AAP पार्षद ताहिर हुसैन पर लगा दिल्ली में दंगा भड़काने का आरोप, पुलिस ने किया घर सील

Update: 2020-02-27 14:16 GMT

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ताहिर पर यह भी आरोप लग रहा है कि 25 फरवरी को उनके चांदबाग स्थित घर से उपद्रवियों ने लोगों पर पथराव किया और पेट्रोल बम फेंके। हालांकि आप और ताहिर इस आरोप से कर रहे हैं इंकार, मगर अब एक वीडियो सामने आया है, जिसमें उनकी छत पर भारी मात्रा में पत्थर और पेट्रोल बम दिखायी दे रहे हैं....

जनज्वार। मीडिया में करावल नगर इलाके से आप पार्षद ताहिर हुसैन के घर की छत पर दिख रहे गुलेल, पेट्रोल बम और कट्टों और ट्रे में भरे मोटे पत्थर की फोटो और वी​डियो वायरल होने के बाद दिल्ली पुलिस ने उनका घर ​सील कर दिया है।

प पार्षद ताहिर हुसैन के एक आवास के साथ ही उसी परिसर में उनकी फैक्ट्री भी है। दिल्ली में भड़के दंगों को लेकर आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन पर आरोप लग रहा है कि हिंसा भड़काने में उनका हाथ है।

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दिल्ली दंगों की भेंट चढ़े इंटेलिजेंस ब्यूरो के अंकित शर्मा के परिजनों ने ताहिर हुसैन पर उनकी हत्या का आरोप लगाया है। ताहिर पर यह भी आरोप लग रहा है कि 25 फरवरी को उनके चांदबाग स्थित घर से उपद्रवियों ने लोगों पर पथराव किया और पेट्रोल बम फेंके। हालांकि आम आदमी पार्टी और खुद ताहिर इस आरोप से इनकार कर रहे हैं, मगर अब मीडिया में एक वीडियो सामने आया है, जिसमें उनकी छत पर भारी मात्रा में पत्थर और पेट्रोल बम दिखायी दे रहे हैं।

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गौरतलब है कि इसी घर का एक विडियो पहले भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वहां से लगातार पत्थर और पेट्रोल बम चल रहे थे। आईबी के अंकित शर्मा की हत्या के पीछे भी उनके परिजन इस घर की छत पर मौजूद लोगों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। मगर वे खुद को इसमें निर्दोष ठहरा रहे हैं और कह रहे हैं कि हिंसा वाले दिन वह खुद दिल्ली पुलिस से इलाके में शांति कायम करने की अपील कर रहे थे। उस अपील का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर आया है। ताहिर हुसैन के बचाव में आम आदमी पार्टी भी उतर गयी है और इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रही है।

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ज 27 फरवरी को दंगाग्रस्त इलाके में माहौल कुछ हद तक शांत होने के बाद मीडिया ताहिर हुसैन की छत पर पहुंचा था, जहां घर की छत पर पत्थर ही पत्थर दिखाई दिये। वहां कुछ पत्थरों का चूरा भी दिख रहा था। साथ ही गुलेल, कोल्ड ड्रिंक की बोतलों में पेट्रोल भरा बरामद किया गया, जिन पर कपड़ा लगाकर उनसे बम बनाने के सबूत नजर आ रहे थे। इसके अलावा ताहिर हुसैन की छत पर कई कट्टे, बोरियां मिलीं, जिनमें से कुछ में पत्थर भरे हुए थे। ये सारे सबूत इशारा कर रहे थे कि हिंसा के दौरान ताहिर हुसैन की छत का प्रयोग किया गया और कपिल शर्मा की तरह कहीं न कहीं उनका भी इस हिंसा के पीछे हाथ जरूर है।

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ईबी कर्मी अंकित की मौत के बाद उनके परिजनों ने तो सीधे तौर पर ताहिर हुसैन को उनकी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है। अंकित को उनके परिजनों ने क्षेत्र में माहौल खराब होने की सूचना दी थी और कहा था कि घर के लोग असुरक्षित हैं तो वह अपने आफिस से घर के लिए निकले, मगर रास्ते में ही उन्हें अगवा कर उनकी हत्या कर लाश नाले में फेंक दी गयी, जिसकी 2 दिन बाद 26 फरवरी को बरामदगी की गयी।

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मीडिया के सामने अपना पक्ष रखते हुए ताहिर हुसैन ने कहा है, '24 तारीख दोपहर करीब 1:00-1:30 बजे मेरे घर के आस-पास दंगाइयों ने उपद्रव करना शुरू किया। मुख्य गेट को तोड़कर उपद्रवी मेरे परिसर में घुस गए और परिसर की छत पर चढ़ गए। इससे घबराकर मैंने तुरंत अपने इलाके के एसएचओ पवन कुमार और एसीपी को फोन करने की कोशिश की, पर उनका फोन नहीं उठा। इसके बाद मैंने 100 नंबर पर 3 बार फोन कर पूरी जानकारी दी कि उपद्रवी किस तरह मेरे मुख्य परिसर का गेट तोड़कर अंदर घुस गए हैं और परिसर की छत पर चढ़ गए हैं। आखिर में मेरी बात डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस सूर्या जी से हुई और मैंने उन्हें सारी स्थिति बताई और तत्काल मदद भेजने की गुजारिश की। इसके बाद भी पुलिस फोर्स देर शाम करीब आठ 8:30 बजे ही पहुंच सकी। वहां पर सीनियर पुलिस अफसर डॉ ए के सिंगला मौजूद थे उनके साथ एक और वरिष्ठ अधिकारी थे जिनका नाम उन्होंने ज्वाइंट सीपी आलोक जी बताया।'

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ताहिर हुसैन आगे कहते हैं, 'पुलिस अधिकारियों ने मुझे सुरक्षा का आश्वासन दिया और कहा कि मैं अपने परिवार को निकालकर किसी सुरक्षित स्थान पर ले जा सकता हूं। पूरी तलाशी के बाद पुलिस ने परिसर का कब्जा ले लिया और बिल्डिंग की छत पर पुलिस तैनात हो गई। जब 25 फरवरी सुबह करीब 8:30 बजे मैं लौटा तो वहां मौजूद भीड़ ने मेरे खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। माहौल खराब होता देख पुलिस ने मुझे वहां से लौट जाने को कहा। इसके बाद लौटकर मैं उस घर पर नहीं गया। वहां क्या हुआ किसने क्या किया इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है।'

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