Uttarakhand Election 2022 : अद्भुत प्रत्याशी ! टिकट मांगा भीमताल से, मिला कालाढूंगी से, लड़ रहा है रामनगर से

Uttarakhand Election 2022 : दो बार सांसद रह चुके डॉ. महेन्द्रपाल ने विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने से पहले नैनीताल से सटी भीमताल विधानसभा से कांग्रेस का टिकट मांगा था लेकिन उन्हें पार्टी ने भीमताल की जगह कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्र से टिकट दे दिया....

Update: 2022-01-31 14:42 GMT

(रामनगर सीट से चुनाव लड़ रहे डॉ. महेन्द्रपाल सिंह)

सलीम मलिक की रिपोर्ट

Uttarakhand Election 2022 : राजनीति का न कोई नियम है और न ही कोई सिर-पैर। यहां कब क्या उलट-फेर हो, इसका आकलन बड़े-बड़े राजनैतिक विशेषज्ञ भी नहीं लगा पाते। चुनावी बेला में विधायक बनने के लिए सबको एक अदद राजनैतिक टिकट की दरकार है। इसके लिए वर्षों की राजनीतिक निष्ठा ताक पर रखकर दूसरे दल में जाना पड़े तो उससे भी गुरेज नहीं होता। उत्तराखण्ड के विधानसभा चुनाव (Uttarakhand Election 2022) में इसी टिकट की जद्दोजहद में तो एक राजनैतिक हस्ती छब्बीस दिन में तीन पार्टी में छलांग लगाने का कारनामा कर चुकी है। लेकिन मुश्किल से मिलने यह टिकट किसी-किसी के लिए इतना मुश्किल भी नहीं होता। ऐसे ही एक प्रत्याशी बिन मांगे कांग्रेस के टिकट पर रामनगर विधानसभा क्षेत्र (Ramnagar Seat) से चुनाव लड़ रहे डॉ. महेन्द्रपाल सिंह हैं।

दो बार सांसद रह चुके डॉ. महेन्द्रपाल (Dr. Mahendrapal Singh) ने विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने से पहले नैनीताल से सटी भीमताल विधानसभा (Bhimtaal) से कांग्रेस का टिकट मांगा था। लेकिन उन्हें पार्टी ने भीमताल की जगह कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्र से टिकट दे दिया। यदि बात यहीं खत्म हो जाती तो राजनीति की अनिश्चितता ही क्या रह जाती। होना यह हुआ कि कालाढूंगी से सटी रामनगर विधानसभा सीट पर कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष रणजीत सिंह रावत (Ranjeet Singh Rawat) व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (Harish Rawat) में प्रत्याशी को लेकर रार छिड़ गई।

घोषित प्रत्याशी हरीश रावत का इतना तीखा विरोध हुआ कि इस आंच में हरीश रावत के हाथ झुलसने की नौबत आने लगी। इस प्रकरण से सहमी कांग्रेस ने डैमेज कंट्रोल करने का प्रयास किया तो पार्टी के घोषित प्रत्याशी हरीश रावत को रामनगर की जगह लालकुआं तथा टिकट की चाहत रखने वाले रणजीत सिंह रावत को रामनगर से सल्ट विधानसभा के लिए रुखसत होना पड़ा। डैमेज कंट्रोल का अंत के रूप में कांग्रेस पार्टी को अपने कालाढूंगी प्रत्याशी डॉ. महेन्द्रपाल सिंह (Dr. Mahendrapal Singh) को रामनगर से अपना प्रत्याशी बनाना पड़ा।

ऐतिहासिक रूप से कत्यूरी शासन से जुड़े पाल वंश के महेंद्रपाल पूर्व में रामनगर क्षेत्र के दो बार सांसद उस समय रह चुके हैं जब रामनगर नैनीताल लोकसभा का हिस्सा हुआ करती थी। इनका संबंध पांचवीं से सोलहवीं शताब्दी तक कुमाउं के अस्कोट के कत्युरी शासन जो पाल वंश के नाम पर जाना जाता है, से जुड़ा हुआ है। रामनगर का ढिकुली गांव कत्युरी शासकों की ग्रीष्मकालीन राजधानी रही है, जिसके अवशेष आज भी विद्यमान हैं।

कुल मिलाकर व्यवहार में नम्र, सरल और सुलभ व राजनीतिक छल कपट, तोड़ फोड़, गुटबंदी से कोसों दूर महेन्द्रपाल की ऐसी किस्मत से हर किसी को रश्क हो सकता है। क्योंकि जहां टिकट हासिल करने में कुछ लोगों के टांके हिल जा रहे हैं, वही यह इकलौते प्रत्याशी साबित हुए, जिसने टिकट मांगा कहीं से, मिला कही और से चुनाव लड़ रहा है कहीं और से।

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