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उत्तर प्रदेश

देश में 1200 दलित सांसद-विधायक, फिर भी हाथरस दुष्कर्म पीड़िता के लिए नहीं उठा पा रहे आवाज

Janjwar Desk
29 Sep 2020 5:56 PM GMT
देश में 1200 दलित सांसद-विधायक, फिर भी हाथरस दुष्कर्म पीड़िता के लिए नहीं उठा पा रहे आवाज
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हाथरस की दलित युवती के साथ इन चारों ने की थी दरिंदगी

अक्सर छोटी-छोटी बातों को लेकर भी दलितों के ऊपर अत्याचार का मुद्दा उठाने वाले दलित सांसद-विधायक उत्तर प्रदेश के हाथरस में गैंगरेप की शिकार हुई दलित लड़की के मामले में अबतक कोई खास मुखर नहीं हैं...

जनज्वार। देश में लगभग 1200 से ज्यादा दलित सांसद-विधायक हैं। सिर्फ लोकसभा में ही 121 सीटें सुरक्षित हैं, जाहिर है कि इनपर दलित वर्ग के ही सांसद चुनकर आए हैं। इसके अलावा सामान्य सीटों से भी इस वर्ग के कई सांसद चुनकर आए हैं।

अक्सर छोटी-छोटी बातों को लेकर भी दलितों के ऊपर अत्याचार का मुद्दा उठाने वाले दलित सांसद-विधायक उत्तर प्रदेश के हाथरस में गैंगरेप की शिकार हुई दलित लड़की के मामले में अबतक कोई खास मुखर नहीं हैं। इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं कि दलित हित की बात करनेवाले ये जनप्रतिनिधि आखिर इस नृशंस घटना पर अबतक चुप क्यों हैं।

उत्तरप्रदेश के हाथरस में गैंगरेप पीड़िता की आज इलाज के दौरान मौत हो गई है। इसके बाद पूरे देश में लोगों का गुस्सा बढ़ रहा है। वहीं, इस घटना के बाद यूपी की योगी सरकार सवालों के घेरे में आ गई है। विपक्षी दल लगातार यूपी सरकार पर हमला कर रहे हैं।

पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग जोरों पर है, हर कोई देश की बेटी के साथ हुई क्रूरता का पुरजोर विरोध कर रहा है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि देश के लगभग 1200 से ज्यादा दलित सांसदों-विधायकों की क्या भूमिका है? ये लोग उसको न्याय के लिए पुरजोर तरीके से मांग क्यों नहीं उठा रहे हैं?

उत्तरप्रदेश की विधानसभा में वर्ष 2017 में हुए पिछले चुनावों में 86 सीटें एससी-एसटी के लिए सुरक्षित थीं। जाहिर है, इन सीटों पर उस वर्ग के ही जनप्रतिनिधि चुनकर आए हैं। इनके अलावा सामान्य सीटों से भी उस वर्ग के प्रतिनिधि निर्वाचित होकर विधानसभा में आए हैं। ऐसे में दलित वर्ग से ही यह सवाल उठाया जा रहा है कि गृह राज्य की पीड़िता होने के बावजूद इस नृशंंस घटना केे बाद अबतक पीड़िता के लिए पुरजोर तरीके से न्याय की मांग क्यों नही की जा रही है?

दलित वर्ग के लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर इस मुद्दे पर इनकी चुप्पी क्यों है? क्या यह चुप्पी सोचनीय और बेचैन करने वाली नहीं? दलित अधिकारों को लेकर अक्सर दलीय सीमाएं और वर्जनाएं तोड़ देनेवाले ये दलित वर्ग के जनप्रतिनिधि इस मामले में आखिरकार अबतक चुप क्यों हैं?

आरोप है कि उत्तर प्रदेश के हाथरस के थाना चंदपा इलाके के एक गांव में 14 सितंबर को चार दबंग युवकों द्वारा 19 साल की दलित लड़की के साथ बाजरे के खेत में गैंगरेप किया था। इतना ही नहीं उसकी जीभ तक काट दी गई थी। उस लड़की की इलाज के दौरान दिल्ली एम्स में आज सोमवार 29 सितंबर को मौत हो गयी है। गैंगरेप और नृशंसता की शिकार लड़की की मौत की पुष्टि उसके भाई ने की है।

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