नागरिकता संशोधन विधेयक पर सोशल मीडिया यूजर्स बोले 'किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़े है'

Update: 2019-12-10 06:29 GMT

नागरिकता संशोधन विधेयक पर लोकसभा में हुई जोरदार बहस, विरोध जताते हुए एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने बिल फाड़कर विरोध जताया, अमेरिका आयोग ने कहा गृहमंत्री अमित शाह पर प्रतिबंध लगाने का हो रहा विचार....

जनज्वार। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने सोमवार 9 दिसंबर को लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पेश किया। इस विधेयक पर लोकसभा में जोरदार बहस हुई। विधेयक को केंद्रीय कैबिनेट पहले ही मंजूरी दे चुका है। इस विधेयक के तहत पड़ोसी पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से शरण के लिए भारत आए हिंदू, जैन, बौद्ध सिख और पारसी समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है।

नागरिकता संशोधन विधेयक पर चर्चा करते हुए कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, ‘यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 5, 14 और 15 की मूल भावना के खिलाफ है। आर्टिकल 13, आर्टिकल 14 को कमजोर किया जा रहा है।’ जबकि कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी इस विधेयक का विरोध किया उन्होंने कहा, ‘धर्म क्या हमारे देश का आधार हो सकता है? जिन्हें धर्म के आधार पर देश चाहिए था, उन्होंने पाकिस्तान बनाया।’

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रूर ने इससे पहले कहा था कि संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक का पारित होना निश्चित तौर पर महात्मा गांधी के विचारों पर मोहम्मद अली जिन्ना के विचारों की जीत होगी। धर्म के आधार पर नागरिकता देने से भारत पाकिस्तान का हिंदुत्व संस्करण भर बनकर रह जाएगा।

नागरिकता संशोधन विधेयक पर एआईएमआईएम के नेता और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता देश की मूल संरचना का हिस्सा है। यह बिल मौलिक अधिकारों का हनन करता है। ओवैसी ने इस बिल को फाड़कर अपना विरोध जताया। टीएमसी सांसद सौगत राय ने कहा कि गृहमंत्री नए हैं, उन्हें शायद नियमों की जानकारी नहीं है। आज संविधान संकट में है।

माजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नागरिकता संशोधन विधेयक को संविधान का अपमान बताया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'ना किसान की आय दोगुनी हुई,ना गंगा साफ हुई, ना अर्थव्यवस्था में सुधार लाए ,ना काला धन वापस लाए, ना नौकरियां लाए, ना बेटियों को बचा पाए, ना विकास कर पाए, मैंने पहले कहा था। इनकी राजनीति ध्यान हटाने और समाज बांटने की है। नागरिकता संशोधन विधेयक भारत का और संविधान का अपमान है।'

हीं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नागरिकता संशोधन विधेयक को पेश करते हुए कहा, 'ऐसा नहीं है कि पहली बार सरकार नागरिकता के लिए कुछ कर रही है। कुछ सदस्यों को लगता है कि समानता का आधार इससे आहत होता है। इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश से आए लोगों को नागिरकता देने का निर्णय किया। पाकिस्तान से आए लोगों को नागरिकता फिर क्यों नहीं दी गई। आर्टिकल 14 की ही बात है तो केवल बांग्लादेश से आने वालों को क्यों नागरिकता दी गई?'

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शाह ने कहा, 'ये विधेयक 100% भी देश के अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है। विधेयक में कहीं भी, एक बार भी मुस्लिम समुदाय का जिक्र नहीं किया गया है। नागरिकता संशोधन विधेयक, संविधान के किसी भी अनुच्छेद का खंडन नहीं करता है। आज हमें इस विधेयक की जरूरत क्यों पड़ी? आजादी के बाद, अगर कांग्रेस ने धर्म के आधार पर देश का विभाजन नहीं किया होता, तो आज हमें इस विधेयक की जरूरत नहीं पड़ती। धर्म के आधार पर देश का विभाजन कांग्रेस ने किया था।'

हीं सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर भी नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर घमासान मचा हुआ है। माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर CABAgainstConstitution, #किसीकेबापकाभारतथोड़ीहै, #CitizenshipAmendmentBill2019 , #CABAgainstConstitution, #AsaduddinOwaisi हैशटेग के साथ इस मुद्दे पर बहस कर रहे हैं।

रिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल ने अपने ट्वीट में लिखा, 'संविधान निर्माताओं और स्वतंत्रता सेनानियों ने मिलकर एक साझा देश बनाया है। ये संघी बंदर उसे तोड़ना चाहते हैं।' अन्य ट्वीट्स में उन्होंने लिखा, 'पूरे संविधान में हिंदू या मुसलमान शब्द खोजकर दिखा दीजिए। हमारे संविधान निर्माता संघियों की तरह नीच नहीं थे। जब जिन्ना ने कहा कि भारत तो हिंदुओं का राष्ट्र बन जाएगा तो गांधी, आंबेडकर, नेहरू, अबुल कलाम आजाद ने कहा- किसी के बाप का भारत थोड़ी है।'

लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता हंसराज मीणा ने अपने ट्वीट में लिखा, 'प्रधानमंत्री @narendramodi जी, असम में सिटिजन अमेंडमेंट बिल को लेकर आग लगी हुई हैं। क्यों देश की एकता, अखंडता को खाक में मिलाने चाहते हो? वक्त है, संभल जाइये। बाकि शायद आपको पता नहीं कि इस मशाल में मुसलमानों के साथ आदिवासी भी है, अवगत रहे। मिलकर कड़ी लड़ाई होगी।'

क दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा, 'नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित हो गया। सभी से अनुरोध हैं कि नागरिकता संशोधन विधेयक की प्रतियां हर जगह जलाओ। यह ताबूत में आखिरी कील हैं। वक्त की मांग है कि हम सभी मिलकर विपक्षी दलों को यह एहसास कराएं कि यह हम सभी के लिए अस्वीकार्य हैं।'

हीं अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग ने नागरिकता संशोधन बिल को गलत दिशा में खतरनाक मोड़ बताते हुए कहा है कि अगर यह बिल संसद के दोनों सदनों में पास हो जाता है तो गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंध लगाने पर विचार किया जाना चाहिए।

 

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