Ground Report : गुमला कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की लापरवाही से 28 छात्राएं फूड प्वाइजनिंग की शिकार, 2 की हालत खराब

Gumla News : झारखंड के गुमला जिले के डुमरी प्रखंड स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय 28 छात्राएं फूड प्वाइजनिंग का शिकार हुई हैं। इनमें से दो छात्राओं की स्थिति गंभीर है। इस मामले में स्कूल प्रबंधन की घोर लापरवाही सामने आई है।

Update: 2022-02-22 03:28 GMT

गुमला कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की लापरवाही से 28 छात्राएं फूड प्वाइजनिंग की शिकार।

कस्तूरबा विद्यालय फूड प्वाइजनिंग मामले में विशद कुमार की रिपोर्ट

Gumla News :  झारखंड के गुमला जिले के डुमरी प्रखंड स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय ( Kasturba Gandhi Residential Girls School Dumri ) प्रबंधन की लापरवाही की वजह से 28 छात्राएं फूड प्वाइजनिंग ( Food Poisoning ) का शिकार हुई हैं। उल्टी और तबीयत खराब की शिकायत की वजह से 7 छात्राओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जबकि दो छात्राओं की नाजुक स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल गुमला ( Sadar Hospital Gumla ) रेफर किया गया है। इस मामले में स्कूल प्रबंधन की घोर लापरवाही सामने आई है।

क्या है मामला




फूड प्वाइजनिंग ( Food Poisoning ) की शिकार छात्राओं के मुताबिक 20 फरवरी की रात करीब 7 बजे बच्चियों को हर रोज की तरह खाना दिया गया। खाने में चावल, दाल और आलू फूलगोभी की सब्जी दी गई थी। आलू फूलगोभी की सब्जी में से दवा की गंध आ रही थी। गंध की वजह से कुछ छात्राओं ने सब्जी खार्ई जबकि कुछ बच्चियों ने सब्जी खाने से इनकार कर दिया। जिन बच्चियों ने सब्जी का सेवन किया उन्हें लगभग एक घंटे के बाद उल्टी एवं पेट दर्द की शिकायत करने लगी।

इसकी सूचना मिलना पर विद्यालय के वार्डन ( school warden ) जेनिफा कुल्लू ने 28 बच्चियों का इलाज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डुमरी में ले जाकर कराया। दो बजे रात तक बच्चियों का इलाज चलता रहा। इसके पश्चात उन्हें विद्यालय भेज दिया गया। सोमवार की सुबह करीब 11 बजे कुछ बच्चियों की फिर से तबीयत खराब होने पर विद्यालय प्रबंधन ने मोटरसाइकिल में बैठाकर बच्चियों को अस्पताल ले गए और 7 बच्चियों का इलाज कराया। सात में से अंजली कुमारी ( 14 वर्ष ) और नीलिमा बडाइक ( 14 वर्ष ) की नाजुक स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल गुमला रेफर कर दिया गया।

मामले की नजाकत को देखते हुए एसडीओ प्रीति किस्कू पीड़ित छात्राओं से मिलने अस्पताल पहुंची। घटना के बारे में बीमार छात्राओं से जानकारी हासिल की। अस्पताल के चिकित्सक को बेहतर इलाज करने का निर्देश भी दिया। एसडीओ ने कहा कि घटना विद्यालय प्रबंधन की घोर लापरवाही को दर्शाता है। इसकी सूचना विद्यालय प्रबंधन द्वारा न तो विभाग को दी गई और न ही पुलिस प्रशासन को। इसके अलावा प्रखंड प्रशासन को भी सूचित नहीं किया गया।

मामले को रफा-दफा करते नजर आये बीईईओ

थाना प्रभारी मनीष कुमार सूचना मिलने पर थानेदार विद्यालय पहुंचे। जहां सभी पीड़ित बच्चियों से बाचतीत की ओर उनका दोबारा से इलाज कराया गया। बीइइओ जीतवाहन सिंह, बीपीओ अंजेलिना मिंज और अन्य शिक्षा कर्मी विद्यालय पहुंचे। बीइइओ ने मामले की गंभीरता को नजरअंदाज करते हुए लापरवाही के लिए जिम्मेदारी व्यक्तियों पर कार्रवाई करने के बदले मामले को रफा-दफा करते नजर आए। बीइइओ जीतवाहन सिंह ने कहा कि मैं तो शिक्षकों के ट्रेनिंग में था। तभी मुझे सूचना मिली कि कस्तूरबा विद्यालय के छात्राओं के साथ घटना घटी है।

