ट्विटर पर फिर से ट्रेंड हुआ #शराबी_एंकर_दीपक_चौरसिया, माफी मांगने के बाद बुरी तरह हुए ट्रोल

Deepak Chaurasiya: आज सुबह से ही हैशटैग शराबी एंकर दीपक चौरसिया ट्रेंड कर रहा है। सोशल मीडिया यूजर्स उन्हें भारत की पत्रकारिता पर बोझ बताने लगे हैं। चौरसिया पर झूठी पत्रकारिता करने के आरोप लग रहे हैं...

Update: 2021-12-15 06:20 GMT

(शराब पीकर एंकरिंग मामले में दीपक चौरसिया फिर से हुए ट्रॉल)

New Delhi: सीडीएस जनरल बिपिन रावत (CDS General Bipin Rawat)की मौत के बाद शराब पीकर चैनल पर लाइव एंकरिंग मामले में जनर्लिस्ट दीपक चौरसिया (Deepak Chaurasiya) की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही। विवाद के बाद अपने चाहनेवालों से माफी मांगने के बाद दीपक चौरसिया (News Anchor Deepak Chaurasiya) एक बार फिर से ट्रॉल हो रहे हैं। आज सुबह से ही हैशटैग शराबी एंकर दीपक चौरसिया ट्रेंड कर रहा है। सोशल मीडिया यूजर्स उन्हें भारत की पत्रकारिता पर बोझ बताने लगे हैं। ऐसे लोग भारत का नाम खराब करते हैं। दीपक चौरसिया (Journalist Deepak Chaurasiya) पर झूठी पत्रकारिता करने के आरोप लग रहे हैं। लोगों का आरोप है कि इस शराबी पत्रकार की कोई नैतिकता और विश्वसनीयता नहीं है। ट्विटर यूजर्स इस बात का दावा कर रहें है कि दीपक चौरसिया ने साजिश के तहत  संत श्री आशारामजी बापू (Asharam Bapu) की छवि को बदनाम करने की कोशिश की है।

क्या है पूरा मामला

बता दें कि सीडीएस जनरल बिपिन रावत (CDS Rawat) की मौत के बाद देश के जाने माने जर्नलिस्ट दीपक चौरसिया ने अपने चैनल पर रात के 8.30 बजे प्राइम टाइम शो 'देश की बहस' कार्यक्रम होस्ट करते दिखे। 9 दिसंबर को जब सीडीएस जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत समेत अन्य सैन्य अधिकारियों का शव दिल्ली लाया जा रहा था, तब उन्होंने इस शो को होस्ट किया था। इस दौरान उनकी जुबान कंट्रोल में नहीं थीं। वह क्या बोल रहे थे कुछ नहीं पता चल रहा था। ऐसी स्थिति में उन्हें शो से हटा दिया गया और देखने वालों ने माना कि उन्होंने पीने के बाद शो को होस्ट किया। उन पर आरोप भी लगे थे कि वो शराब पीने के बाद सीडीएस को श्रद्धांजलि दे रहे थे।

रातोंरात उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वायरल वीडियो पर लोगों ने कई तरह के दावे किये। सोशल मीडिया यूजर्स के अनुसार, दीपक चौरसिया एक शादी समारोह में शिरकत करने के बाद सीधे शो होस्ट करने पहुंचे गए। वायरल वीडियो में दीपक चौरसिया जनरल रावत को जर्नलिस्ट कहते हुए सुनाई दे रहे हैं। वहीं, एक बार वह रावत को वीपी सिंह कह देते हैं।

एक ट्विटर यूजर ने दीपक चौरसिया (Deepak Chaurasiya Ban) को बैन करने की मांग के साथ लिका कि, ठयह पूरे देश के लिए शर्मनाक है क्योंकि दीपक चौरसिया CDS बिपिन रावत सर को नशे की हालत में श्रद्धांजलि देते हैं और उन्हें गलत नाम से भी बुलाते हैं। ऐसे पेड मीडिया कार्टूनों को जल्द से जल्द बैन कर देना चाहिए।"

आशाराम बापू को बदनाम करने का आरोप

शराब पीकर एंकरिंग करने के बाद दीपक चौरसिया (Deepak Chaurasiya Controversy) एक बार फिर संत आशाराम बापू के समर्थकों के निशाने पर आ गए। सोशल मीडिया के जरिए लोगों का कहना है कि इस तरह कि बिकाऊ मीडिया की बातों पर भरोसा करके हम अपने साधु संतों पर विश्वास करना बंद कर देते हैं। एक ट्विटर यूजर ने लिखा कि, "पत्रकारिता का स्तर इस कदर गिर गया है कि दीपक चौरसिया जैसे शराबी न्यूज रूम में बैठ जाते हैं और अपनी मर्जी से बोलते हैं। उन्होंने अपमानजनक और झूठी खबर के साथ संत श्री आशारामजी बापू की छवि खराब की।" वहीं, एक अन्य संत समर्थक ने लिखा, "क्या पेड मीडिया वालों के लिए अलग कानून है? एक छोटी बच्ची के सम्मान को कलंकित करने वाले दीपक चौरसिया को पॉक्सो एक्ट के बावजूद गिरफ्तार क्यों नहीं किया जा रहा है? हम #शराबी_एंकर_दीपक_चौरसिया की जल्द से जल्द गिरफ्तारी की मांग करते हैं।"

ट्विटर पर चौरसिया ने दी सफाई

लड़खड़ाती जुबान में दीपक चौरसिया का यह वीडियो वायरल होने के बाद उनकी कड़ी आलोचना हुई। लोगों ने उन्हें बिकाऊ पत्रकार और दारूबाज तक कह दिया। इसके बाद पत्रकार की ट्विटर के जरिए और से सफाई दी गई। अपने पोस्ट में उन्होंने कहा कि, "आप सभी को वीडियो देखकर जो लग रहा है वो पूरा सच नहीं है। सच ये है कि मेरे घर में शादी थी और बारात में ज्यादा डांस करने के कारण मेरे घुटने की पुरानी चोट दर्द देने लगी। शो चूंकी जिस मसले पर था उसे मैं छोड़ना नहीं चाहता था और शो पूरी तरह से ठीक जाए इसलिए मैंने पेन किलर खा ली। आपको बता दूँ मेरे घुटने में हेयरलाइन फ़्रैक्चर है।"

दीपक चौरसिया ने कहा, "मेरी गलती ये थी कि पेन किलर ज्यादा मात्रा में लेने से साइड इफेक्ट होता है, ये बात मुझे नहीं पता थी। इसलिए पेन किलर खाकर मेरी तकलीफ कम होने की बजाए बढ़ गई। वीडियो देखकर तरह तरह की बातें बनाई गई, जो सच नहीं है। मुझे पत्रकारिता में 25 साल से ज्यादा हो चुके हैं। इसलिए मुझे किसी से पत्रकारिता के एथिक्स सीखने की जरूरत नहीं है।"

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