्री के पहुंचने पर वहां अहमदाबाद एयरपोर्ट से बीजेपी के प्रदेश कार्यालय 'कमलम' तक करीब 10 किलोमीटर लंबा भव्य रोड शो निकला गया.....

Update: 2022-03-11 11:13 GMT

PM Modi in Gujrat

PM's Gujrat Visit : बीते 26 जनवरी (26 January)  को जैसी ही राजपथ (Rajpath) और शहीद स्मारक स्थल पर उत्तराखंड (Uttarakhand) की एक विशेष टोपी में पहुंचे। देखते ही देखते उनकी यह टोपी सोशल मीडिया (Social Media) और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गयी। तब लोग इसके राजनतिक मायने तलाशने लगे ​थे। मोदी (Modi) की इस कवायद को उस समय पांच राज्यों में जारी विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) से जोड़कर देखा गया था। खैर, प्रधानमंत्री (Prime Minister) की उस विशेष टोपी को सिलेक्ट करने के पीछे जो भी मंशा रही हो, वर्तमान का सच ये है कि जिन पांच राज्यों विधानसभा चुनाव हुए थे उनमें से चार राज्यों यूपी, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में भाजपा ने बहुमत के साथ सत्ता में वापसी कर ली है।

पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव परिणामों के चुनाव परिणामों के अगले ही दिन शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने गृह राज्य गुजरात के दौरे पर थे। प्रधानमंत्री के पहुंचने पर वहां अहमदाबाद एयरपोर्ट से बीजेपी के प्रदेश कार्यालय 'कमलम' तक करीब 10 किलोमीटर लंबा भव्य रोड शो निकला गया। इस रोड शो के दौरान प्रधानमंत्री मोदी एक भगवा टोपी में नजर आए। जैसे ही इस भगवा टोपी के साथ प्रधानमंत्री (Prime Minister) का जनता के बीच अवतरण हुआ इस टोपी पर जगह-जगह चर्चा भी शुरू हो गयी।

पीएम मोदी की भगवा रंग की कमल निशान वाली जिस टोपी में रोड शो में नजर आए दरअसल, यह टोपी भी भाजपा की एक स्ट्रैटजी का ही हिस्सा है। यह टोपी भाजपा के लाखों कार्यकर्ताओं के बीच भी वितरित की गयी है। इसके भगवा टोपी से प्रधानमंत्री का लक्ष्य शायद भाजपा के नेताओं कार्यकर्ताओं को एकसूत्र में बांधने कस है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से यह भी दावा किया गया है कि गुजरात के आगामी विधानसभा चुनाव तक नेता से लेकर भाजपा के हर एक कार्यकर्ता इसी टोपी में नजर आएंगे।

यहां यह भी बताते चलें कि प्रधानमंत्री ने बीते सप्ताह 4 मार्च को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पांच साल बाद रोड शो किया था। इस दौरान वे बनारसी गमछा तो सर्दी में पहनी जाने वाली खादी की गर्म सदरी के साथ नेताजी सुभाष चंद्र बोस सरीखी भगवा रंग की टोपी पहले ठेठ बनारसी अंदाज में नजर आए थे।

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने बीते जुलाई 2017 में इजराइल की यात्रा हिमाचली टोपी पहनी थी, जिसमें गढ़वाली शैली की झलक थी। यह टोपी उस समय बहुत लोकप्रिय हुई थी और बाद में यह फैशन ट्रेंड में शामिल हो गई थी। इसके बाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हिमाचली टोपी की डिमांड बढ़ गई थी। फिर उसके बाद 'आजाद हिन्द फौज सरकार' की 75वीं जयंती के मौके पर 21 अक्टूबर 2018 को लालकिले में हुए समारोह में PM नरेंद्र मोदी आजाद हिन्द फौज की टोपी में नजर आए थे। इसी तरह 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड के दौरान मोदी ने उत्तरांचल की ब्रह्म कमल टोपी पहनी थी। ये दो अलग-अलग स्टाइल की टोपियां भी उस समय काफी चर्चा में रही थीं।

अस्सी के दशक में जब नरेंद्र मोदी आरएसएस के प्रचारक थे, तो वे आरएसएस के हर कार्यक्रम में काली टोपी पहना करते थे। हालांकि समय के साथ मोदी के पहनावे और खासतौर से उनकी टोपियों का रूप बदलता गया। अब प्रधानमंत्री ​अलग-अलग मौकों पर एक खास अंदाज की टोपी या पहनावे के साथ जनता पर एक खास छाप छोड़ते नजर आते है। इस बार में जिस टोपी को प्रधानामंत्री ने पहना उससे तो यही पता चलता है कि अपने गृह राज्य में आगामी चुनावों को दौरान और मोदी फिर कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रहे हैं। गुजरात में भगवा रंग और इस रंग की टोपियां भाजपा के लिए जनता को अपने पक्ष में करने और राष्ट्रवाद और हिदुत्व को धार देने में काम आती रहेंगी। अब भाजपा इसमें कितना और कब तक सफल होती है यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

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