हाईकोर्ट के बनभूलपुरा को उजाड़े जाने के फैसले के विरोध में ठिठुरती ठंड में सड़कों पर उतरे हजारों लोग

Update: 2022-12-28 18:08 GMT

सलीम मलिक की रिपोर्ट

Haldwani news : उत्तराखंड में बुधवार 28 दिसंबर की सबसे बड़ी खबर हल्द्वानी में कड़कड़ाती ठंड के बीच हजारों लोगों के सड़कों पर उतरकर अपने आशियाने बचाने के लिए हो रहे सत्याग्रह की है। नैनीताल उच्च न्यायालय के निर्देश पर रेलवे कॉलोनी में बसे चार हजार से अधिक घरों को तोड़ने के लिए मुस्तैद प्रशासनिक कार्यवाही का विरोध करने के लिए सुबह से ही हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं।

एक जनहित याचिका पर हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे कॉलोनी पर बीते कई दशकों से रह रही करीब पचास हजार की आबादी को एक हफ्ते के नोटिस पर हटाए जाने के निर्देश के बाद जिला व रेलवे प्रशासन ने इन लोगों को अवैध अतिक्रमणकारी मानते हुए यहां से हटाने के लिए कमर कस ली है, जबकि दूसरी ओर कुछ लोग इन लोगों के समर्थन में आकर इन्हें यहां से उजाड़े जाने का विरोध कर रहे हैं।


हाईकोर्ट ने वनभूलपुरा गफूर बस्ती में रेलवे की 29 एकड़ भूमि पर किए गए अतिक्रमण को ध्वस्तीकरण करने के आदेश दिए थे। इस जगह पर करीब 4365 अतिक्रमणकारी हैं। अतिक्रमण हटाए जाने की कवायद के बीच प्रशासन की ओर से 28 दिसंबर बुधवार का दिन इस क्षेत्र में मुनादी किए जाने और हदबंदी के पिलर चिन्हित करने के लिए तय किया गया था।

सत्याग्रह पर बैठे हजारों लोग

जिसके बाद बुधवार की सुबह से हल्द्वानी में रेलवे, प्रशासन और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने रेलवे की भूमि की पिलर बंदी शुरू कर दी। लेकिन इधर प्रशासनिक इस क्षेत्र में पहुंची, उधर टीम के अतिक्रमण वाले क्षेत्र में पहुंचते ही विरोध शुरू हो गया। सुबह करीब दस बजे तक हजारों की संख्या में महिला पुरुष अपने बच्चों के साथ कड़कड़ाती सर्दी के बीच सड़कों पर आकर धरने पर बैठकर सत्याग्रह करने लगे। हालांकि इस विरोध की आशंका के चलते मौके पर पहले से ही भारी पुलिसबल तैनात रहा, लेकिन लोगों के सड़कों पर उतरने की खबर मिलते ही मौके पर सिटी मजिस्ट्रेट ऋचा सिंह, एडीएम मनीष सिंह, एसपी सिटी हरबंस सिंह, एसपी क्राइम जगदीश चन्द्र, सीओ भूपेंद्र धौनी भी पहुंच गए। जिसके बाद जनाक्रोश को देखते हुए पुलिस ने आस-पास के इलाकों को सील कर दिया। इस दौरान बनभूलपुरा आने वाले सभी रास्ते ब्लॉक करते हुए एक प्रिजनर वैन भी मौके पर खड़ी कर दी गई।


हल्द्वानी में हुआ ऐतिहासिक विरोध

रेलवे कॉलोनी से अतिक्रमण हटाए जाने के लिए होने वाले सीमांकन के लिए मौके पर पहुंचे प्रशासन को लोगों के तीखे विरोध का सामना करना पड़ा। प्रशासनिक कार्यवाही के विरोध में बच्चों से लेकर बूढ़े तक सब सड़कों पर उतर पड़े। उन्होंने अतिक्रमण की कार्रवाई को गलत बताते हुए कहा कि जब उनके पास पट्टे हैं, रजिस्ट्री है तो फिर ऐसे में जमीन रेलवे की कैसे हो सकती है। 84 साल के शखावत हुसैन जो कि यहीं पर पले बढ़े और आज बुढ़ापे की दहलीज पर खड़े हैं।

उनका कहना था कि उनक जमीन रजिस्ट्री की है, जिसमें गवाह के रूप में लियाकत और मंगल सेन के हस्ताक्षर हैं। पहले यहां पर छप्पर के मकान थे, फिर टिन शेड डाले। बाद में मकान पक्के बनने शुरू हुए। जिसे अतिक्रमण बताया जा रहा है उन्होंने उसे जिंदगी भर की जमा पूंजी लगाकर आशियाना बनाया हुआ है।


74 साल के अकबर हुसैन जो 1984 से यहां चाय की दुकान चला रहे हैं। वह बताते हैं कि उनका जन्म यहीं पर हुआ। उनके बाप-दादा यहीं रहे। जमीन का पट्टा है, रजिस्ट्री है तो फिर ऐसे में जमीन रेलवे की कैसे हो गई। हाई कोर्ट के फैसले से निराश उनका कहना है कि न्याय पालिका पर भरोसा था। लेकिन वहां से भी न्याय नहीं मिला। रेलवे अतिक्रमण को लेकर बुधवार को हुए इस प्रदर्शन में लोगों के साथ विधायक सुमित हृदयेश, अब्दुल मतीन सिद्दीकी व शोएब अहमद भी धरने पर बैठे। जबकि कार्यवाही के विरोध में रेलवे बाजार, ताज चौराहा और आसपास की दुकानें बंद रही। वनभूलपुरा के इतिहास में लाइन नंबर 1 से लाइन नंबर 8 तक की सारी पहली बार बंद रही।