वार्डन की लापरवाही आई सामने

विद्यालय की वार्डन जेनिफा कुल्लू इस घटना को गंभीरता से नहीं लेते हुए 21 फरवरी को सुबह ही मीटिंग की बातें कह गुमला चलीं गई। वार्डन ने कहा कि रात को खाना खाने के बाद छात्राओं ने उल्टी और पेट दर्द होने की शिकायत की तो तुरंत उसे अस्पताल ले जाकर इलाज कराया गया है। इस घटना में विद्यालय प्रबंधन की घोर लापरवाही नजर आ रही है। 20 फरवरी की रात 28 बच्चियों का जिस अस्पताल में इलाज कराया गया वहां किसी भी तरह की कोई सिक्यूरिटी नहीं थी। न ही अस्पताल में डॉक्टर मौजूद थीं। ऐसे में इनके साथ किसी भी तरह की कोई भी अप्रिय घटना घटती तो इसका जिम्मेवार कौन होता। इस बड़े सवाल से मुह नहीं मोड़ा जा सकता।

फूड प्वाइजनिंग की वजह से छात्राओं की हालत खराब

डुमरी अस्पताल के डॉ रोशन खलखो ने कहा की मामला फूड प्वाइजनिंग का है। खाद्य पदार्थ जैसे सब्जियों में किसी तरह के कीटनाशक के छिड़काव होने से ऐसा मामला हो सकता है। 7 बच्चियों को अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। दो बच्चियों को गुमला रेफर किया गया है। साथ ही 20 बच्चियों को दवा देकर विद्यालय में ही आराम करने की सलाह दी गई है।

2 छात्राएं बेहतर इलाज के लिए गुमला रेफर

फिलहाल, डुमरी अस्पताल में शबनम केरकेट्टा, कोमल कुमारी, मोनिका कुमारी, पूनम कुमारी, खुशबू कुमारी, अंजली कुमारी और नीलिमा कुमारी इलाज चली रहा है। वहीं अंजली कुमारी ओर नीलिमा कुमारी को बेहतर इलाज के लिए गुमला भेज दिया गया है।

कहना ना होगा कि विद्यालय प्रबंधन की ओर से मामले पर लापरवाही इतनी बरती गई है कि देर रात तक घटना की सूचना विद्यालय प्रबंधन के द्वारा न तो विभाग को दी गई, न ही पुलिस प्रशासन को।21 फरवरी की सुबह जब पुलिस को इसकी सूचना मिली तब थाना प्रभारी मनीष कुमार के नेतृत्व में फौरन विद्यालय पहुंचकर सभी पीड़ित बच्चियों का हाल चाल पूछते हुए दोबारा इलाज कराया गया। जहां मौके पर अन्य माध्यम से सूचना मिलने पर प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी जीतवाहन सिंह एवं अन्य शिक्षाकर्मी विद्यालय पहुंचे थे।

स्कूल प्रबंधन पर लगा इस बात का आरोप

प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी ने मामले की गंभीरता को नजर अंदाज करते हुए जांच कर संबंधित लापरवाह व्यक्तियों पर किसी भी तरह की कार्रवाई करने की बात कहने के बजाय गोल मटोल जवाब देते हुए मामले को रफा दफा करने की बातें करते रहे। विद्यालय की वार्डन घटना की गंभीरता को जानते हुए भी 21 फरवरी को सुबह ही मीटिंग की बातें कह गुमला चली गई। ऐसे में प्रतीत होता है की दूर दराज से आकर आवासीय विद्यालय में अध्ययनरत इन बालिकाओं के स्वास्थ्य के प्रति घोर लापरवाही बरती जा रही है। इस घटना पर अभिभावकों व ग्रामीणों में काफी रोष देखा गया। लोगों ने कहा कि स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं की जान खतरे में है।

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