पहले दिन हुआ सीमांकन

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सीमांकन का काम हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू किया जा रहा है। अगर जनता विरोध करेगी तो पुलिस को सख्ती दिखानी पड़ेगी। दूसरी ओर विरोध के बाद भी प्रशासन की टीम ने रेलवे स्टेशन पहुंचकर सीमांकन काम शुरू कर दिया। टीम ने पुराने पिलरों की जांच करने के साथ ही जहां से पिलर हटाए गए हैं, वहां फिर से पेंट से लाल निशान लगाए जाने की कवायद शुरू की है। इसके बाद स्पष्ट हो जाएगा कि कितने क्षेत्र का अतिक्रमण तोड़ा जाएगा। सीमांकन के लिए एक टीम बनाई गई है। इसमें रेलवे, राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ सिटी मजिस्ट्रेट और एसडीएम शामिल हैं।


असलहा जमा कराने का डीएम ने दिया आदेश

इस मामले में रेलवे अतिक्रमण हटाने के दौरान लोगों के विरोध के बीच आग्नेय शस्त्रों के दुरुपयोग की संभावना को देखते हुए डीएम धीरज गर्ब्याल ने पूर्व में ही बनभूलपुरा थाने के एसओ को उस क्षेत्र के सभी लाइसेंसी असलहे जमा करने के आदेश दिए थे। इसके बाद बनभूलपुरा क्षेत्र के एसओ ने शस्त्र जमा कराने शुरू कर दिए हैं। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक पहले दिन 10 शस्त्र जमा हुए हैं। बनभूलपुरा क्षेत्र में 246 शस्त्र लाइसेंस हैं।

अतिक्रमण की जद में बने हैं परीक्षा केंद्र

जिला प्रशासन कोर्ट के आदेश के बाद जिस अतिक्रमण को हटाने के लिए हर दिन एक-एक कदम आगे बढ़ा रहा है, उसी बनभूलपुरा क्षेत्र में अतिक्रमण की जद में आ रहे कई स्कूलों को पटवारी-लेखपाल की भर्ती परीक्षा का केंद्र भी बनाया गया है। जिस परीक्षा के लिए यहां के स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है वह पटवारी-लेखपाल भर्ती की परीक्षा आठ जनवरी को है। नैनीताल जिले के 58 इंटर कालेजों में आठ जनवरी को लेखपाल, पटवारी की भर्ती परीक्षा आयोजित होगी।


नैनीताल जिले में 23 हजार परीक्षार्थी इस परीक्षा में शामिल होंगे। पर्वतीय जिलों के कई अभ्यर्थी परीक्षा देने हल्द्वानी आएंगे। इसके लिए प्रशासन ने इंटर कॉलेजों को अधिकृत किया है। बनभूलपुरा क्षेत्र में अतिक्रमण की जद में आ रहे करीब पांच स्कूलों में भी परीक्षा होनी है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस परीक्षा के मद्देनजर प्रशासन आठ जनवरी से पहले अतिक्रमण को हटाए जाने की कोई जमीनी कार्रवाई नहीं करेगा। दूसरी ओर लोक निर्माण विभाग ने भी अतिक्रमण हटाने में मदद के लिए बीस जेसीबी और बीस पोकलैंड के टेंडर निकाले हैं। यह टेंडर भी छह जनवरी को खोले जाएंगे।

एक सप्ताह में भूमि को खाली कराया जायेगा: एडीएम

नैनीताल जिले के एडीएम अशोक जोशी ने कहा कि उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार रेलवे की ज़मीन पर अतिक्रमित बस्ती खाली कराने के लिए रेलवे की ओर से मुनादी कर नोटिस दिये जाएंगे। मुनादी और पब्लिकेशन की सटीकता के लिए आज की कार्यवाही हुई है। चिन्हीकरण के इस काम को एक-दो दिनों में पूरा किया जाएगा। इसके बाद एक सप्ताह में भूमि को खाली कराने की कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। बताया कि रेलवे और राजस्व के नक्शों का मिलान कर कहीं 400, 600 तो कहीं 800 फिट की दूरी का अतिक्रमण चिन्हित किया गया है। अतिक्रमण किये गए 4365 मकानों के ध्वस्तीकरण में प्रथम चरण पर चिन्हीकरण के साथ उच्च न्यायालय के आदेश पर अतिक्रमण हटाने की चरणबद्ध कार्यवाही आज से शुरू हो गई है।


भाकपा माले पीड़ितों के साथ

इधर बनभूलपुरा में अपने आवास बचाने के अधिकार की लड़ाई में हजारों की संख्या में हल्द्वानी की सड़कों पर उतरी अवाम के संघर्ष का भाकपा (माले) ने समर्थन करते हुए कहा है कि भाकपा (माले) इस लड़ाई में दृढ़ता से बनभूलपुरा की जनता के साथ है।

इस मामले में भाकपा माले नैनीताल जिला सचिव डॉ. कैलाश पाण्डेय ने कहा कि "यह तथ्यों को दरकिनार कर एकतरफा कार्यवाही है जिसे बंद होना चाहिए। रेलवे के पास जमीन के कागज नहीं हैं। लेकिन रेलवे के बहाने अल्पसंख्यक बहुल बनभूलपुरा को उजाड़ने का खेल जारी है, यह खेल बंद हो। यदि रेलवे को जमीन देना इतना जरूरी है तो भाजपा की धामी सरकार को उजाड़ने से पहले हर हाल में गरीबों के पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए।"

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